घोर लापरवाही के कटघरे में जिला शिक्षा विभाग

राजनांदगांव MyNews36 प्रतिनिधि- नरवा-गरवा-घुरवा-बाड़ी… सुराजी गांव योजना…, पौनी पसारी योजना…, बिजली बिल हाफ योजना…, मोर छत, मोर बिजली योजना…, कृषक जीवन ज्योति योजना…, राजीव गांधी किसान न्याय योजना…, गोधन न्याय योजना…, पढई तुंहर दुआर जैसे सभी क्षेत्रों में दर्जनों योजनाओं के माध्यम से छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ‘गढबो नवा छत्तीसगढ़’ की मंशा को मूर्त रूप देने में भलेे ही लगे हुए हैं।पर राजनांदगांव जिले में एक विभाग ऐसा है जिन्हे ऐसे ‘योजनावीर’और ‘छत्तीसगढिय़ा संदेशवाहक’ की मंशा से कोई लेना देना नहीं हैं।शायद यही कारण है कि उनकी हजारों तस्वीरें कई महिनों से गोदाम में थप्पी लगे धूल खाते पड़ी हुई है।जिला शिक्षा विभाग में दो-दो डीईओ के आपसी खींचतान और विभागीय अमले की जबरदस्त गुटबाजी के अलावा विभागीय अमले की घोर लापरवाही और उदासिनता ही कही जाए कि स्कूलों में टांगने के लिए सरकार द्वारा भेजी गई मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और मप्र के प्रथम मुख्यमंत्री स्व. पं. रवि शंकर शुक्ल की हजारों तस्वीरे गोदाम में डंप कर रख दी गई है।

ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ शासन सामान्य प्रशासन विभाग मंत्रालय द्वारा 13 अगस्त 2019 को एक आदेश जारी प्रदेश के सभी शासकीय कार्यालयों और शासकीय भवनों में छत्तीसगढ़ के वर्तमान राज्यपाल और वर्तमान मुख्यमंत्री की तस्वीरें लगाए जाने का आदेश जारी किया था। इस आदेश के तहत शासन स्तर से राजनांदगांव जिले के सभी नौ विकास खंडों के स्कूलों में लगाने के लिए हजारों की संख्या में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और मध्यप्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री स्व. पं. रवि शंकर शुक्ल की तस्वींरे भेजी गई थी। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार तस्वीरों को यहां आए करीब आठ से नौ माह हो गए हैं पर सभी तस्वीरें शिक्षा विभाग के एक गोदाम में थप्पी लगी धूल खाते हुए पड़ी है।

शासन की मंशा थी कि स्कूलों में इनकी तस्वीरें लगाए जाने से बच्चों में छत्तीसगढ के छत्तीसगढिय़ा मुख्यमंत्री और अविभाजित मप्र के प्रथम मुख्यमंत्री का नाम और चेहरा हर पल याद रहेगा किन्तु जिला शिक्षा विभाग की घोर लापरवाही ही कहीं जाए कि सरकारी मंशा अमलीजामा नहीं पहन पाया है।

कोरोना काल का बहाना

जिला शिक्षा विभाग के जिम्मेदारों से पुछने पर एक ही जवाब सामने आता है कि अभी कोराना काल के लाक डाऊन के चलते तस्वीरों को स्कूलों में नहीं भेजा सका है। सवाल यह उठता है कि क्या लाकडाऊन में स्कूलों के सरकारी कामकाज रूक गए हैं या फिर सरकारी स्कूलों के अमले को तनख्वाह नहीं मिल रही है? और जब शिक्षा विभाग का सरकारी कारिंदा हर महीने तनख्वाह ले रहा है तो फिर सरकारी जिम्मेदारियों के निर्वहन और क्रियान्वयन में लापरवाही और उदासिनता क्यों? अब देखना यह है कि सीएम भूपेश बघेल के प्रति आस्था विश्वास और कांग्रेस के प्रति चाह रखने वालें शासन, प्रशासन मे बैठे लोग ऐसे गंभीर मसले के उजागर होने के बाद भी क्या चादर ओढकर सो जाते हैं या फिर उनके मुंह में बर्फ जम जाता है?

MyNews36 प्रतिनिधि पुरन साहू की रिपोर्ट

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