अगहन मास का पहला गुरुवार आज,घर-घर होगी मां महालक्ष्मी की पूजा……

रायपुर MyNews36 – सनातन धर्म में 12 महीनों का अपना अलग-अलग महत्व है। इसमें अगहन मास, जिसे मार्गशीर्ष भी कहा जाता है, का बड़ा महत्व है। जैसे सावन का महीना भोलेनाथ को समर्पित है, ठीक उसी तरह अगहन मास में मां महालक्ष्मी के पूजन का विशेष विधान है। मां महालक्ष्मी के लिए इस महीने के हर गुरुवार को व्रत रखा जाता है, विशेष पूजा भी की जाती है।

महामाया मंदिर पं. मनोज शुक्ला ने बताया कि अगहन मास का पहला गुरुवार 25 नवंबर को है। यहां कई घरों में सुबह से ही ब्रह्ममुहूर्त में महालक्ष्मी की पूजा शुरू हो जाएगी। दूसरी ओर बुधवार को लोगों ने पूजा सामग्री की जमकर खरीदारी की। वहीं बुधवार को शाम होते ही माता लक्ष्मी के लिए सिंहासन बनाकर उसे आम पत्ता, केला पत्ता, आंवला पत्ता, धान की बालियों और कुम्हड़ा, रखिया, जिमिकांदा से सजाया गया। वहीं प्रत्येक गुरुवार को अलग-अलग पकवानों का भोग लगाने की प्रथा है।

इस साल चार गुरुवार

इस वर्ष अगहन में चार गुरुवारी पूजा पड़ रही है, जो क्रमश: 25 नवंबर और 2, 9, 16 दिसंबर को है।

महालक्ष्मी देवी की स्थापना और पूजा विधि

पंडितों के अनुसार इस पूजा को करने के लिए किसी ब्राह्मण, पुरोहित की आवश्यकता नहीं है। हर कोई अपनी भक्ति से पूजा कर सकते हैं। गुरुवार को त्रिकाल (सुबह, दोपहर और शाम) को पूजन करें। दूसरे दिन शुक्रवार को सुबह स्नान कर के गोमाता की पूजन कर गो ग्रास खिलाएं।

फिर जिस जगह पूजा की हो और जहां-जहां लक्ष्मी जी के चरण चिह्न बनाए गए थे, वहां-वहां हल्दी-कुमकुम छिड़ककर तीन बार प्रणाम कर लें। पद्मपुराण में कहा गया है कि जो कोई भक्त हर वर्ष श्री महालक्ष्मी जी का यह व्रत करेगा, उसे सुख-संपदा और धन लाभ होगा। वहीं यह व्रत गृहस्थजनों के लिए बताया गया है। पति-पत्नी को साथ बैठकर पूजन करना चाहिए।

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