Kangana Ranaut
Kangana Ranaut

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद से इस मुद्दे पर बॉलीवुड जगत से अगर कोई सबसे ज्यादा सक्रिय होकर अपनी बात रख रहा है, तो वो अभिनेत्री कंगना रनौत। कंगना लगातार बॉलीवुड माफिया, नेपोटिज्म और अब ड्रग्स के मुद्दे पर खुलकर अपनी बात रख रही हैं। बॉलीवुड अभिनेत्री के बयानों के चलते उन पर राजनीतिक पार्टियों से लेकर बॉलीवुड सेलिब्रिटिज तक ने निशाना साधा। वहीं, अब सरकार ने उन्हें वाई श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की है। 

दरअसल, कंगना रनौत और शिवसेना नेता संजय राउत के बीच जुबानी जंग तेज हो गई थी। संजय राउत ने कंगना को मुंबई न आने की नसीहत दी थी। इस पर कंगना ने मुंबई आने का चैंलेंज दिया था। वहीं, मुंबई पुलिस को लेकर दिए बयान के बाद से कंगना को लेकर शिवसेना हमलावर हो गई। 
कंगना ने कहा था कि उन्हें मुंबई पुलिस पर भरोसा नहीं है। साथ ही उन्होंने मुंबई पुलिस की सुरक्षा लेने से इनकार किया था। इन हालात को देखते हुए कंगना के पिता ने हिमाचल प्रदेश सरकार से पुलिस सुरक्षा की मांग की थी। वहीं, अब गृह मंत्रालय की ओर से कंगना को वाई श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई है।

आइए जानते हैं, क्या होती है वाई श्रेणी सुरक्षा: 

भारत में सुरक्षा की श्रेणी खतरे के स्तर के साथ-साथ रसूख भी मानी जाती है। केंद्रीय गृह मंत्रालय, इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) की सिफारिश पर हर साल विशिष्ट लोगों की सुरक्षा की समीक्षा करता है। खतरे के स्तर को देखते हुए विशिष्ट और अति विशिष्ट लोगों को विभिन्न स्तर की सुरक्षा दी जाती है। 

देश में वीआईपी सुरक्षा को ध्यान में रखकर उन्हें अलग-अलग श्रेणी की सुरक्षा दी जाती है। सरकार के पास यह निर्णय लेने का अधिकार होता है कि वह बड़े नेताओं और अधिकारियों को किस प्रकार की सुरक्षा देगी। 

भारत में सुरक्षा व्यवस्था को अलग-अलग श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। इसमें एसपीजी सुरक्षा, जेड प्लस, जेड, वाई और एक्स श्रेणी शामिल है। खतरे के आधार वीआईपी सुरक्षा राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, सांसद, विधायक, पार्षद, नौकरशाह, पूर्व नौकरशाह, जज, पूर्व जज, बिजनेसमैन, क्रिकेटर, फिल्मी कलाकार, साधु-संत या आम नागरिकों को मुहैया कराई जाती है। 
क्या है वाई श्रेणी की सुरक्षा

यह सुरक्षा का तीसरा स्तर होता है। कम खतरे वाले लोगों को यह सुरक्षा दी जाती है। इसमें कुल 11 सुरक्षाकर्मी शामिल होते हैं। जिसमें दो पीएसओ (निजी सुरक्षागार्ड) और एक या दो कमांडो तैनात होते हैं। देश में सबसे ज्यादा लोगों को वाई श्रेणी की सुरक्षा दी गई है। 
जानें सुरक्षा की अन्य श्रेणियों के बारे में:

एसपीजी सुरक्षा

स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (एसपीजी) की सुरक्षा सिर्फ प्रधानमंत्री, पूर्व प्रधानमंत्री और उनके परिजनों को दी जाती है। लेकिन पूर्व प्रधानमंत्रियों के लिए यह सुरक्षा केवल छह महीने तक रहती है। एसपीजी में देश के सबसे जांबाज सिपाही शामिल होते हैं। एसपीजी 2 जून, 1988 में भारत की संसद के एक अधिनियम द्वारा बनाया गया था। इसमें शामिल जवानों का चयन पुलिस, पैरामिलिट्री फोर्स (बीएसएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी, सीआरपीएफ) से किया जाता है। 

जेड प्लस श्रेणी:

स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप की सुरक्षा के बाद जेड प्लस भारत की सर्वोच्च सुरक्षा श्रेणी है। इस श्रेणी में संबंधित विशिष्ट व्यक्ति की सुरक्षा में 36 जवान होते हैं। इसमें 10 से ज्यादा एनएसजी कमांडो के साथ दिल्ली पुलिस, आईटीबीपी या सीआरपीएफ के कमांडो और राज्य के पुलिसकर्मी शामिल होते हैं। हर कमांडो मार्शल आर्ट और निहत्थे युद्ध करने की कला में माहिर होता है। सुरक्षा में लगे एनएसजी कमांडो के पास एमपी 5 मशीनगन के साथ आधुनिक संचार उपकरण भी होता है। इसके अलावा इनके काफिले में एक जैमर गाड़ी भी होती है जो मोबाइल सिग्नल जाम करने का काम करती है। देश में चुनिंदा लोगों को ही जेड प्लस की सुरक्षा प्राप्त है। 

जेड श्रेणी:

जेड श्रेणी की सुरक्षा में चार से पांच एनएसजी कमांडो सहित कुल 22 सुरक्षागार्ड तैनात होते हैं। इसमें दिल्ली पुलिस, आईटीबीपी या सीआरपीएफ के कमांडो व स्थानीय पुलिसकर्मी भी शामिल होते हैं। 

एक्स श्रेणी:

इस श्रेणी में दो सुरक्षा गार्ड तैनात होते हैं। जिसमें एक पीएसओ (व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारी) होता है। देश में काफी लोगों को एक्स श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त है। इस सुरक्षा में कोई कमांडो शामिल नहीं होता।

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