किन्नरों ने लिखी ‘जिंदगी की दास्तान’ नाम की पहली किताब

रायपुर- थर्ड जेंडर की जिंदगी को आप भी पढ़ सकते हैं। इसमें जिंदगी के कष्‍ट को शब्‍दों में पिरोया गया है। इसे किताब की शक्‍ल दे दी गई है। थर्ड जेंडर के हालात को किताब के रूप में जन जन तक पहुंचाने के लिए डॉक्टर फिरोज अहमद ने अपना योगदान दिया है। किन्‍नरों के भाव को शब्‍दों में पिरोया गया है।

‘जिंदगी की दास्तान’ थर्ड जेंडर समुदाय सदस्यों की गद्य और पद्य रचनाओं का यह पहला संकलन है। इसकी रचना छत्तीसगढ़ सहित भारत के तृतीय लिंग (थर्ड जेंडर) समुदाय के द्वारा की गई है। आत्म-अभिव्यक्ति, संवेदनाएं, पीड़ा, आशाएं, आकांक्षाएं, अनगिनत संभावनाएं और न जाने कितने ही ऐसे सहज और जटिल भावों से पाठक रूबरू होंगे।

उन्हें पढ़कर चेतन और अचेतन मन में कहीं न कहीं यह भाव हिलोरे लेने लगेंगे कि थर्ड भाव शून्य नहीं है, विचार शून्य नहीं,नकारा नहीं। उनमें अदम्य साहस है। बचपन से लेकर आज तक कटीले रास्तों पर चलते हैं, उफ भी नहीं करते। हम बहुत कुछ कहना और करना भी चाहते हैं, किंतु जब देखते हैं कि वैचारिक यात्रा के लिए गली से लेकर सड़क तक सब बंद है तो मन मसोस कर रह जाते हैं।

हमारे समुदाय की यह रचनाएं समाज के समक्ष उनके अंतर को उद्घाटित करेंगी और छोटा ही सही एक सहृदयता का भाव पुष्पित करेगी। यह किताब आपको विकास प्रकाशन से प्राप्त हो सकती है। इन रचनाओं को किताब के रूप में पहुंचाने के लिए डाक्टर फिरोज अहमद ने अपना योगदान दिया है। दावा किया जा रहा है कि यह किताब भारत में किन्‍नरों द्वारा पहली बार लिखी गई है।

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