Home आर्टिकल्स ख़ास ख़बर: जिधर भी देखो ‘चखने’ का शोर,पुलिस-आबकारी बेहद कमजोर

ख़ास ख़बर: जिधर भी देखो ‘चखने’ का शोर,पुलिस-आबकारी बेहद कमजोर

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मीडिया रोज ले रहा खबरों का चटकारा पर प्रशासन बने बैठा है ‘बेचारा’

दरूहों के मुंह से गूंज रही एक ही आवाज,मजा कर ले बेटा तू नवाज-पूरन साहू

राजनांदगांव। चखना…मतलब… सीधे कहे तो दारू या बीयर के प्रत्येक घुट के साथ चबाए जाने वाला आईटम। चाहे वो चना हो या फल्ली.. मुर्रा हो या मुरकु…।आईटम और भी हो सकते हैं चाहे वो शाकाहारी हो या मांशाहारी।ये चखना वहीं चखना है जिन्होने पंद्रह साल की सत्ता में मलाई मारने वालों को समय आने पर ‘नून’ चटवाकर रख दिया।समय के साथ अब इसी चखने पर छत्तीसगढ़ की मीडिया भी चटकारे लेने लगी है। चटकारे का ठिकरा उन नेताओं के सिर फोड़ा जा रहा है जिनकी पैंठ कल तक कमर से नीचे बुचक रही थी और सत्ता आने के महज पांच माह के बाद फिर से टाईट हो गई है।राजनांदगांव जिले की बात करें तो चखने की राजनीति में तो फिलहाल खैरागढ़ के राजा विधायक देवव्रत सिंह कूद गए हैं पर बाकी सत्ता के चार के विधायक अभी लोकसभा चुनाव की चिंता में मदहोशी की दौर से गुजर रहे हैं।राजनांदगांव जिले के कुल 28 देशी और विदेशी शराब दुकानों के आसपास दरूहे चखने का चटकारा तो बड़े मजे से ले रहे हैं,बाद में दो से ढाई पैक का हलक जाने के बाद वे सत्ता सरकार की फूल ऐसी-तैसी करने में भी कोई कसर बाकि नहीं छोड़ रहे हैं।कोई कहता है कि-चखना सेंटर ‘नवाज’ के आदमी चला रहे है तो कोई कहता है पार्टनरशिप में चल रहा है, चखने में कई लोग शामिल है।अब इन दरूहों को इस बात से कोई लेना-देना तो है नहीं कि ये नवाज-फवाज है कौन…, क्या है…, कहां का है, पर दरूहों की आवाज ने अब इलेक्ट्रानिक और प्रिंट मीडिया की आंख और कान को भी खोलकर रख दी है।मीडिया लगातार चखना सेंटरों की खबरें को परोस रही है पर प्रशासन में बैठे लोग ऐसे खामोश है मानों उन्होने चखने की आड में गले तक खा लिया हो और छककर पी ली हो? खबरे तो यह भी सुनी जा रही है कि-चखना सेंटरों से संबंधित थाना क्षेत्रों और आबकारी को भी मोटी रकम पहुंच रही है।ऐसे मामले में पुलिस और आबकारी विभाग तो सत्ता के दामाद बने बैठे हैं।वे वहीं कर रहे हैें जो उनके सरकारी ससुर बोल रहे हैं। माना जा रहा है कि-चखने की चिंगारी एक न एक दिन जरूर भभकेगी और इसका परिणाम वैसे ही सामने आएगा जैसे शराब पीने के अंत में दरूहे को नमक चाटना पड़ता है?

वो तो तंबू में बंबू लगाए बैठे?

सुनने में आता है कि-शराब दुकानों के आसपास जिन्होने चखना दुकानें खोल रखी है उनकी उन लोगों से रोज कंझट होती है,रोज झगड़ा होता है.. जिनका चखना सेंटर सरकारी संरक्षण में चल रहा है।पुलिस और आबकारी ऐसे लोगों को खदेडने का काम करती है जिनका उनसे कोई वास्ता नहीं है।बताया जाता है कि- सरकारी संरक्षण में चल रहे चखना सेंटरों में लठैत भी तैनात रहते है समय आने पर पुलिस वाले भी उनकी खुली मदद करते हैं।बाईपास रोड रेवाडीह,मंडी बाईपास,सोमनी, सांकरा,डोंगरगांव,मानपुर, बागनदी,बेलगांव,खैरागढ़,छुईखदान,गंडई की देशी-अंग्रेजी शराब के अलावा साल्हेवारा,छुरिया,अर्जुनी,बोरतलाव,मुढीपार जैसी जगहों में चखना सेंटरों से रोजाना हजारों-लाखों की आवक हो रही है जिसमें उस बंदे की भी तगड़ी हिस्सेदारी है जो फिलहाल पर्दे के पीछे में है।

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