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संयुक्त राष्ट्र महासभा ने परमाणु निरस्त्रीकरण पर भारत के दो प्रस्तावों को अपनाया

संयुक्त राष्ट्र महासभा की प्रथम समिति ने परमाणु निरस्त्रीकरण पर भारत द्वारा प्रस्‍तुत दो प्रस्तावों को स्‍वीकार कर लि‍या है। इनका उद्देश्य परमाणु दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करना और परमाणु हथियारों के उपयोग पर रोक लगाना है। यह समिति निरस्त्रीकरण के मुद्दे से निपटती है और संयुक्त राष्ट्र निरस्त्रीकरण आयोग और जिनेवा स्थित निरस्‍त्रीकरण सम्‍मेलन नामक संस्‍था के साथ काम करती है।

समिति द्वारा स्‍वीकार किये गये प्रस्‍तावों में परमाणु हथियार क्लस्टर के तहत परमाणु हथियारों के उपयोग पर प्रतिबंध और परमाणु खतरे को कम करना शामिल है। इन प्रस्‍तावों को स्‍वीकार किया जाना परमाणु निरस्त्रीकरण के लक्ष्य के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

परमाणु हथियारों के उपयोग के निषेध संबंधी प्रस्‍ताव का संयुक्त राष्ट्र सदस्‍यों के बहुमत द्वारा समर्थित था। इसमें निरस्त्रीकरण पर सम्मेलन की बात कही गई है ताकि किसी भी परिस्थिति में परमाणु हथियार के प्रयोग पर रोक लगाई जा सके।

पूर्व में भी परमाणु हथियारों पर प्रतिबंध लगाने के लिए परमाणु हथियार सम्‍मेलन जैसे समझौतों का प्रयास किया गया, लेकिन निरस्‍त्रीकरण सम्‍मेलन में इनपर बात आगे नहीं बढ़ पायी।

परमाणु खतरे को कम करने संबंधित प्रस्‍ताव 1998 में प्रस्‍तुत किया गया था। यह प्रस्‍ताव, जो परमाणु हथियारों के अनजाने या दुर्घटनावश के बारे में आवश्‍यक सावधानी बरतने और परमाणु सिद्धांतों की समीक्षा की आवश्यकता को रेखांकित करता है। प्रस्‍ताव ऐसे जोखिमों को कम करने के लिए ठोस कदमों की मांग करता है, जिनमें परमाणु हथियारों को डी-अलर्ट और डी-टारगेट करना शामिल है।

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