water pollutants

फरसगांव- एक तरफ जिला प्रशासन वर्षा ऋतु में मौसमी बीमारियों से बचाव तथा स्वच्छ पेयजल के लिए जन साधारण जागरूक करने का भरसक प्रयास कर रहा है वहीं नगर पंचायत फरसगांव के नगरवासियों को दूषित पानी सप्लाई कर जिला प्रशासन की कोशिशों को ठेंगा दिखाने का काम कर रहा है।

शिकायत मिलने के बावजूद भी कोई कार्रवाई नहीं

फरसगांव नगर पंचायत में आए दिन नलों से दूषित पानी आने की शिकायतें मिलती हैं।नगर में लगातार दूषित पेयजल के उपयोग से कई तरह बीमारियों के संक्रमण की आशंका है।नगर पंचायत के अफसरों को पेयजल स्रोतों के जांच की जिम्मेदारी तय होने के वावजूद हैरानी इस बात की है कि पानी की गुणवत्ता की जांच कराना तो दूर,जिम्मेदारों को यह जानकारी भी नहीं है।

बरसों पुरानी टंकी से हो रही है पानी की सप्लाई

नगर पंचायत के बरसों पुरानी टंकी जो भारतीय स्टेट बैंक के समीप है और दूसरी टंकी रावण भाटा में है पानी सप्लाई के लिए बने गेट वाॅल्व के चेंबर और बोर के समीप गंदगी जमा है जिस स्थान पर वाल्व एवं चेंबर है उक्त स्थानों पर गंदगी पसरी हुई है। वाल्वों में से पानी लीकेज होने के कारण चेंबर में पानी भर जाता है और ऊपर से बारिश का दूषित काई युक्त पानी चेंबर के वाल्व के जरिए पाईप लाइन में चला जाता है और वही दूषित पानी नगर वासियों के घर तक पहुंच रहा है।

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शुद्ध पेयजल व्यवस्था के लिए जिला कलक्टर द्वारा सभी विभागों की बैठक के दौरान निर्देश देने के बावजूद नगर पंचायत के अधिकारी कर्मचारी इस और कोई ध्यान नहीं दे रहे और अनवरत नगरवासियों को दूषित पानी पिला रहे है। पूर्व में नगरीय क्षेत्र के अधिकारी कर्मचारियों की गलतियों पर कोई कार्यवाही नही हो रही है जो कि आमजनों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ। ऊंची पहुच होने के चलते जिम्मेदारों पर कोई कार्यवाही नही हो रही है। अगर यही आलम रहा तो फरसगांव नगर वासियों को दूषित पानी से होने वाली बीमारियों जैसे उल्टी दस्त, मलेरिया, डेंगू सहित अन्य मौसमी बीमारियों से दो चार होना पड़ सकता है।

जिम्मेदार झाड़ रहे पल्ला

इस संदर्भ में नगर पंचायत के सीएमओ श्रीमती शांति वाजपेई से पूछने पर उन्होंने जानकारी होने से इंकार किया और गंदे काई व कीटाणु युक्त,पानी भरे गेट वाल्वों के चेंबर की फोटो दिखाने पर कहा कि हम इसे जल्द साफ करवा देंगे परंतु इस समस्या के स्थायी सुधार के बारे में कुछ नहीं कहा,नगर पंचायत का कोई भी जवाबदार प्रतिनिधि कुछ कहने को तैयार नहीं है।

बीएमओ का कहना है कि-

बारिश के मौसम में जल जनित संक्रमण रोगों की आशंका बढ़ जाती है।दूषित जल से परहेज करना ही समझदारी है।ऐसे में उदर व संक्रामक रोगों की आशंका बलवती रहती है।पानी को उबाल कर इस्तेमाल करना ही हितकर है।

MyNews36 संवाददाता हेमराज की रिपोर्ट

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