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Road Safety :ट्रैफिक के प्रति जागरूकता फैला रही महिलाएं

Road Safety

मुंबई- हमारे देश में कई जगह ऐसी हैं,जहां कानूनों को धड़ल्ले से तोड़ा जाता है।रात के वक्त हाईवे पर ना तो रेड लाइट देखी जाती है और ना ही पेट्रोलिंग करती हुई पुलिस।कुछ लोग बिना हेलमेट के नशे की हालत में भी वाहन चलाते मिल जाते हैं।ऐसे में पुलिस की मदद के लिए मुंबई की रहने वाली कुछ महिलाएं आगे आई हैं।इनमें से कोई गृहिणि (हाउसवाइफ),कोई वकील तो कोई सामाजिक कार्यकर्ता है।

इन्हीं महिलाओं में से एक हैं भक्ति पटेल (43)।रात के करीब एक बजे उन्हें पुलिस की मदद करते हुए देखा गया।नीली टीशर्ट और सफेद टोपी पहनकर वो ट्रैफिक संभाल रही थीं।वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर उन्होंने पुलिस की मदद करते हुए एक लड़के को पकड़ लिया,जो बिना हेलमेट और लाइसेंस के बाइक चला रहा था।विले पार्ले की रहने वाली पटेल और उनकी छह साथी यहां दुर्घटनाएं कम करने के लिए पूरा सहयोग दे रही हैं।

पटेल की साथी कुसुम सावंत (36) भी ‘पार्ले पुलिस मित्र’ की सदस्य हैं।जो पुलिस की मदद कर रही हैं।उन्होंने एक दंपत्ति को पकड़ा।पुरुष बिना हेलमेट के वाहन चला रहा था।हालांकि उस व्यक्ति ने सावंत के साथ बहस करने की कोशिश की लेकिन सावंत ने बेहद सादगी से उसे हेलमेट पहनने का महत्व बताया।

जानकारी के लिए बता दें विले पार्ले पुलिस ने 2007 में ‘पार्ले पुलिस मित्र’ की शुरुआत की थी,जिसमें क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए नागरिकों को भी शामिल किया जाता है।हालांकि ये प्रोग्राम कुछ समय से धीमा पड़ गया था,लेकिन फरवरी में जब मुंबई पुलिस स्टेशन को ई-चालान वाली मशीने मिलीं तो इसे दोबारा से पुनर्जीवित किया गया।

वेस्टर्न एक्सप्रेसवे पर आज पुलिस का साथ देने के लिए 39 स्वयंसेवक (वालंटियर) हैं।ये सभी अलग-अलग जगह पर पुलिस के साथ काम कर रहे हैं। इन लोगों में 8 महिलाएं हैं।ये लोग रात एक बजे से सुबह पांच बजे तक पेट्रोलिंग करते हैं। ये ना केवल यातायात नियमों को तोड़ने वालों को पकड़ते हैं बल्कि रात के वक्त टैक्सी और ऑटो में सफर कर रही महिलाओं की सुरक्षा भी सुनिश्चित करते हैं।

महिला वालंटियर के बारे में बात करते हुए पुलिस इंस्पेक्टर राजेंद्र काणे का कहना है कि कई बार ऐसा होता है जब ऑटो या फिर टैक्सी ड्राइवर महिलाओं के साथ गलत व्यवहार करते हैं और अगर पुलिस अनके वाहन को रोक ले तो महिला यात्री डर के कारण कुछ नहीं बोलतीं। लेकिन अगर महिला वालंटियर वाहन को रुकवाकर लाइसेंस दिखाने को बोलती हैं तो महिला यात्रियों को बात करने में कोई झिझक नहीं होती।

पुलिस का कहना है कि महिला वालंटियर से काफी मदद मिलती है।बीते कुछ महीनों में इन्होंने 700 ऑटो और टैक्सी को रोकने में मदद की, जिनमें से 400 या तो बिना लाइसेंस या फिर बिना वैध कागजों के चल रहे थे।

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