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रायपुर MYNEWS36- साइक्लोजिकल फोरम छत्तीसगढ़ एवं मनोविज्ञान अध्ययन शाला के संयुक्त तत्वाधान में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वेबीनार (Webinar) एवं फोरम के वार्षिक सम्मेलन का आयोजन किया गया। फोरम की मीडिया प्रभारी डॉ. रोली तिवारी ने बताया कि इस अंतरराष्ट्रीय वेबिनार (Webinar) में कोविड-19 के दौरान मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण से संबंधित मुद्दे एवं चुनौतियां, भय, पलायन मनोवैज्ञानिकों के समक्ष उत्पन्न होने वाले मुद्दे और चुनौतियां, विद्यार्थियों के लिए चुनौतियां, एनजीओ समाजसेवियों एवं कोरोना वॉरियर्स की भूमिका, भविष्य की असुरक्षा एवं वर्तमान में किए जाने वाले परोपकारी व्यवहार जैसे कई ज्ञानवर्धक विषयों पर मनोवैज्ञानिकों द्वारा चिंतन किया गया एवं इसके लिए सुझाव दिए।

आयोजन के पहले दिन प्रमुख वक्ताओं में बस्तर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर एसके सिंह ने ऐसे आयोजनों को बढ़ावा देने और मनोवैज्ञानिकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। प्रोफेसर ओपी वर्मा, सचिव, विवेकानंद विद्यापीठ मे भारतीय संस्कृति एवं विवेकानंद जी के जीवन दर्शन को इस विषय से जोड़ने पर बल दिया। पंडित सुंदरलाल शर्मा ओपन यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर डीजी सिंह ने कहा कि निम्न वर्ग पर भी ध्यान केंद्रित करना एवं एक मनोवैज्ञानिक के रूप में अपनी सेवाएं जनसामान्य तक पहुंचाना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि मनोविज्ञान विषय में आइसोलेशन चाहे शारीरिक व मानसिक हो या सामाजिक किसी भी रूप में उचित नहीं है, क्योंकि इस विश्वव्यापी बीमारी की वजह से हमें यह व्यवहार अपनाना पड़ रहा है।ऐसे में मनोवैज्ञानिकों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है।

मुख्य वक्ता प्रोफेसर गिरीश्वर मिश्र, पूर्व कुलपति महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय वर्धा ने कहा कि भारतीय संस्कृति हमें प्रेम करना सिखाती। यदि इस पर ध्यान ना दिया जाए तो प्रकृति का यह विकराल रूप भी हमें देखना पड़ता है ।उन्होंने भारतीय संस्कृति का पालन करने आध्यात्मिक ज्ञान एवं आत्मबल पर जोर देकर इस बीमारी से लड़ने का सुझाव दिया। डॉक्टर रेणुका देवी चेन्नई ने विद्यार्थियों से संबंधित समस्याओं को सुलझाने के कुछ सुझाव दिए।यूनिवर्सिटी ऑफ अलास्का यूएसए प्रोफेसर डीएनए एंड सेल्फ ट्रेनिंग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एक विश्वव्यापी मुद्दा है और ऐसे में मनोवैज्ञानिक परामर्शदाताओं की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है। युनिवर्सिटी ऑफ अलास्का यूएस से प्रो बीएल दुबे ने स्किल जेवलपमेंट एंड सेल्फ ट्रेनिंग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह एक विश्वव्यपी मुद्दा है और एसे में मनोवैज्ञानिक, परामर्शदाताओं की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है।

इसी तरह अन्य जगहों से आए विशेषज्ञों ने अपने वक्तव्य दिए। सभी वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक को शिक्षकों एवं परामर्शदाताओं ने साइक्लोजिकल फोरम छत्तीसगढ़ की इस पहल पर उन्हें बधाई दी कि “मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण” से संबंधित महत्वपूर्ण विषय को इस संस्था ने चुना और तकनीक के माध्यम से सैकड़ों लोगों को जोड़कर उनमें जागरूकता फैलाने का सफल प्रयास किया। कार्यक्रम का संचालन साइक्लोजिकल फोरम छत्तीसगढ़ के सचिव डॉ. जय सिंह ने किया। अध्यक्षीय उद्बोधन संस्था के अध्यक्ष डॉ. बसंत सोनबेर ने दिया।

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