एक अजनबी सी लड़की है , एक अजनबी सी लड़की है जो छोटे से कमरे मे कैद है। जहाँ वो और उसकी बाते है,
जहाँ वो अकेली है पर कमजो़र नही ,
जहाँ वो रोती है पर टूटती नही,
जहाँ वो बोलती है पर सुनती नही । एक अजनबी सी लड़की है,
एक अजनबी सी लड़की है जो छोटे से कमरे मे कैद है। जहाँ ख़्यालातो की ज़ुबान है , जहाँ सवालो की पहचान है ,
जहाँ ना मुमकिन सपनो का अंजाम है। एक अजनबी सी लड़की है,
एक अजनबी सी लड़की है जो छोटे से कमरे मे कैद है। जहाँ हर्ष ही उसका जि़न्दाम है ,
जहाँ मह्ताब ही उसका पासबान है ,
जहाँ अर्श ही उसका अफसाना है,एक अजनबी सी लड़की है ,
एक अजनबी सी लड़की है जो छोटे से कमरे मे कैद है।

लेख- तारिका बेदी

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