MyNews36 का स्पेशल आर्टिकल : “नारी एक नज़र में……”

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लंबे समय बाद तुम्हारी बाहों में आना चाहती थी।
लंबे समय बाद आज तुम्हारा घर पर ठहरना हुआ था।
लंबे समय बाद आज इंतज़ार खत्म हुआ था,पर तुम ना आएं।
जब भी मैं करीब आती,तुम कहते थक चुका हूं।
जब भी मैं तुमसे बातें करती,तुम कहते सर दर्द हो रहा है।
जब भी मैं समान मंगवाती,तुम कहते देखा हूं,पर तुम ना लाते।
आज जब हर तरफ ख़ामोशी है,सुनसान सड़के है,
आज जब तुम घर पर हो,तो क्यों चिड़चिड़ाहट है।
आज जब मैं पास ना आना चाहु तो क्यों तुम्हे झुंझलाहट है,
पर तुम ना समझ पाए।
जब तुम चाहो तो मैं करीब आऊ और जब मैं चाहु तब तुम रोष दिखाओ।
जब तुम्हें फुरसत ना थी मेरे लिए तो, अब मुझसे फुरसत की उमीदे क्यों?
तन मेरा तड़पता था,मेरे एहसास रोज मरते थे,पर तुम ना देख पाते थे। आज जब तुम्हे समय मिला तो दिनभर प्यार जताते हो। अब नहीं रहे वो एहसास,वो जस्बात तुम्हारे लिए…. अब नहीं जिंदा मैं,मर गए सारे ख्वाब तुम्हारे लिए,पर तुम कहा समझ पाते हो।

नारी ममता की मूरत है,वात्सल्य का सागर है नारी,नारी ही तो है जिसे अपने जज़बातों को जीने का ,उसे रूप देने का अधिकार है। नारी यदि अपने पति से प्रेम मांगे तो बेशर्म कहलाती है और यदि तुम्हारे ज़िस्म की प्यास बुझाय तो वेश्या।मर्द यदि उसी वेश्या के पास जाए तो भी मर्द और बीवी के साथ हो तो भी मर्द।

जब ऑफिस से उन गलियों में जाते थे तब घर पर गुस्सा कर सो जाते थे,आज जब उसके पास नहीं जा पा रहा तो अपनी ही बीवी की इज्जत बार-बार उतारने के पीछे पड़े रहते है।आज कितने साल गुजर गए उसने छुआ ही नहीं।अब अचानक छुए तो कैसे छूने दू।दर्द और पीड़ा होती है तुम्हारे छूने से कभी तो समझो इन आंसुओ के बहाने से।काम तो हम औरतें भी पूरे वक़्त करती है, पर तुम्हें कभी ना नहीं कहती है, तो क्यों तुम काम के बहाने करते हो सीधे-सीधे फसाने क्यों नहीं कहते हो।आज ये हर घर की कहानी है जब लॉकडाउन होता है तो घर की औरत याद आती है फिर जैसे ही रास्ते खुलेंगे कोठे पर भाग जाते है।इस दर्द से निकलो,अगर मंजूर ना हो तो विरोध करो जरूर करो।

नारी एक नज़र में समझ आ जाती है यदि उसे प्रेम भाव से देखा जाए तो। उनकी व्यथा को समझो ,उन्हें प्रेम दो,सम्मान दो और जो आज तक होता आया है उसे बदलने में अपना भी सहयोग दो।

आप सभी के समक्ष ऐसी ही नारी वेदनाओं के साथ फिर रूबरू होंगी MyNews36 के स्पेशल एपिसोड के द्वारा वोमेन्स एक्सपर्ट डॉ. यशा वेगड़ के साथ । अपनी लड़ाई नारी खुद तुम्हे लड़ना है, तुम हो शक्ति अब तुम्हे ये बताना है।

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