अपना उल्लू सीधा करने राजनांदगांव विधानसभा के कांग्रेसी नेता कूदे डोंगरगांव की राजनीति में

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राजनांदगांव/संवाददाता- भाजपा की सत्ता के दौरान जून 2018 में डोंगरगांव विधानसभा क्षेत्र के रातापायली में दिन-रात रेत के अवैध उत्खनन पर खामोश रहने वाले राजनांदगांव विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेसी नेता अब अपना उल्लू सीधा करने डोंगरगांव विधानसभा क्षेत्र की रेत की राजनीति में कूदकर खुद को पार्टी का हिमायती और खुद के दामन को बेदाग बताने में लग गए हैं।

पंचायती राज से जुड़े राजनांदगांव विधानसभा क्षेत्र के इन कांग्रेसी नेताओं की मंशा है कि-खुटेरी रेत खदान में उनकी दुकानदारी दिन दुगुनी-रात चौगुनी चलते रहे और बाकि सब रेत खदान बंद हो जाए और ये पेलकर मलाई मारते रहे? मेढ़ा रेत खदान कौन चला रहा था।किसके इशारे पर चल रहा था? क्या राजनांदगांव विधानसभा क्षेत्र के पंचायती राज के ये नेता नहीं जा रहे थे,वो सब जान रहे थे पर उनकी हिम्मत कहां कि-वे उस बंदे के खिलाफ चूं भी कर पाए क्योंकि खुटेरी खदान के संरक्षक मंडल में वहीं बंदा उनके प्रमुख आका के रूप में शामिल है और तो और इन कांग्रेस नेताओं की औकात कहां कि-उस कांग्रेस नेता के भतीजे के खिलाफ शिकायत कर पाए जो मेढा रेत खदान का डॉन था।चुंकि राजनांदगांव विधानसभा क्षेत्र के पंचायती राज के नेताओ को अपनी रेत की राजनीति चमकानी थी,मौका अच्छा मिल गया वे भी ठस गए ज्ञापन सौंपने में? भूपेश सरकार की नजर में ईमानदार बनने और सुर्खियां बटोरने वाले ये नेता पंचायती राज की राजनीति में हक की लडाई और सरकारी शराब दुकान खुलने के विरोध की लड़ाई के उस दिन और उस घड़ी को भूल गए जब जिले में विधायक सहित तमाम कांग्रेस नेताओं के होते उनका राजनीतिक चीरहरण हुआ था।

खैर मौका परस्त राजनीति की परिभाषा में वो शब्द भी जुड़ जाते हैं जिसे लिखा नहीं जा सकता,समझा जा सकता है।अब कांग्रेस नेता का भतीजा मेढा का रेत खदान चला लिया।लाखों करोड़ो पीट लिया।माईनिंग वाले भी लाल,प्रशासन भी लाल।खदान भी बंद हो गया।अब किस बात का मलाल।अब मामले में भाजपाईयों को रेत पर राजनीति की रोटी का वो टुकड़ा मिल गया जो पखवाड़े भर तक तमाम लोगों के खाने के बाद छूट गया था।भाजपाईयों और कांग्रेसियों की रेत की यही राजनीति मेढा खदान के शुरू होते ही तुल पकड ली होती तो आज सिंगारपुर पंचायत में लाखों रूपए की रायल्टी जमा हो गई होती और माईनिंग विभाग में लाखों का राजस्व भी जमा हो गया होता पर ऐसा कहां,सबने गर्म तवा में रोटी सेंक ली और क्षेत्रीय विधायक को निशाने पर ला खड़ा कर दिए।

पोकलैंड किसकी थी, कौन लिया लोडिग़ चार्ज?

जैसा कि-खबरें यह देखी और पढी जा रही है कि-विधायक दलेश्वर ने कहा था खदान चलाने।तो क्या विधायक दलेश्वर बिना रायल्टी पर्ची के खदान चलाने के लिए कहे रहे होंगे?रेत पर ये कैसी राजनीति कि-शिकायत कर्ताओं के पास मेढा रेत खदान में पखवाड़े भर से अधिक समय तक रहे पोकलैंड मशीन का न तो नंबर है और न उसके ड्राईवर कंडक्टर का नाम और न ही पोकलैंड मशीन के मालिक का नाम?न ही लोडिग़ चार्ज के नाम पर रूपए वसूलने वालों का नाम और न ही वहां गाडिय़ों की निकासी करवाने वालों के नाम।बस उनके पास एक ही नाम है विधायक दलेश्वर साहू।रेत का चोर कोई और,उसका संरक्षक कोई और,सबसे बड़ा चोर तो पंचायत वाले और प्रशासन पर इनका नाम लेने और इन पर कार्रवाई के बजाय रेत पर राजनीति करने वाले गीदड की तर्ज पर चल पड़े हैं।

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