नई दिल्ली – 29 दिसंबर को संसद के दोनों सदनों में कृषि निरसन विधेयक पेश होना था। इसके कुछ समय पहले प्रधानमंत्री ने मंत्रिमंडल के साथियों के साथ मंत्रणा की और जब राज्यसभा से विपक्ष के 12 सदस्यों के पूरे सत्र के लिए निलंबन का फैसला आया तो विपक्ष देखता रह गया। दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर विपक्ष को उसके तौर-तरीकों के कारण विरोध करने के अवसर देते रहते हैं। प्रधानमंत्री मोदी के मंत्रिमंडल के एक वरिष्ठ सदस्य का कहना है कि विपक्ष को सोचना चाहिए कि वह केवल सरकार के निर्णयों के विरोध का प्रतीक क्यों बनता जा रहा है।

सूत्र बताते हैं कि जल्द ही इन 12 विपक्षी सांसदों का निलंबन वापस हो सकता है। बताते हैं कि तीन-चार दिन बाद ( संभवतः सोमवार) से इसके संकेत देखने को मिल सकते हैं। किसानों के आंदोलन को लेकर भी केन्द्र सरकार के रणनीतिकार तेजी से प्रयास कर रहे हैं। पंजाब के प्रभारी और केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत को उम्मीद है कि एक-दो दिन में पंजाब के किसान खेत-खलिहान की तरफ लौटना शुरू हो जाएंगे। 

किसानों के मुद्दे पर कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने बुधवार को सदन में बयान भी दिया। आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों को मुआवजा देने के बारे में भी सरकार का पक्ष रखा और कोई आंकड़ा न होने की बात कही। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर को भी उम्मीद है कि सोमवार छह दिसंबर तक अच्छी खबरें सुनने में आ सकती हैं। गजेन्द्र सिंह शेखावत भी इतने ही दिनों का इंतजार करने की बात कह रहे हैं।  

‘प्रधानमंत्री मोदी अपना काम करते हैं, विपक्ष केवल विरोध करता है’

केन्द्र सरकार के एक अन्य मंत्री का कहना है कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है। लोकतंत्र में विपक्ष का काम विरोध करना है। वह कर रहा है। लेकिन विपक्ष केवल सदन में हल्ला, हंगामा, विरोध करके सरकार के कामकाज में रोड़ा पैदा कर रहा है। देश की जनता सब देख रही है। भाजपा के प्रवक्ता और सांसद जीवीएल नरसिंहा राव साफ कहते हैं कि कांग्रेस पार्टी शुरू से अटकाने, भटकाने, लटकाने में माहिर रही है, लेकिन अब उसे संसदीय लोकतंत्र ऐसा करने की छूट नहीं दे सकता। इसे राजनीति की भाषा में समझें तो पिछले कई साल से इसी तरह की स्थिति बनी हुई है। 

सरकार के रणनीतिकार मानते हैं कि यह उनके पक्ष में है। समझा जा रहा है कि तीनों कृषि कानूनों के सरकार द्वारा वापस लेने की घोषणा के बाद सरकार ने बड़ी सावधानी से विरोध के गोल को शिफ्ट किया है। इसके चलते विपक्ष के सामने किसानों के विधेयक को पारित कराने का मुद्दा पीछे चला गया और संसदीय कामकाज में 12 सांसदों का निलंबन मुख्य मुद्दा बन गया है। सत्ता पक्ष इसे जहां राज्यसभा के सदस्यों के आचरण से जोड़कर मुद्दा बना रही है, वहीं विपक्ष भी मुद्दे पर झुकने के लिए तैयार नहीं है।

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