उत्तर प्रदेश के कन्नौज में लॉकडाउन के दौरान तमिलनाडु से लौटे प्रवासी परिवार को गांव में न मुफ्त राशन मिला और न ही मनरेगा में काम दिया गया। बच्चों की भूख मिटाने के लिए मां ने आधे दाम में तोड़िया बाजार में बेच दीं। कन्नौज के फत्तेहपुर जसोदा निवासी श्रीराम अपनी शादी के कुछ समय बाद पत्नी गुड्डी देवी को लेकर तमिलनाडु के किड्डलोर चला गया था।

वहां वह करीब 30 साल से कुल्फी बेचने का काम कर रहा था। इससे पति, पत्नी और नौ बच्चों का गुजारा चल रहा था। लॉकडाउन में काम बंद होने से 18 मई को श्रीराम पत्नी और बच्चों को लेकर ट्रेन से गांव लौट आया। भूमिहीन श्रीराम का यहां राशनकार्ड भी नहीं है। उसने आरोप लगाया कि कोटेदार ने राशन और प्रधान ने मनरेगा में रोजगार देने से इंकार कर दिया।

काम न होने से परिवार के सामने भोजन तक का संकट खड़ा हो गया। कहीं से कोई मदद नहीं मिली तो गुड्डी देवी ने दो जून को तीन हजार की तोड़िया 1500 रुपये में बेच दी। इन पैसों से राशन लाकर बच्चों को खाना खिलाया। श्रीराम ने बताया कि अब खेतों में परिवार के साथ मजदूरी पर भुट्टा तोड़ने का काम कर रहा है। इसी से ही जैसे तैसे खर्च चल रहा है।

गांव में किसी तरह की सरकारी योजना का लाभ न मिलने का मलाल है। ट्रेन चालू होते ही परिवार के साथ तमिलनाडु लौट जाएंगे। ग्राम प्रधान आशा देवी का कहना है कि श्रीराम ने उनसे संपर्क नहीं किया है। उसका मनरेगा जॉबकार्ड बनवाने के साथ अन्य योजनाओं का लाभ दिलाया जाएगा।

बड़ी बेटी बेचना चाहती है सरकार से मिला लैपटॉप

श्रीराम की 20 वर्षीय बड़ी बेटी सुलोचना इंटर कर चुकी है। तमिलनाडु सरकार की ओर से उसे फ्री लैपटाप मिला है। लॉकडाउन में गांव आने के बाद परिवार आर्थिक रूप से परेशान है। परिवार को परेशान देख सुलोचना अपना लैपटॉप बेचना चाहती है। इसके लिए वह खरीदार ढूंढ रही है।

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