नक्सलियों को सहयोग के मामले में फंसे हैं लैंडमार्क रायल इंजीनियर के मालिक

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राजनांदगांव MyNews36 प्रतिनिधि- छत्तीसगढ़ के बस्तर में नक्सलियों को उनके तमाम दैनिक उपयोग की सामग्रियां सहयोग करने के मामले में अब लैंडमार्क रायल इंजीनियर राजनांदगांव के मालिक वरूण जैन की मुश्किलें काफी बढ़ गई है।उनके सभी प्रमुख ठिकानों में सन्नाटा पसरते जा रहा है।वरूण जैन फिलहाल कांकेर पुलिस की गिरफ्तारी की डर से फरार है।इधर पुलिस को वरूण जैन के तार खैरागढ़ (khairagarh) के ठेकेदार ‘विकास आर्या’ से भी जुड़े होने अंदेशा है। बताया जाता है कि कांकेर एसआईटी की टीम के अधिकारी डीएसपी आकाश मरकाम के नेतृत्व में आई पुलिस ने गुरूवार 28 मई को खैरागढ़ (khairagarh) के विकास आर्या के घर में दबिश दी थी।

खबर है कि एसआईटी की टीम को यह सूचना मिली थी कि वरूण जैन का ठेकेदार विकास आर्या से काफी मेलजोल है और वह वहीं रूका हुआ है? किन्तु वरूण वहां नहीं मिला। इधर एसआईटी की टीम को विकास आर्या की ओर से यह स्पष्ट कर दिया गया है कि वरूण जैन से उनके व्यापारिक संबंध है।हाल ही में उनका कवर्धा हाईटेक बस स्टेंड में पेटी के काम का लेनदेन है।इस सिलसिले में वरूण जैन की पत्नी से उनकी कई बार बातचीत हुई है।

गुरूवार को विकास आर्या के दो मोबाईल को एसआईटी की टीम ने जब्त भी किया था।शनिवार को कांकेर में विकास आर्या को जवाब तलब के बाद मोबाईल को वापस भी कर दिया गया है।इस आधार पर अनुमान है कि विकास के काल डिटेल के आधार पर एसआईटी किसी ठोस नतीजे पर पहुंच सकती है? विकास आर्या से उनका पक्ष जानने जब मोबाईल पर बातचीत की गई तो उन्होने कहा कि पुलिस ने उन्हे कांकेर बुलाया था। वरूण से उनकी जान पहचान के साथ-साथ व्यापारिक है बाकि मामलों से उनका कोई लेना देना नहीं है।
उल्लेखनीय है कि बस्तर-कांकेर जिले के सिकसोड थाने में 24 मार्च 2020 को दर्ज नक्सल सहयोग के मामले की जांच, पतासाजी और संलिप्त आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कांकेर एएसपी कीर्तन राठौर के नेतृत्व में छह सदस्यीय टीम की गठन किया गया है। टीम को लगातार मामले में सफलता मिलते जा रही है।

अब तक 12 आरोपियों की गिरफ्तारी

एसआईटी (विशेष जांच दल) टीम के द्वारा मेसर्स लैंडमार्क रायल इंजीनियरिंग (इंडिया) प्रा.लि. बिलासपुर के मालिक निशांत जैन पिता सुरेश जैन 41 वर्ष निवासी शांति नगर बिलासपुर सहित कुल 12 आरोपियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। नक्सलियों को सहयोग के मामले में लैंडमार्क रायल इंजीनियर राजनांदगांव के मालिक वरूण जैन का भी नाम सामने आया है।

ज्ञात हो कि राजनांदगांव सहित बस्तर में उक्त सड़क निर्माण कंपनी द्वारा काफी लंबे समय से सघन नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सड़क निर्माण के काम को अंजाम दिया जा रहा है। कांकेर पुलिस ने यह पाया है कि दोनों सगे निशांत जैन और वरूण जैन तथा उनकी सड़क निर्माण कंपनी और उससेे जुडे पेटी ठेकेदार के आदमी नक्सलियों को उनकी आवश्यकता की सामग्री पहुंचाते थे। फिलहाल कंपनी से जुड़े छत्तीसगढ़, उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश के करीब 12 आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस वरूण जैन की तलाश कर रही है। वरूण जैन का राजनांदगांव में स्थायी आवास भी होने की खबर है। फिलहाल वह अपने आवास से गायब है।

अधिकांश काम एबोब में, इसलिए हिस्सेदारी!

विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार निशांत जैन और वरूण जैन की सड़क निर्माण कंपनी पीएमजीएसवाई, पीडब्ल्यूडी में तीस से चालीस प्रतिशत एबोब में काम लेते थे। ऐसा तभी संभव होता है जब विभाग के राजधानी में बैठे सीई लेबल के अधिकारी मामले में हस्तक्षेप करे। सूत्रों का दावा है कि यदि पिछले दस सालों में मिले उक्त दोनों भाईयों के सड़क निर्माण कंपनी के कामों की जांच किया जाए तो अरबों रूपए का घोटला सामने आ सकता है?

सूत्र भी बताते हैं कि उक्त ठेकेदार सघन नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बिंदास काम करते थे जिसे विभाग के अधिकारी भी झांककर नहीं देखते थे और पूरा भुगतान हो जाता था। राजनांदगांव जिले के मोहला, मानपुर, चौकी में उक्त कंपनी करीब दस साल से काम कर रही है। कई बार उनकी कंपनी के वाहनों को नक्सलियों द्वारा जलाया जा चुका है। माना जा रहा है कि एबोब में ही काम करने के कारण उक्त कंपनी द्वारा पुलिस विभाग के अधिकारियों के अलावा विभागीय अधिकारियों और नक्सलियों को बड़े पैमाने पर सहयोग किया जाता रहा है?

✍🏻 MyNews36 संवाददाता पूरन साहू की रिपोर्ट

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