जिला स्तरीय काल सेंटर द्वारा प्रति सप्ताह जानकारी एवं निजी वाहनो के चिन्हांकन भी होगा अभियान में शामिल

कोण्डागांव MyNews36 प्रतिनिधि- कोण्डागांव दण्डकारण्य के पठार पर बसा एक जनजातिय बाहुल्य जिला है। भौगोलिक दुर्गमता, शिक्षा, जागरूकता की कमी एवं आर्थिक पिछड़ेपन की वजह से यहां के ग्रामीण क्षेत्रो मे आज भी संस्थागत प्रसव की मात्रा बहुत कम है। जिसके कारण कोण्डागांव जिला स्वास्थ्य सूचकांको मे पिछड़ा हुआ है। जिसे ध्यान मे रखते हुए कलेक्टर पुष्पेन्द्र कुमार मीणा ने संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने हेतु एक नई पहल के रूप मे “मोचे जचकी मोचो अस्पताल अभियान” को प्रारंभ किया है।

माॅनिटरिंग सेल करेगी असंस्थागत प्रसव के कारणो की समीक्षा

इस अभियान के अतंर्गत सर्वप्रथम जिला एवं विकासखण्ड स्तर पर अलग-अलग मानिटरिंग सेल का गठन किया जायेगा। जिसमे जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में मुख्य चिकित्सा अधिकारी,जिला कार्यक्रम प्रबंधक, जिला परिवार कल्याण एवं स्वास्थ्य अधिकारी, महिला बाल विकास परियोजना अधिकारी सम्मिलित होंगे वहीं विकासखण्ड स्तर पर अनुविभागीय अधिकारी राजस्व की अध्यक्ष्ता में खण्ड चिकित्सा अधिकारी, आईसीडीएस परियोजना अधिकारी, विकासखण्ड कार्यक्रम प्रबंधक ,खण्ड विस्तार एवं प्रशिक्षण अधिकारी शामिल होगें। ये सभी माॅनिटरिंग सेल जिले  एवं विकासखण्डो मे असंस्थागत प्रसव के कारणो की 15 दिनों में समीक्षा कर उन्हे हटाने के लिए कार्ययोजना बनाने का कार्य करेंगें।

पहुंच विहिन ग्रामो मे संस्थागत प्रसव पर होगा जोर

 माॅनिटरिंग सेल पहुंच विहिन ग्रामों को प्राथमिकता के साथ लेते हुए उनमे यदि 15 दिवस के भीतर घर पर प्रसव होता है तो टीम निर्धारित कर उसके कारणों की जांच एवं समीक्षा के उपरान्त ग्राम स्तरीय कार्ययोजना बनाने पर भी कार्य करेगी। इन ग्रामों में महतारी एक्सप्रेस आस-पास के गांव मे न होने की स्थिति में ग्राम में ही निजी वाहन को चिन्हांकित कर वाहन के नंबर, वाहन मालिक का नाम, वाहन चालक का नाम एवं सम्पर्क दूरभाष नम्बर को गांव के मितानित एएनएम, गर्भवती महिला के परिजनो को दिया जायेगा। इस प्रकार प्रत्येक ग्राम में कम से कम तीन वाहनो का पैनल होगा। जिसका उपयोग 102, 108 वाहनो के न पहुंचने के स्थिति में किया जा सकेगा।

काॅल सेंटर से गर्भवती महिलाओं एवं परिजनो को दी जायेगी जानकारी

जिले में एक काॅल सेेंटर की स्थापना की जायेगी। जिसमें जिले के स्वास्थ्य प्रतिनिधियों द्वारा गर्भवती महिलाओं एवं उनके परिजनो को एएनसी, पीएनसी टीकाकरण, सम्भावित प्रसव तिथि आदि की जानकारी दी जायेेगी साथ ही उन्हे संस्थागत प्रसव कराने के लिए विस्तृत जानकारी देकर संस्थागत प्रसव के लिए प्रोत्साही किया जायेगा। जिले मे स्वास्थ्य कार्यकर्ता अपने क्षेत्र मे ईडीडी के आधार पर प्रति सप्ताह संस्थागत प्रसव की माॅनिटरिंग करेंगे एवं ईडीडी के 15 दिवस पूर्व मितानिन प्रतिदिन जाकर गर्भवती महिला की स्वास्थ्य जांच करेंगी साथ ही एएनएम के द्वारा महिला की साप्ताहिक जांच की जावेगी। इन जांचो के उपरान्त गर्भवती महिला को संस्थागत प्रसव के लाभो से भी अवगत कराया जायेगा। इसके लिए स्वास्थ्य से जुड़े सभी अमलो को आगामी दिवसो मे कार्यक्रम से संबंधित प्रशिक्षण देने के उपरान्त घर पर प्रसव कराने वाली दाईयों के लिए भी कार्यशाला का आयोजन किया जायेगा।

ज्ञात हो कि जिले मे 2019-20 के पूर्व के 5 वर्षो मे कुल 5 हजार से अधिक असंस्थागत प्रसव हुए है जिनमें मातृत्व मृत्यु 120, शिशु मृत्यु 1314, 1 से 5 वर्ष तक के बालको की मृत्यु 260 हुई है जबकि 2019-20 मे कुल असंस्थागत प्रसव की संख्या 249 है। जिसमे मातृत्व मृत्यु 14, शिशु मृत्यु 291, एवं 1 से 5 वर्ष के बच्चो की मृत्यु 60 हुई है।

इस सबंध मे कलेक्टर ने बताया कि जिले मे जनसमुदाय में जनजागरूकता के कमी के कारण संस्थागत प्रसव के लक्ष्य के अनुरूप उपलब्धि प्राप्त नही हुई है। जिले मे शत् प्रतिशत संस्थागत प्रसव कराने हेतु ’मोचो जचकी मोचो अस्पताल अभियान’ प्रारंभ किया गया है। इसमे जागरूकता प्रसार, संस्थागत प्रसव पर प्रोत्साहन समय समय पर गर्भवती महिला की नियमित जांच को प्रमुखता से जोेर दिया जायेगा।

Mynews36 प्रतिनिधि राजीव गुप्ता की रिपोर्ट

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