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इस ज़िले के स्वास्थ्यकर्मी नहीं मानते अपने उच्च अधिकारियों का आदेश,करते हैं मनमानी

कवर्धा- देश में आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद भी जिले के स्वास्थ्य विभाग के मैदानी कर्मचारियों की हठधर्मिता पूरे शबाब पर है।इसका ताजा मामला प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र मरका का सामने आया है।यहां पूर्व में पदस्थ ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजिका रत्ना वारते का स्थानांतरण कार्यव्यवस्था के तहत मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा प्रथमिक स्वास्थ्य केन्द्र तरेगांव किया गया था,लेकिन महिला कर्मी के द्वारा दो महीने बीत जाने के बाद भी नई पदस्थापना जगह में अपनी उपस्थिति नही दी गई है और वह मरका अस्पताल में ही रहकर कार्यो में व्यवधान उत्पन्न कर रही हैं,जबकि 27 फरवरी को जारी किये गये आदेश में स्पष्ट लिखा गया है कि-उक्त स्वास्थ्यकर्मी का वेतन आहरण तभी किया जाएगा जब वो अपनी उपस्थिति नई पदस्थापना जगह में देंगी,लेकिन यहां पूरा खेल ही समझ से परे है।

स्थानांतरण आदेश के बाद भी कर रही मनमानी

स्वास्थ्यकर्मी वारते आज भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मरका में ही काम कर रहीं हैं।उनकी इस हरकत से विभाग अवगत होने के बाद भी आँख मूंदे बैठा है।आचार संहिता होने के बाद भी महिलाकर्मी के द्वारा उच्च अधिकारियों के आदेश को न मानकर मनमानी करना घोर लापरवाही और अनुशासनहीनता की श्रेणी में है।ऐसी स्थिति में उच्च अधिकारियों को उक्त प्रकरण को संज्ञान में लेते हुए अनुशासनात्मक कार्यवाही करना चाहिए।

रत्ना वारते को वेतन नहीं मिला रहा है,उन्हें जाने के लिए हमारे द्वारा कह दिया गया है।लेकिन वह नहीं जा रही हैं।ऐसे में हम कैसे किसी को जबरदस्ती लेकर जा सकते हैं।उनका वेतन दो महीने से नहीं बन रहा है।
गौरव सिंह परिहार,BMO,प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र,मरका

व्हाट्सऐप में मुझे लेटर भेजा गया था,जिसे मोबाईल में स्वीकार नहीं किया जाता।लेटर मुझ तक पहुँचते आचार संहिता लग चुकी थी।ऐसे में मुझे बार-बार लेटर भेजकर मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है और वहां भी जाने पर कोई प्रमोशन नही मिल रहा हैं।मैं कभी नहीं जा सकती।
रत्ना वारते,नर्स,प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र,मरका

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