जशपुर- आधुनिक विज्ञान में भी वर्षों से विष: विषस्य औषधम´ का सिद्धांत स्थापित है। सर्पदंश के इलाज में बड़े स्तर पर इसी सिद्धांत पर आधारित दवा का प्रयोग होता है परंतु इलाज में उपयोग आने वाली दवा, एंटी स्नेक वेनम की हर स्तर पर भारी कमी बनी हुई है। देश में हर वर्ष 50 हजार से अधिक लोगों की सर्पदंश से मौत हो जाती है। इस चुनौती ने उबरने के लिए छत्तीसगढ़ के वन विभाग ने सेंट्रल जू अथॉरिटी ऑफ इंडिया को देश का दूसरा सर्प विष संग्रहण केंद्र शुरू करने का प्रस्ताव भेजा है।

दो रेंजरों केंद्र संचालन के लिए चेन्नई से आवश्यक प्रशिक्षण भी ले चुके हैं। उम्मीद है कि अगस्त माह के अंत तक स्वीकृति मिल जाएगी। तमिलनाडु के चेन्नई स्थित द मद्रास क्रोकोडाइल बैंक ट्रस्ट (एमसीबीटी) के बाद यह देश का सर्प विष संग्रहण केंद्र होगा।

जशपुर के तपकरा स्थित सर्पज्ञान केंद्र में ही विष संग्रहण केंद्र स्थापित करने की योजना है। यहीं आबादी वाले इलाकों से पकड़े गए सांपों को सुरक्षित रखा जाएगा। उन्हीं सांपों के जहर को सरकार द्वारा निर्धारित मापदंड के मुताबिक संग्रहित किया जाएगा।

प्रशिक्षित स्व-सहायता समूह संग्रहित विष को सरकार को बेचेगा। 40 से 50 लोगों को सांप पकड़ने का प्रशिक्षण और उपकरण देकर स्नेक रेस्क्यू टीम तैयार होगी। हेल्प नम्बर पर सूचना मिलते ही टीम घरों से सांप को सुरक्षित पकड़ेगी और विष संग्रहण केंद्र में संरक्षित करेगी।

एंटी वेनम के लिए इन सांपों की जरूरत

एंटी स्नेक वेनम के लिए बिग फोर प्रजाति की चार प्रजातियों के सांपों के जहर की आवश्यकता होती है। इनमें किंग कोबरा, रसल वाइपर, कॉमन करैत और बेन्डैड करैत शामिल है। जशपुर में इन चारों प्रजाति के सांप मौजूद होने की वजह से संग्रहण केंद्र स्थापित करने के लिए आदर्श परिस्थितियां मौजूद है।

स्वीकृति मिलते ही काम शुरू

तपकरा में सर्प विष संग्रहण केंद्र का प्रस्ताव तैयार कर स्वीकृति के लिए सेंट्रल जू अथॉरिटी ऑफ इंडिया को भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही इस पर काम शुरू कर दिया जाएगा। – -एसके जाधव, डीएफओ जशपुरनगर

सर्पदंश से मौतें

भारत में 50 हजार लोगों की जीवनलीला हर साल सर्पदंश से समाप्त हो जाती है। दुनिया में हर साल एक लाख लोग इससे मारे जाते हैं। भारत में सर्पदंश से होने वाली मौतों के पीछे एंटीवेनम की कमी होना है। वर्तमान में चेन्नई की सिर्फ एक संस्था इरुला स्नेक कैचर्स इंडस्ट्रीज कोआपरेटिव सोसायटी चार बड़े जहरीले सांपों का जहर निकालती है।

यही चार प्रजातियां भारत में सर्पदंश से होने वाली 98 फीसद मौतों के लिए उत्तरदायी हैं। ये कंपनी उसे देश भर में एंटी वेनम बनाने वाली बॉयोटेक कंपनियों को बेच देती हैं। ज्यादा पैसा बनाने के लिए ये कंपनियां एंटी वेनम को तनु (पतला) कर देती है। इसीलिए संर्पदंश के पीड़ित को तय मात्रा से ज्यादा एंटी वेनम लेना पड़ता है। एंटी वेनम चार प्रकार के होते हैं।

न्यूरोटॉक्सिक (तंत्रिका तंत्र के लिए घातक), हीमोटॉक्सिक (लाल रक्त कणिकाओं के लिए घातक), साइटोटॉक्सिक (कोशिकाओं के लिए घातक) और मायोटॉक्सिक यानी मांस-पेशियों के लिए घातक। भारत में 216 सर्प प्रजातियां हैं। इनमें से 60 ही जहरीली हैं। ऐसे में क्षेत्रवार सर्प प्रजातियों का अध्ययन करके राज्य सरकारों को जहर निकालने वाले केंद्रों की स्थापना करनी चाहिए। ग्रामीण इलाकों के स्वास्थ्य केंद्रों पर कोल्ड स्टोरेज सुविधा न होने के चलते एंटी वेनम नहीं रहता है। लिहाजा गरीब मरीजों को बड़े अस्पताल पहुंचने में काफी समय बीत जाता है। तब तक बहुत देर हो जाती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

स्वामित्व अधिकारी एवं संचालक-मनीष कुमार साहू,मोबाइल नंबर- 9111780001 चीफ एडिटर- परमजीत सिंह नेताम ,मोबाइल नंबर- 7415873787 पता- चोपड़ा कॉलोनी-रायपुर (छत्तीसगढ़) 492001 ईमेल -wmynews36@gmail.com