आज फिर एक 19 साल की मासूम सी बेटी के जिस्म से खेलकर उसे अपना जीवन छोड़ने को मजबूर किया गया,ये हादसा 14 सितम्बर 2020 की है,जब ये मासूम अपनी माँ के साथ खेतो मे घास काट रही थी,वही थोड़ी ही दूर मे ये दोनों घास इकट्ठा कर रहे थे।कुछ देर बाद ये मासूम अपनी माँ से बिछड़ गयी,माँ को सुनने मे थोड़ी परेशानी होती थी।इसी बात का फायदा उठाकर चार दरिंदे संदीप, लवकुश, राजकुमार और रवि ने मासूम के गले मे दुपट्टा डाल उसे पीछे की ओर खींचते हुए ले गए।

उन दरिंदो ने ना सिर्फ मासूम का बलात्कार किया।उन्होंने दरिंदगी की सारी सीमाए पार कर दी।उन दरिंदो ने जो मासूम के साथ किया।उसकी कल्पना करने पर भी रूह काँप उठती है।मासूम आवाज ना निकाल पाए इसलिए उन लोगो ने मासूम की जीभ काट दी।उसके बाद भी इन दरिंदो का जी नहीं भरा उन्होंने मासूम की गर्दन तोड़ दी।फिर उन दरिंदो को लगा शायद मासूम अब जान जा चुकी है तो उस मासूम को वहा उसी हालत मे छोड़कर भाग गए।

कुछ देर बाद मासूम की माँ घटना स्थल पे पहुंची तो अपनी मासूम सी बेटी को बिना कपड़ो के खून से लथपथ पाया,बेटी को इस हालत मे देख माँ ने बेटी को अपने आँचल से ढक बेटे को मदद के लिए बुलाई,फिर वो मासूम को थाना लेकर गए पर उन्हें वहा कोई खास मदद नही मिली।फिर उसे अस्पताल ले कर गए जहाँ मासूम 15 दिनों तक मौत से लड़ती रही। आखिरकार 15 दिनों बाद मासूम ने अपना दम तोड़ दिआ और हमेशा के लिए चली गयी।

इतना सब कुछ होने के बाद भी उस बच्ची को इंसाफ नहीं मिला उस माँ का दर्द हम बया नहीं कर सकते,जिसने अपनी बेटी खोई उसके बाद भी उसके परिवार से बेटी के अंतिम संस्कार का हक छीन लिया गया।आखिर उस बच्ची का या उसके परिवार का क्या कुसूर था जो ऐसी सजा मिल रही।ये सब होने के बाद भी पुलिस उन्हें धमका रही।उन्हें किसी से मिलने नहीं दिया जा रहा काफी मिन्नतों के बाद मीडिया को परिवार से मिलने दिया गया।

आखिर किस बात का डर है उत्तरप्रदेश पुलिस को और वहा की सरकार को जो जरा सी इंसानियत भी ना रही।इस घटना के बाद सरकार परिवार को 25 लाख देगी पर क्या 25 लाख से उन्हें उनकी बेटी वापस मिलेगी,वो सपने जो उसके माँ-बाप ने अपनी बेटी के लिए देखा था।होगा उस मासूम के सपने अब क्या सरकार 25 लाख से वापस ला पाएगी क्या? 25 लाख देने के बाद ये यकीन दिला पायेगी? सरकार की फिर से किसी बेटी के साथ बिना किसी गलती के उसे ऐसी सजा ना मिले।आज उस मासूम के साथ ऐसा हुआ….क्या पता कल हम मे से कोई एक हो…..क्या पता कल वो लड़की मै भी हो सकती हु….मै कल्पना भी करती हु…उस मासूम के दर्द की तो मेरी रूह काँप जाती है।मेरा आप सब से निवेदन है जो भी इसे पढ़ रहा है।अपने तरीके से उस मासूम को इन्साफ दिलाने मे मदद करें।उस मासूम के लिए आवाज उठाये हो सके तो उस मासूम की आवाज बने।

✍️ कंचन ठाकुर, छात्र- पत्रकारिता संकाय

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