छत्तीसगढ़

गांवों से निकलकर शहरों तक पहुंचा गेड़ी का क्रेज़, 60 से 120 रुपए में मिलेंगी

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रायपुर – हरेली छत्तीसगढ़ का पहला त्योहार है, जिसमें गेड़ी चढ़ने की परंपरा राज्य में बहुत प्रमुख है. हर बार गांवों में, छोटे से बड़े सभी लोग इस अवसर पर गेड़ी चढ़कर खास आनंद लेते हैं. हालांकि, इस साल सरकार ने एक ऐसी व्यवस्था की है जिसके अनुसार राज्य के शहरी लोग और बच्चे भी गेड़ी चढ़ सकेंगे.

छत्तीसगढ़ के हरेली त्योहार में इस बार मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के साथ-साथ स्थानीय बच्चे भी गेड़ी चढ़ सकेंगे. इसके लिए सीएम के निर्देश पर राज्य में पहली बार गेड़ी बनाने और बेचने की योजना बनाई गई है. बिलासपुर में जिला प्रशासन ने सी-मार्ट में गेडियों की उपलब्धता सुनिश्चित की है. यहां आपको 60 से 120 रुपये तक की कीमतों में गेडियां मिलेंगी. इस पहल का उद्देश्य है छत्तीसगढ़ की कला और संस्कृति को प्रोत्साहित करना और बच्चों को इनसे जोड़ना. साथ ही, राजधानी रायपुर के सी-मार्ट में भी गेडियां सिर्फ 50 रुपये में उपलब्ध हैं. इससे शहर के लोगों को भी उत्साह मिला है और वे इस पहल की सराहना कर रहे हैं.

प्रदेश में हरेली त्योहार को जनता के साथ-साथ सरकार भी पूरे जोश और उत्साह के साथ मनाती है. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी गेड़ी पर चढ़ते हुए दिखाई देते हैं, जो एक उत्कृष्ट और प्रशंसनीय पहल है. हर साल की तरह, इस बार भी 17 जुलाई को हरेली तिहार को पूरे प्रदेश और जिले में उत्साह और उल्लास के साथ मनाने का निर्णय राज्य शासन ने लिया है. इससे प्रदेश के लोगों को आनंद और समर्पण का भाव बढ़ाया जाएगा और यह सामाजिक एकता और समरसता को और मजबूत करेगा.

क्यों चढ़ते हैं गेड़ी ?

वर्षा ऋतु में गेड़ी का प्रचलन होता है, और बारिश के कारण कई रास्ते कीचड़ से भर जाते हैं. इससे आने-जाने में परेशानी होती है. इस समय बच्चे गेड़ी पर चढ़कर एक स्थान से दूसरे स्थान जाते-आते हैं. वर्षा के समय गांवों और खेतों में सांप-बिच्छू का डर भी होता है. गेड़ी में चढ़ने से वे इससे बच सकते हैं.

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