लौट रहा प्राचीन नगरी चंदखुरी का वैभव,माता कौशल्या मंदिर परिसर को सौंदर्यीकरण से मिला भव्य स्वरूप

ऐतिहासिक नगरी की बढ़ी रौनक

रायपुर – छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक और पौराणिक नगरी चंदखुरी का वैभव फिर से लौट रहा है। यहां स्थित माता कौशल्या के प्राचीन मंदिर को सौंदर्यीकरण से भव्य स्वरूप मिला है। इस नगरी में वैश्विक पर्यटन की दृष्टि से विकसित की जा रही सुविधाओं से इस ऐतिहासिक नगरी की रौनक आने वाले समय में बढ़ेगी।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 7 अक्टूबर को चंदखुरी में आयोजित भव्य समारोह में राम वन गमन पर्यटन परिपथ परियोजना का आधिकारिक तौर पर शुभारंभ और यहां स्थित भगवान श्रीराम की माता कौशल्या के प्राचीन मंदिर के सौंदर्यीकरण के प्रथम चरण के कार्यों का लोकार्पण करेंगे।

ऐसा माना जाता है कि रायपुर से 24 किलोमीटर की दूरी पर स्थित चंदखुरी चंद्रवंशी राजाओं की नगरी रहा है और माता कौशल्या जन्मस्थली है। चंदखुरी नगरी 126 तालाबों को लिए अपनी विशेष पहचान रखती है, गांव में जलसेन तालाब के बीच माता कौशल्या का प्राचीनतम मंदिर है, जो दुनियाभर में भगवान राम की मां का इकलौता मंदिर है, मंदिर में विराजित प्रतिमा के रूप में भगवान श्रीराम बालस्वरूप में अपनी माता कौशल्या की गोद में विराजमान हैं। चंदखुरी कौशल्या मंदिर एवं परिसर का 15 करोड़ 45 लाख रुपए की लागत से सौंदर्यीकरण एवं जीर्णोद्धार किया जा रहा है, जो पूर्णतः की ओर है। मंदिर के विशेष आकर्षण में शिव और नंदी की विशाल प्रतिमा, द्वीप के द्वार पर हनुमान की मूर्ति, दशरथ दरबार, सुषेण की समाधि दर्शनीय है। यहां मनोकामना वृक्ष में लोग नारियल एवं मौली धागा बांधकर मनोकामना मांगते हैं।

श्रीराम वन गमन पर्यटन परिपथ परियोजना के प्रथम चरण में जिन नौ जगहों का विकास किया जा रहा है, उनमें चंदखुरी विशेष प्रमुख है। वर्तमान में चंदखुरी को वैश्विक पर्यटन के दृष्टिकोण से विकास कार्य किया जा रहा है। मंदिर परिसर में 51 फीट ऊंची श्रीराम प्रतिमा, भव्य गेट, मंदिर के चारांे ओर तालाब का सौंदर्यीकरण, आकर्षक पथ निर्माण, वृक्षारोपण किया जा रहा है। इस विकास से पर्यटन स्थलों में आयमूलक स्त्रोतों में विस्तार होगा और क्षेत्रीय रोजगार, स्व-रोजगार को बढ़ावा मिलेगा। मंदिर चारों ओर से मनमोहक उद्यानों से घिरा है, तालाब के मध्य में शेषनाग शैय्या पर शयन मुद्रा में भगवान विष्णु के चरण दबाते मां लक्ष्मी की आकर्षक प्रतिमा है, दूसरी ओर समुद्र मंथन के दृश्य को प्रतिबिंबित करती हुई देव-दानवों की मूर्तियां श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र हैं।

गौरतलब है कि राम वनगमन परिपथ परियोजना के प्रथम चरण में कोरिया से सुकमा तक 9 स्थलों-सीतामढ़ी-हरचौका (कोरिया), रामगढ़ (सरगुजा), शिवरीनारायण-खरौद (जांजगीर-चांपा), तुरतुरिया (बलौदाबाजार), चंदखुरी (रायपुर), सिहावा-सप्तऋषि आश्रम (धमतरी), रामाराम (सुकमा) का विकास किया जा रहा है। भगवान श्रीराम से जुड़ी ऐतिहासिक, पुरातात्विक, धार्मिक और सांस्कृतिक स्मृतियों एवं महत्व अनेक स्थलों को वैश्विक पर्यटन के अनुकूल बनाने के उद्देश्य से इस परियोजना का शुभारंभ किया गया है।

भव्य होगा राम वन गमन पर्यटन परिपथ का उद्घाटन

चंदखुरी महोत्सव राम वन गमन पर्यटन परिपथ के भव्य उद्घाटन की तैयारी में नृत्य, संगीत, लेजर शो एवं एलईडी रौशनियों के माध्यम से राम के वनवास काल में छत्तीसगढ़ प्रवास के दृश्य जीवंत किए जाएंगे। मशहूर गायक-संगीतकार शंकर महादेवन बतौर मुख्य अतिथि समारोह में सम्मिलित होंगे।

सुप्रसिद्ध कलाकार पद्मश्री भारती बंधु, गायिका कविता वासनिक, श्रीराम गीतों के विश्वप्रसिद्ध मानस (भजन) मंडली नंदकुमार साहू, मुम्बई का फ्यूजन बैंड कबीर कैफे एवं गायिका सुकृति सेन भी समारोह में शामिल होंगीं। इसके साथ ही मुम्बई स्थित प्रसिद्ध एक्रोबेटिक नृत्य समूह ‘वी अनबीटेबल’ द्वारा राम जीवन आधारित विशेष नृत्य की प्रस्तुतियां होंगी।

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