गलवां घाटी में उस रात क्यों हुई थी हिंसक झड़प,वीके सिंह ने किया रहस्यमय दावा,पढ़ें पूरी खबर

लद्दाख की गलवां घाटी में चीनी सैनिकों से साथ हुई हिंसक झड़प को लेकर केंद्रीय मंत्री और पूर्व सेना प्रमुख वीके सिंह ने बड़ा दावा किया है। सिंह ने कहा है कि गलवां घाटी में भारत-चीन सैनिकों के बीच एक रहस्यमय आग की वजह से हिंसक झड़प हुई। आग चीनी सैनिकों के टेंट में लग गई थी।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अचानक लगी आग से भारतीय सैनिक भड़क उठे थे। उन्होंने कहा कि फिलहाल यह कह पाना मुश्किल है कि चीनी सैनिकों ने टेंट में क्या रखा हुआ था, जिसके चलते वह आग लगी। हालांकि, वीके सिंह का यह दावा उस बात के बिल्कुल उलट है, जिसमें कहा गया था कि चीनी सैनिकों के पीछे न हटने की बात पर भारतीय सैनिकों ने टेंट उखाड़कर फेंका था।

चीन क्यों कब्जाना चाहता है पेट्रोलिंग प्वांइट 14, केंद्रीय मंत्री ने बताया

वीके सिंह ने एक न्यूज चैनल से बातचीत में कहा कि गलवां नदी का सात से आठ किलोमीटर का इलाका हमारे पास है, यहीं पर पेट्रोलिंग प्वांइट 14 स्थित है। उन्होंने बताया कि पेट्रोलिंग प्वांइट 14 का इलाका भारत के पास साल 1962 से है। 

सिंह ने बताया कि यह विवाद तब शुरू हुआ, जब श्योक नदी के साथ-साथ एक रोड बनाई गई। यह रोड दौलत बेग ओल्डी तक जाती है। उन्होंने बताया कि पहले यहां तक जाने में 15 दिन लगते थे, लेकिन सड़क बनने के बाद यह दूरी दो दिन में पूरी की जा सकती है। 

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि चीनी सैनिकों को यह रोड नहीं दिखाई दे रही थी, इसके बाद चीनी सैनिक भारतीय क्षेत्र में घुस आए और टेंट स्थापित कर दिए। वहीं, चीनी सैनिकों की इस हरकत पर भारतीय जवानों ने उन्हें रोक दिया। 

सिंह ने बताया कि इस घटना के बाद दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई। पहले कमांडिंग अफसर स्तर पर वार्ता हुई, जिसमें कोई हल नहीं निकला। फिर जनरल स्तर पर वार्ता की गई, इसमें भी कोई हल नहीं निकल पाया। आखिरकार लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की वार्ता में तय किया गया कि दोनों पक्ष 15 जून से पहले वाली स्थिति में तैनात होंगे। 

पेट्रोलिंग प्वांइट 14 से चीन ने नहीं हटाया टेंट, इस पर हुआ विवाद

वीके सिंह ने बताया कि 15 जून की रात जब कमांडिंग ऑफिसर संतोष बाबू पेट्रोलिंग प्वांइट 14 पर पहुंचे तो, उन्होंने पाया कि चीन ने वहां से टेंट नहीं हटाए थे। दरअसल, चीन ने वह टेंट यह देखने के लिए लगाए थे कि भारतीय सेना पीछे गई या नहीं।

उन्होंने बताया कि फिर जब बातचीत में दोनों के पीछे जाने की बात हुई तो संतोष बाबू ने चीनी सैनिकों से उसे हटाने को कहा। वीके सिंह से मुताबिक, चीनी जवान टेंट हटा रहे थे कि अचानक उसमें आग लग गई। हालांकि, अभी तक यह साफ नहीं है कि चीनियों ने टेंट में क्या रखा हुआ था। सिंह ने कहा कि इसके बाद ही सैनिकों के बीच पहले बहस हुई जो फिर हिंसक झड़प तक पहुंच गई।

पूर्व सेनाध्यक्ष ने कहा कि झड़प के दौरान चीनी सैनिकों ने और जवानों को बुलाया। इस पर भारत ने भी अपने अतिरिक्त जवानों को बुला लिया। उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों के बीच हिंसक झड़प हुई, इसमें भारतीय पक्ष के 20 जवान शहीद हो गए। वहीं, इस घटना में चीन के भी 43 जवान हताहत हुए। उन्होंने कहा कि चीनी सैनिकों के हताहत होने की संख्या अधिक भी हो सकती है। 

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