डिजिटल युग मे प्रिंट मीडिया की चुनौतियां…..

कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय रायपुर मे मासिक व्याख्यानमाला की तीसरी कड़ी का हुआ आयोजन

रायपुर MyNews36 – कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय रायपुर मे आज ‘ डिजिटल युग मे प्रिंट मीडिया की चुनौतियां ‘ विषय पर मासिक व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया।इस अवसर पर छत्तीसगढ़ समाचार पत्र के संपादक सुनील कुमार मुख्य वक्ता रहे।कार्यक्रम की शुरूआत सरस्वती वंदना और राजकीय गीत के साथ हुई।

तत्पश्चात कार्यक्रम संयोजक डॉ.नरेन्द्र त्रिपाठी ने स्वागत उद्बोधन देते हुए कहा कि लंबे अंतराल के बाद कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए मासिक व्याख्यानमाला की तीसरी कड़ी आयोजित की जा रही है।डिजिटल युग मे प्रिंट मीडिया की भविष्य का उल्लेख करते हुए उन्होंने डिजिटल मीडिया को लेकर शासन द्वारा जारी किए गए गाइडलाइन का जिक्र भी किया।उसके बाद प्रो.नृपेंद्र शर्मा द्वारा मुख्य वक्ता सुनील कुमार का परिचय पढ़ा गया।

मुख्य वक्ता के रूप मे संपादक सुनील कुमार ने कहा कि-वर्तमान युग डिजिटल की ओर तेजी से बढ़ रहा है।खासकर कोरोना काल के बाद लोगों की सोच-विचार और मीडिया के तौर तरीक़े बदल गए है।लोगों का ध्यान डिजिटल मीडिया की ओर आकर्षित हुआ है।लोग घर में ही रहकर डिजिटल मीडिया का लाभ उठा रहें है।ई-पेपर भी आसानी से मिल जा रहा है।डिजिटल मीडिया से लोगों को सहुलियते हुई।मीडिया के बदलते तौर-तरीकों के साथ लोगों के लिए मीडिया की जरूरत भी बदल रही है।डिजिटल युग मे यहां लोग अखबारों को भी अब डिजिटल रूप मे पढ़ना पसंद कर रहें है।

उन्होंने आगे कहा कि प्रिंट मीडिया परंपरागत रूप से अब सीमित होता जा रहा है और लोगों का रूझान डिजिटल की ओर बढ़ रहा है। वर्तमान मे बिना डिजिटल के कोई गुजारा नहीं हो सकता।लेकिन डिजिटल मीडिया मे अब गंभीरता, विश्वसनीय, ईमानदारी जैसी चीज नजर नहीं आती। अब अखबार के हिट देखे जाते है उसी आधार पर उनका मूल्यांकन करते है। ग्लैमर,क्राइम,की चीजें लोगों को पसंद आ रही है। प्रिंट मीडिया का अस्तित्व कभी खत्म नहीं होगा। प्रिंट मीडिया अभी भी ताकतवर है बस डिजिटलीकरण को देखकर प्रिंट मीडिया के तौर तरीके बदलने पड़ रहे है।

जिंदगी की जीजिविषा है पत्रकारिताकुलपति प्रो.बल्देव भाई शर्मा

कुलपति प्रो.बल्देव भाई शर्मा ने कहा कि पत्रकारिता केवल एक प्रोफेशन या पेशा ही नहीं बल्कि जिंदगी की जीजिविषा है। पत्रकारिता करने के लिए जानना,सीखना और जूझना पड़ता है। हमारी दृष्टि हमेशा नई सीखने की होनी चाहिए। कोई पत्रकार जन्मजात नहीं होता बल्कि प्रशिक्षित होना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि गलत को गलत कहने से कुछ नहीं बदलता बल्कि गलत को सहीं करने से ही समाज बदलता है। पत्रकारिता के लिए उन्होंने मूल्यबोध व भावबोध को आवश्यक बताया।

वर्तमान दौर डिजिटल विस्फोट काकुलसचिव डॉ.आनंद शंकर बहादुर

अंत मे आभार प्रकट करते हुए विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ.आनंद शंकर बहादुर ने कहा कि यह संस्थान ज्ञान,बुद्धि और विवेक आदान-प्रदान करने की संस्थान है।सर्जनात्मक और आलोचनात्मक शक्ल मे अगर भाषा भी मिल जाए तभी पूर्ण व्यक्तित्व का निर्माण होता है। केवल सोचने से ही कुछ नहीं होता पत्रकारिता मे विचार की तुला पर तौलकर शब्द चुनने होते है।यह दौर डिजिटल विस्फोट का है। जो मानवीकरण और दानवीकरण दो रूप मे सामने आता है।भले ही डिजिटल युग मे हम मिनटों मे करोड़ों लोगो तक पहुंच सकते है मगर प्रिंट जैसे गंभीर प्रभाव नहीं छोड़ सकते।युग भले बदल जाए लेकिन डिजिटल युग मे भी मूल्य,भाव,प्यार,सच्चाई, गुस्सा, ईमानदारी, मानवता कभी नहीं बदल सकता। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्राध्यापक गण व बड़ी संख्या मे पत्रकारिता के विद्यार्थी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन सहायक प्राध्यापिका वर्षा शर्मा ने किया।

MyNews36 प्रतिनिधि केशव पाल की रिपोर्ट

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