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World Environment Day 2019:भारत में हवा-मिट्टी-पानी को लेकर कब होंगे चुनाव

World Environment Day 2019

रायपुर- दिनों दिन पर्यावरण प्रदूषित होता जा रहा है,इसके प्रति हम आज भी गंभीर नहीं हुए,इसका पता इसी बात से चलता है कि-अभी हाल ही में ऑस्ट्रेलिया में हुआ चुनाव हवा,पानी,मिट्टी जैसे मुद्दों पर केंद्रित था।लेकिन अपने यहां हुए चुनाव में पर्यावरण हाशिये पर रहा।ऑस्ट्रेलिया के चुनाव में पर्यावरण के मुद्दे की प्रमुखता का का कारण यह था कि-शताब्दी का सबसे बड़ा सूखा इस बार पड़ा था।वहां के मुरे डार्लिंग नदी तंत्र में दस लाख मछलियां सूखे के कारण मर गईं।वहीं दूसरी तरफ क्वींसलैंड में पांच लाख मवेशी बाढ़ में बह गए और जंगल की आग ने वर्षा वनों का बड़ा नुकसान किया।दावानल ने करीब एक लाख 90 हजार हेक्टेयर में फैले वनों को लील डाला।इसलिए वहां के राजनीतिक दलों के घोषणा पत्रों में पर्यावरण संरक्षण जैसे मुद्दे शामिल थे।लेबर पार्टी ने अपने चुनाव प्रचार में वर्ष 2030 तक कार्बन उत्सर्जन को 45 फीसदी तक घटाने का दावा किया है।ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन के द्वारा किए गए सर्वेक्षण में पाया गया कि वहां चुनाव में पर्यावरण ही सबसे प्रमुख मुद्दा रहा।ऑस्ट्रेलिया ही नहीं,हाल ही में ब्रिटिश पार्लियामेंट में भी वायु प्रदूषण को लेकर जमकर खींचतान हुई है और आपातकालीन स्थिति की तर्ज पर उपायों पर पहल की बात की गई।

चीन में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर नए सिरे से कमर कसी गई और पिछली ग्लोबल एयर रपट की तुलना में आज बेहतर स्थितियां हैं।चीन दुनिया का वह देश है,जिसकी अर्थव्यवस्था तो तेजी से बढ़ी ही,वह वायु प्रदूषण को लेकर भी गंभीर रहा और उससे मुक्त होने के उपाय भी खोजे।आज बीजिंग व शंघाई काफी हद तक वायु प्रदूषण मुक्त हो चुके हैं।

लेकिन अपने देश में परिस्थितियां पूरी तरह विपरीत हैं।हवा,पानी,मिट्टी जंगल के हालात न तो समाज को विचलित करते हैं,न ही सरकार को। और यही कारण है इस देश में पर्यावरण बड़ा मुद्दा नहीं बन सका,बल्कि ग्लोबल एयर रिपोर्ट को अमान्य बताकर कहा गया कि-ऐसी रिपोर्ट में कोई दम नहीं है।जाहिर है,जब तक पर्यावरण एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा नहीं बनेगा,तब तक राजनेता इसे प्राथमिकता नहीं देंगे और जब तक यह चुनावी मुद्दा नहीं होगा,तब तक हम इसे राष्ट्रीय मुद्दा नहीं बना पाएंगे।पर्यावरण के राष्ट्रीय मुद्दा बनने पर संसद इससे मुंह नहीं फेर पाएगा। ऐसा पूरी दुनिया में हो रहा है।यही कारण है कि-पर्यावरण संयुक्त राष्ट्र का एक बड़ा मृद्दा बन चुका है।

संयुक्त राष्ट्र ने इस बार का पर्यावरण दिवस को वायु प्रदूषण से जोड़ा है।यह सही भी है,क्योंकि अभी हाल ही में ग्लोबल एयर रिपोर्ट ने विश्व में बढ़ते वायु प्रदूषण पर चिंता जताई है।इस रिपोर्ट के अनुसार दुनिया की 91 फीसदी आबादी किसी न किसी रूप में वायु प्रदूषण की चपेट में है।

इतना ही नहीं,हर दिन 800 लोग इसके प्रकोप से पीड़ित हैं।अकेले वर्ष 2017 में 30 लाख लोगों ने वायु प्रदूषण के कारण अपनी जान गंवाई, जिनमें भारत और चीन अग्रणी रहे।इसकी चपेट में बच्चे व बुजुर्ग ज्यादा आए हैं।अपने देश में गुरुग्राम,गाजियाबाद,फरीदाबाद,नोएडा,पटना, लखनऊ,दिल्ली,जोधपुर,मुजफ्फरपुर,वाराणसी,मुरादाबाद व आगरा सबसे घातक शहरों में दर्ज हुए हैं।साथ ही इस प्रदुषण के क्षेत्र में राजधानी रायपुर भी पीछे नहीं है।यहाँ की बढ़ती आबादी की वजह से पर्यावरण प्रदुषण में वृद्धि हुई है।जो एक विकराल समस्या है।इस पर हमें काबू पाना होगा वरना यह हम पर हावी हो जाएगा।

एक दिन ऐसा आएगा …….जब मानव ….मानव को खाएगा ,
मरते हुए शेरों से ……जंगल के राजा की याद दिलाएगा ।
जब जंगल का राजा ही ……लुप्त हो जाएगा ,
तब कैसे आहार श्रृंखला …..अपना चक्र पूरा घुमाएगा ?
तब हर प्रजाति का अंत ……धीरे-धीरे हो जाएगा ,
और तब मानव ……..मानव को ही खा जाएगा ।

अजीब बात है कि-इसके बावजूद किसी के कानों पर जूं नहीं रेंगती है।असल में पर्यावरण पर अर्थव्यवस्था भारी पड़ रही है।पश्चिम के विकास मॉडल की तर्ज पर हम वह सब कुछ करने पर उतारू हैं,जो पश्चिमी देशों ने विकास के नाम पर किया।लेकिन उन देशों की तरह पर्यावरण के प्रति सजगता और संवेदनशीलता हम नहीं सीख सके।हमें अपना विकास मॉडल चुनना होगा, ताकि हम पर्यावरण संरक्षण के प्रहरी भी बनें और प्रकृति के प्रहार से बच भी सकें।

हम सब भली भाति यह जानते है कि-पर्यावरण का हमारे जीवन में कितना महत्व है| पर्यावरण की ही वजह से मानव जीवन का अस्तित्व है| इसी की बदोलत हमे रोज़ाना की सभी सुविधा मिलती है| विश्व पर्यावरण दिवस एक अभियान है जो सालाना 5 जून को मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान 1972 में ग्रह पर्यावरण दिवस मनाने की घोषित की थी।

चिंतित हैं ……..आज सभी बुद्धिजन ,
कैसे बचाएँ हम …….अपना पर्यावरण ?
कोई कहे ……नए वृक्ष लगाओ ,
कोई कहे …..जो हैं ……उन्हें बचाओ ।

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