एक डोज़ में पूरी सुरक्षा देगी यह कोविड वैक्सीन,जानिए इस वैक्सीन के बारे में सब कुछ……..

दुनिया में कोरोना वायरस (COVID-19) के खिलाफ टीकाकरण अभियान लगातार जारी है और इन सबके बीच अमेरिकी दवा निर्माता कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन (Johnson & Johnson) ने अपनी बनाई हुई वैक्सीन के इमरजेंसी उपयोग के लिए FDA को आवेदन भेजा है। 4 फरवरी को दवा निर्माता कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन ने FDA को अपनी सिंगल डोज कोरोना वैक्सीन के उपयोग की अनुमति के लिए आवेदन किया है।गौरतलब हो कि अमेरिका में पहले से ही कोरोना वायरस की दो वैक्सीन फाइजर बायोएनटेक और मॉडर्ना के इमरजेंसी उपयोग की अनुमति है। अमेरिका के सेंटर फॉर इंफेक्शियस डिजीज रिसर्च एंड पॉलिसी (CIDRAP) के मुताबिक अगर इस वैक्सीन को लगाने की अनुमति दवा नियामक फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) से मिलती है तो यह मार्च के अंत तक उपलब्ध हो जाएगी। जानकारी के मुताबिक जॉनसन एंड जॉनसन आने वाले दिनों में स्वनिर्मित कोरोना के सिंगल डोज वैक्सीन के इस्तेमाल की अनुमति यूरोपीय अधिकारियों से भी मांगेगी।

कैसे काम करती है जॉनसन एंड जॉनसन की COVID-19 वैक्सीन

Pfizer और Moderna द्वारा विकसित COVID-19 के टीके mRNA आधारित टीके हैं। ये टीके SARS-CoV-2 वायरस के स्पाइक प्रोटीन के एक हिस्से को एनकोडिंग करके प्रभाव पहुंचाते हैं, ये टीके शरीर में प्रतिरक्षा की प्रतिक्रिया को ट्रिगर करने के लिए एनकोडेड टुकड़ों का इस्तेमाल करते हैं जिनकी वजह से शरीर में वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी का निर्माण होता है। जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन थोड़ा अलग तरीके से काम करती है। एक प्रकार से देखा जाए तो यह एक mRNA टीका नहीं है। यह एक एडेनोवेक्टर वैक्सीन (adenovector vaccine) है, जिसका अर्थ है कि यह एक निष्क्रिय वायरस का उपयोग प्रोटीन देने के लिए एक वेक्टर के रूप में करता है।

लेकिन इसके बाद यह सवाल उठता है कि शरीर में “निष्क्रिय वायरस” देने से अनजाने में बीमार होने का ख़तरा उत्पन्न होता है, लेकिन इसमें ऐसा नहीं है। इस वैक्सीन को लेकर जारी रिपोर्ट के मुताबिक, “निष्क्रिय वायरस आपको बीमार होने का कारण नहीं बना सकता है या बीमार नहीं कर सकता है।“ बल्कि, जॉनसन एंड जॉनसन के COVID-19 वैक्सीन में एडेनोवायरस SARS-CoV-2 के स्पाइक प्रोटीन जीन के “वेक्टर” के रूप में आपकी कोशिकाओं में कार्य करते है, जिससे कोशिकाएं उस जीन की कॉपी बनाती हैं। ये स्पाइक प्रोटीन आपके प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा पहचाने जा सकते हैं और शरीर में एंटीबॉडी बनाने के लिए काम करते हैं और यही शरीर को COVID-19 से बचाने में मददगार होते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक ऑक्सफोर्ड और एस्ट्राजेनेका की COVID वैक्सीन इसी तरह के एडेनोवायरस तकनीक का उपयोग करता है। जॉनसन एंड जॉनसन ने अपनी इबोला वैक्सीन बनाने के लिए भी इसी तकनीक का भी इस्तेमाल किया है, जिसे शरीर में प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया पैदा करने में सुरक्षित और प्रभावी दोनों बताया जा रहा है। वहीं आपको बता दें कि Pfizer और Moderna द्वारा विकसित COVID-19 की दो डोज लोगों को लगाई जा रही है लेकिन जॉनसन एंड जॉनसन द्वारा निर्मित यह वैक्सीन सिंगल शॉट वैक्सीन है।

कितनी प्रभावी है जॉनसन एंड जॉनसन की COVID-19 वैक्सीन

टीकाकरण के 28 दिन बाद, कंपनी द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, जॉनसन एंड जॉनसन द्वारा निर्मित COVID-19 की इस वैक्सीन का लगभग 44,000 लोगों पर बड़े पैमाने में परीक्षण किया गया जिसके बाद इस वैक्सीन को कुल मिलाकर 66 प्रतिशत प्रभावी बताया गया था। जॉनसन एंड जॉनसन ने यह भी कहा कि अगर वैक्सीन के प्रभाव का तुलनात्मक रूप से अध्ययन करें तो शरीर को इन्फ्लूएंजा से बचाने में फ्लू शॉट केवल 40 से 60 प्रतिशत प्रभावी है, फिर भी यह फ्लू से संबंधित मौतों को कम करने में एक प्रमुख भूमिका निभाता है ऐसे इस वैक्सीन के प्रभाव को कम नहीं आंका जा सकता।

Pfizer और Moderna की तुलना में इस वैक्सीन का प्रभाव

जॉनसन एंड जॉनसन की 66 प्रतिशत प्रभावी वैक्सीन की तुलना अगर हम दूसरी वैक्सीन से करते हैं तो हमें पता चलेगा की इसकी प्रभावकारिता कुछ कम है, खासकर जब आप इसकी तुलना Moderna (94.5 प्रतिशत प्रभावी) और Pfizer (90 प्रतिशत से अधिक प्रभावी) से करते हैं। वहीं इस कंपनी द्वारा जारी विज्ञप्ति में यह भी कहा गया है कि इस वैक्सीन का शॉट लेने पर किसी भी प्रकार की जटिलता नहीं होती है, हालांकि वैक्सीन का डोज लेने के बाद हल्का फुल्का असर जरुर देखने को मिलेगा।

फाइजर और मॉडर्ना के विपरीत, जॉनसन एंड जॉनसन के वैक्सीन परीक्षण में कई नए परिणाम भी शामिल किये गए हैं – जिनमें हाल ही में वायरस के उभरते हुए नए वेरिएंट को भी ध्यान में रखा गया है। बेशक दुनियाभर के शोधकर्ता यह देख रहे हैं कि सभी COVID-19 टीके शरीर को विभिन्न COVID-19 वेरिएंट से बचाने में कितने प्रभावी हो सकते हैं, वहीं कंपनी ने कहा है कि यह वैक्सीन पूरी तरह से कोरोना के नए वेरिएंट पर ही प्रभावकारी है।

जॉनसन एंड जॉनसन की COVID-19 वैक्सीन की डोज

यह वैक्सीन सिंगल शॉट वैक्सीन है, जिसका मतलब इसकी सिर्फ एक ही डोज मरीजों को दी जाएगी। वहीं अगर हम दूसरी COVID-19 वैक्सीन की बात करें तो उनके टीकों की दो डोज कुछ दिनों के भीतर लगवानी पड़ती है। और इस वैक्सीन के भंडारण के लिए Pfizer और Moderna के टीकों की तुलना में तापमान को नियंत्रित करने की जरुरत कम पड़ती है। अगर कमर्शियल इस्तेमाल के लिए इस वैक्सीन को मंजूरी मिलती है तो यह दुनिया की सबसे पहली सिंगल डोज वैक्सीन होगी।

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