Mynews36 कवर्धाजिले में संस्थागत प्रसव को बढ़ाने हेतु जिला कलेक्टर के द्वारा समय-समय पर स्वास्थ्य विभाग और महिला बाल विकास विभाग की बैठक लेकर स्वास्थ्य कर्मियों को लगातार प्रोत्साहित किया जाता हैं।जिसका अच्छा परिणाम भी सामने आता है।मैदानी कार्यकर्ता भी पूरे मनोयोग से अपना प्रयास करते हैं,परन्तु कही न कही कोई कमजोर कड़ी के कारण पूरा महकमा सन्देह के दायरे में आ जाता हैं।ऐसा ही एक मामला 16 अप्रैल को सामने आया,जिसमे ग्राम मथानीकला के सुरेखा बाई को सुबह लगभग 5 बजे प्रसव के लिये प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र मरका लाया गया।मौके पर उपपस्थित नर्स द्वारा केश की गंभीरता को देखते हुए प्रोटोकॉल के तहत महतारी वाहन बुलाकर सुरक्षित तरीके से प्रसूता को जिला चिकित्सालय पहुचने के लिए रिफर किया।जहाँ स्वास्थ्य कर्मियों का असली खेल इसके बाद चालू होता|

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महतारी वाहन के कर्मचारियों द्वारा पिपरिया-बिरकोना के बीच में ही प्रसूता को दूसरे वाहन में नियम के विरुद्ध शिफ्ट कर दिया जाता हैं,और वो वाहन प्रसूता को जिला अस्पताल न ले जाकर प्राइवेट अस्पताल ले जाता हैं।अब सोचने वाली बात यह है कि-प्रसूता को जिला अस्पताल रिफर किया गया था,तो उसे निजी अस्पताल क्यों ले जाया गया।वैसे पूरे जनमानस में कवर्धा के निजी अस्पताल के लिए प्रसिद्ध हैं,लोग तो यहां तक बताते की रिक्शा वालों को भी मरीज लाने पर इन अस्पतालो से कमिशन मिलता हैं,यह भी मामला महतारी वाहन के कर्मियों के निजी लालच का ही है,जिसके कारण एक नवजात की जान चली गई।स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारीयो ने भी अपने प्रारंभिक जाँच में महतारी वाहन के कर्मियों को ही दोषी पाया है|लेकिन,गर्भस्त शिशु आपरेशन के दौरान मौत के मामले में उक्त निजी चिकित्सालय को क्लीन चिट देना भी मामले में कही न कही लीपापोती की जाने की ओर इशारा करता है।

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