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Auto Expo में क्यों खत्म हो रही है ऑटो कंपनियों की दिलचस्पी,वजह कर देगी हैरान!

Auto Expo

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ऑटो एक्सपो (Auto Expo) का नाम सुनते ही आंखों में अलग ही चमक छा जाती है। दिमाग में गाड़ियों चमकती-दमकती गाड़ियों के तस्वीरें तैर जाती हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों से ऑटो एक्सपो (Auto Expo) को लेकर लोगों में क्रेज कम होता जा रहा है। एशिया के सबसे बड़े मोटर शो में शुमार दिल्ली ऑटो एक्सपो के साथ भी कुछ ऐसा ही है। देश की ऑटो इंडस्ट्री और ज्यादा चमकने की बजाय फीकी होती जा रही है।

बड़े ब्रांड्स गायब

2018 में हुए ऑटो एक्सपो की बात करें, तो उस समय 119 ऑटो कंपनियों ने हिस्सा लिया था, जिसमें 53 ऑरिजनल इक्विपमेंट मैन्यूफैक्चरर्स थे। इनकी संख्या 2016 में हुए ऑटो एक्सपो से भी कम थी। वहीं बड़े ब्रांड्स जैसे ऑडी, फॉक्सवैगन, स्कोडा, फोर्ड, निसान, डैटसन, जैगुआर लैंड रोवर, जीप जैसी बड़ी दिग्गज कंपनियां इस शो से गायब थीं।

इस बार केवल 95 कंपनियां

वहीं इस साल भी कुछ ऐसा ही दिखने को मिल रहा है। चीनी कंपनियों ने तो थोड़ी बहुत इस एक्सपो में जान भी डाल दी है, लेकिन कई बड़ी कंपनियों ने तो हिस्सा लेने से मना कर दिया है। पांच से 12 फरवरी तक चलने वाले ऑटो एक्सपो 2020 में इस बार मात्र 95 कंपनियां ही हिस्सा ले रही हैं, जिनमें मात्र 34 ही ऑरिजनल इक्विपमेंट मैन्यूफैक्चरर्स हैं। इस बार फोर्ड, होंडा कार्स, टोयोटा किर्लोस्कर, हीरो मोटोकॉर्प, अशोक लेलैंड 15वें ऑटो एक्सपो में हिस्सा नहीं ले रही हैं।

बड़े मोटर शोज में भी यही कहानी

खास बात यह है कि ऐसा अकेला भारत में नहीं हो रहा है, बल्कि बाकी देशों में भी ऐसा ही ट्रेंड देखने को मिल रहा है। उदाहरण के लिए 2018 के पेरिस मोटर शो में बड़ी संख्या में कई कंपनियों जैसे फॉक्सवैगन, निसान, ओपेल, मित्सुबिशी, फोर्ड और वॉल्वो जैसी कंपनियों ने इस महाआयोजन में हिस्सा नहीं लिया। वहीं इस साल टाटा मोटर्स ने जिनेवा मोटर शो में शामिल होने से ही मना कर दिया। गौरतलब है कि पिछले साल इसी मोटर शो में ही टाटा मोटर्स ने अपनी प्रीमियम हैचबैक कार टाटा अल्ट्रोज और 7-सीटर एसयूवी बुजार्ड कॉन्सेप्ट को शोकेस किया था।

इस बार नहीं होगा फ्रैंकफर्ट मोटर शो

वहीं फ्रैंकफर्ट मोटर शो की बात करें, तो यह सबसे प्रतिष्ठित शो है, जिसे इंटरनेशनल ऑटोमोबाइल एग्जीबिशन भी कहा जाता है। इसका आयोजन करने वाली संस्था वर्बेंडर ऑट़ोमोबिलीइंडस्ट्री (VDA) ने इस बार आयोजित करने से इंकार कर दिया है। वहीं फैसला किया गया है कि 2021 में इसका आयोजन फ्रैंकफर्ट की बजाय बर्लिन, म्यूनिख या हैमबर्ग में किया जाए।

कम हो रहे हैं दर्शक

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इसके पीछे वजह मानी जा रही है कि इसमें लगातार हिस्सेदारी घट रही थी। पिछले कई सालों में इंटरनेशनल ऑटोमोबाइल एग्जीबिशन में आने वाले दर्शकों और एग्जीबिटर्स की संख्या लगातार गिर रही थी। पिछले साल 550000 दर्शकों ने हिस्सा लिया, जबकि 2017 में यह संख्या 810000, तो 2015 में 931000 थी।

दर्शकों की बदल रही है पसंद

वहीं धीरे-धीरे मोटर शोज का कॉन्सेप्ट भी बदल रहा है। अब वे केवल कारों, बाइक्स, बस और ट्रकों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि वहां आने वाले दर्शकों की पसंद भी बदल रही है। अब वे ऑटोमोटिव से कुछ ज्यादा चाहते हैं। जैसे ऑटोमोबाइल में उन्हें परफॉरमेंस से ज्यादा टेक्नोलॉजी और डिजाइन में दिलचस्पी है।

टेक शोज बन रहे हैं पसंद

यही वजह है कि कुछ ऑटो कंपनियां बड़े टेक शो जैसे कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स शो और वीवा टेक में हिस्सा लेने लगी हैं। दुनियाभर के बड़े ऑटो शोज में कंपनियों की दिलचस्पी कम होने के पीछे यह एक बड़ा कारण है। जैसे इस बार सीईएस 2020 में आठ ऑटोमोबाइल कंपनियों और ऑटो कंपोनेंट मैन्यूफैक्चरर्स ने हिस्सा लिया। जहां उन्होंने अपने कॉन्सेप्ट व्हीकल्स और टेक्नोलॉजी को प्रदर्शित किया।

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