महिला समूह ने कपड़े के बैग निर्माण से की 50 हजार रूपए की आमदनी

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज आपने निवास कार्यलय में वर्चुअल माध्यम से आयोजित रोका-छेका कार्यक्रम के शुभारंभ के दौरान विभिन्न गौठानों में कार्यरत स्व सहायता समूह की महिलाओं से चर्चा की। चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री बघेल ने बलौदाबाजार जिले के ग्राम केशली की ज्योति स्व सहायता समूह की अध्यक्ष देशना भवसार से भी रूबरू हुए। उन्होंने मुख्यमंत्री जी को बताया कि यहां ग्राम केशली स्थित गौठान में महानदी वनिता शेड के अंतर्गत महिलाओं द्वारा विभिन्न प्रकार की आजीविका गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है।

इनमें ज्योति स्व सहायता समूह के द्वारा कपड़े से निर्मित बैग का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें कपड़े की कटिंग और सिलाई मशीन के द्वारा की जाती है। समूह की महिला सदस्यों द्वारा टिफिन बैग, यात्री बैग, स्कूल बैग का निर्माण किया जाता है। इससे समूह को अब तक 50 हजार की आमदनी हो चुकी है। इस महानदी वनिता शेड में मुख्य रूप से चार स्व सहायता समूह कार्यरत हैं, जिनमें से महामाया स्व सहायता समूह वर्मी कंपोस्ट और मसाला निर्माण का कार्य करती है, जागृति महिला स्व-सहायता समूह द्वारा वाशिंग पाउडर व साबुन का निर्माण कार्य किया जाता है और महामाया स्व सहायता समूह द्वारा पोल्ट्री का कार्य किया जाता है।

लगभग 11 समूहों में जिनमें से मुख्य रूप से 4 स्व-सहायता समूह वनिता महानदी शेड के अंतर्गत कार्य करती हैं उन्हें प्रतिमाह 5 से 8 हजार रुपए तक की आमदनी होती है।उन्होंने मुख्यमंत्री बघेल को बताया कि गौठान से लगे हुए चारागाह में जागृति महिला स्व सहायता समूह द्वारा मक्के की खेती की गई थी, जिसके चारे का आवश्यकतानुसार उपयोग गौठान में उपस्थित पशुओं के लिए किया गया। मक्के की कटाई के बाद यहां सब्जियों की खेती की गई जिससे 4 से 5 हजार रुपये का लाभ समूह को हुआ।

यहां पानी की सुविधा अच्छी होने के कारण अब मवेशियों के लिए हरे चारे के रूप में नेपियर घास लगाने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने बताया कि गौठान में अब तक 3 हजार क्विंटल गोबर की खरीदी की जा चुकी है जिसमें से 630 क्विंटल खाद का शासकीय सोसाइटी के माध्यम से विक्रय किया जा चुका है तथा 565 क्विंटल खाद का निर्माण और पैकेजिंग का कार्य जारी है। वर्मी कंपोस्ट से समूह को अब तक उनके खाते हैं 24 हजार रुपए तथा चेक के माध्यम से 20 हजार की आमदनी हो चुकी है। ग्राम केशली की सरपंच वीणा वर्मा ने मुख्यमंत्री बघेल को बताया कि हमारे गांव में आज से रोका-छेका कार्यक्रम का शुभारंभ किया जा रहा है।

जिसमें सभी गांव के सदस्यों और पशुपालकों के परस्पर सहयोग से इस कार्यक्रम को सफल बनाने का निर्णय लिया गया जिसके लिए उन्होंने 4 चरवाहे की व्यवस्था की है।मुख्यमंत्री ने चर्चा के दौरान कहा कि बछड़े के बधियाकरण पर भी जोर देना होगा ताकि नस्ल सुधार करने में आसानी हो। छत्तीसगढ़ के वातावरण में देसी गाय कम बीमार पड़ते हैं, इसलिए जरूरी है कि देसी गाय का नस्ल सुधार किया जाए।

अब गांव में जो आजीविका विकास के लिये शेड निर्माण हो रहे हैं उससे प्रत्येक गांव में 40 से 50 महिलाओं को रोजगार मिलने लगा है प्रदेश में लगभग 20 हजार गांव हैं कल्पना करें तो लाखों परिवारों की महिलाओं को रोजगार मिलेगा और प्रत्येक घरों की स्थिति सुधरेगी। यह मानवीय प्रवृत्ति कि स्व-निर्मित तथा परिवार के सदस्यों द्वारा बनाये गए वस्तुओं के उपयोग से ज्यादा आत्मिक आनंद मिलता है, अपेक्षाकृत बाजार से खरीदे वस्तुओं से।

Leave A Reply

Your email address will not be published.