Unique hospital

जयपुर में एक ऐसा अनोखा अस्पताल है,जहां इलाज के लिए जाने पर सबसे पहले मरीज की कुंडली की जांच की जाती है।ज्योतिष के आधार पर रोग का पता लगाने के बाद आधुनिक चिकित्सा पद्धति से इलाज करने पर मरीजों को मानसिक संतोष मिलता है।क्या आप किसी ऐसे हॉस्पिटल में इलाज करवाना चाहेंगे,जहां पहले आपकी कुंडली देखी जाए और फिर इलाज किया जाए? कुछ लोगों को ये तरीका अच्छा भी लग सकता है और कुछ लोगों को अतार्किक भी।मगर आपको जानकर हैरानी होगी कि-राजस्थान के जयपुर में एक ऐसा अस्पताल मौजूद है।जी हां,आमतौर पर पढ़े-लिखे लोगों को ज्योतिष की बातें गल्प लगती हैं और वो विज्ञान से इसका कोई संबंध नहीं जोड़ पाते हैं।मगर जयपुर स्थित ‘यूनिक संगीता मैमोरियल हॉस्पिटल’ में मरीज की बीमारी का पता लगाने के लिए ज्योतिष का सहारा लिया जाता है।

कुंडली देखकर बताएंगे रोग का इलाज

इस अस्पताल को शुरू करने वाले पं.अखिलेश शर्मा हैं।अस्पताल में इलाज के लिए मरीज को सबसे पहले रजिस्ट्रेशन के दौरान ही अपनी कुंडली लेकर जाना पड़ता है।अगर किसी व्यक्ति के पास उसकी कुंडली मौजूद नहीं है,तो कुछ जरूरी जानकारियां जैसे-मरीज की जन्म तिथि, जन्म स्थान,जन्म का समय आदि पूछकर अस्पताल में ही तुरंत उसकी कुंडली बना दी जाती है।मरीज का नंबर आने पर डॉक्टर के सामने उसकी कुंडली पेश की जाती है,जिसके आधार पर डॉक्टर मरीज को उसके रोग,खतरे और इलाज के बारे में बताते हैं।

वेद मंत्रों और वनस्पति से इलाज

अस्पताल में सामान्य इलाज के साथ-साथ वैदिक रीति से इलाज की भी सुविधा है।यानी अगर मरीज या उसके परिजन चाहें तो वेदों में बताए गए मंत्रों और वनस्पतियों के द्वारा भी मरीज का इलाज करवाया जा सकता है।अस्पताल में एलोपैथी, यूनानी और आयुर्वेदिक तरीकों से इलाज की सुविधाएं उपलब्ध हैं।

मरीजों को मिलता है संतोष

अस्पताल के चिकित्सक बताते हैं कि-इस अनोखे अस्पताल में आने वाले मरीजों से उन्हें बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिला है।दरअसल आधुनिक सुविधाओं से लैस इस अस्पताल में मरीज का सामान्य इलाज तो होता ही है।इसके साथ ही ज्योतिष शास्त्र के द्वारा जब मरीज की कुंडली देखकर बीमारी और के बारे में जरूरी जानकारियां बताई जाती हैं,तो उन्हें संतोष मिलता है।पं. अखिलेश शर्मा बताते हैं कि,-“मैं रोजाना 20-25 मरीजों की कुंडली देखता हूं।खास बात ये है कि-हम बीमारी का पता लगाने के लिए ही ज्योतिष का सहारा लेते हैं।एक बार बीमारी पकड़ में आ जाए,तो उसका इलाज आधुनिक चिकित्सा पद्धति द्वारा ही किया जाता है।इससे जांच पुख्ता हो जाती है और मरीज का समय भी नहीं खराब होता है।”

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