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शिक्षाकर्मी के पुराने संगठन कर रहे है फेडरेशन को तोड़ने की कोशिश,पुराने संगठन के झांसे में नही आने वाले

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बिलासपुर-जितनी पुरानी शिक्षाकर्मियो की नौकरी है उतनी ही पुरानी इनकी संगठन पूर्व में अविभाजित मध्यप्रदेश के समय इस प्रदेश में मात्र एक संगठन हुआ करता था जिसके बैनर तले ये सरकार के समक्ष अपनी समस्या निराकरण के लिए सँघर्ष किया करते थे ये अलग बात है कि उस समय के शिक्षाकर्मी नेता आम साथियो को कुछ खास फायदा नही दिला पाए कहने को तो एक-एक माह का जंगी आंदोलन होता था वह भी स्कुलो में ताला बन्दी करके पर जब जब आंदोलन निर्णायक मोड़ पर रहता नेता जी 10% 15% का आर्थिक लाभ लेकर आंदोलन खत्म करते ऐसे में लोगों के आक्रोश ने एक-एक कर नए सँगठन को जन्म दिया जिनके भीड़ और चंदे का आधार था शिक्षाकर्मी वर्ग-3जो बड़ी ही उम्मीद और भविष्य की आशाओं को लेकर अविभाजित मध्यप्रदेश से लेकर विभाजित छग के शिक्षाकर्मी आंदोलन का वह जाबाज सिपाही होता था जो चन्दा भी देता और महीनों घर द्वार छोड़कर आंदोलन स्थल को गर्माते और महकते रहते परन्तु जैसे ही माँग पूरा होने की बारी आई सबसे ज्यादा अहित इसी वर्ग का हुआ फिर चाहे वह 2013 की वेतन विसंगति,हो क्रमोन्नति हो या पदोन्नति सबसे ज्यादा पेट मारा गया तो इसी बहुसंख्यक वर्ग-3 का फिर वह दिन भी आया जब राज्य के तत्कालिक मुखिया डॉ रमन सिंह ने इन्हें शिक्षा विभाग में संविलियन किया और 7 वे वेतनमान दिया जिसके आर्थिक अव्यवस्था ने इनके जख्म में पेट्रोल डालने का काम किया ऐसे में आक्रोश का एक ज्वार इन दोनों ओर से शोषण के शिकार ( सरकार और शिक्षाकर्मी नेता ) वर्ग के लोगों में आया और इस वर्ग को उच्च पदस्थ नेताओ के चंगुल से छुड़ाने के बीड़ा उठाया इनके ही बीच के वर्ग 3 के ब्लाक और जिला स्तरीय नेताओ ने जिनमें शिव सारथी, सुखनान्दन यादव,मनीष मिश्रा,जाकेश साहू,इदरीश खान ,अजय गुप्ता,सीडी भट्ट,रंजीत बनर्जी,छोटेलाल साहू बसन्त कौशिक तथा विभिन्न ब्लाक और जिला से भी आगे आये जिनमें प्रमुख नाम शंकर साहू,रोशन साहू,विश्वास भगत,टिकेश भोई,कृष्णा वर्मा औऱ भी नाम है जिन्हें मैं लिख नही रह हूँ पर साथ सभी का था जो नामित है और जो नही।

इन सभी की अगुवाई में फिर एक बार सँघर्ष का करवा चला और देखते ही देखते अविश्वसनीय स लगने वाला कांग्रेस की सरकार प्रचंड बहुमत से राज्य में बैठा जिनका श्रेय आज तक के इतिहास में सिर्फ ढिंढोरा पीटने वाले नही बल्कि तलखियत दिखाने वाले वर्ग3 को जाता है अब जबकि वर्षो से इस वर्ग की चन्दा मलाई खाने वाले और भीड़ का स्वाद चखने वाले उच्च पद वाले नेताओ को खलने लगा तो छग सहायक शिक्षक फेडरेशन के नाम से आस्तित्व में आये ये सर्वहारा वर्ग का संगठन इनके आँखों में खटकने लगा औऱ ये नित नए उपाय लगाकर इनके बीच तोड़फोड़ का काम करने लगे और इस काम को बखूबी अंजाम दे रहे है इनके पिछलग्गू पदाधिकारीगण जो जमीनी स्तर से लेकर सोशल मीडिया तक सक्रिय है जिनका आज एकमात्र काम फेडरेशन को छिन्न-भिन्न कर फिर से अपने भीड़ और चन्दा का इंतजाम करना है और फिर से इस वर्ग-3 के भीड़ का उपयोग करना मात्र है पर इनकी ये मंशा शायद ही पूरी हो क्योकि जिस प्रकार से सोशल मीडिया से मैसेज आ रहा है वह तो यही बया करता है कि अब सहायक शिक्षक इन पुराने संगठन के झांसे में नही आने वाले।

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