बार-बार बेइज्जती का आपके आत्मविश्वास पर पड़ता है सीधा असर,हो सकते हैं कई मानसिक समस्याओं का शिकार

कुछ लोगों को हम भले ही अनजाने में कुछ भी कह देते हैं, लेकिन यह छोटी-छोटी बाते उस व्यक्ति को मानसिक रूप से बीमार कर सकती हैं। हमारे आसपास कुछ ऐसे लोग होंगे, जिसमे हम हर बात पर यह देते होंगे, “अरे तेरे से नहीं हो पाएगा, अरे ये तेरे बस की नहीं है, लड़कियां कार चला ही नहीं सकती हैं, तुम्हारा काम बस किचन का है” इस तरह की बातें भले ही आपको आम बात लगें, लेकिन कुछ लोगों को यह इंसल्ट फील करवा देती हैं। जब हमारे साथ ऑफिस, घर या फिर अन्य किसी स्थान पर भेदभाव होता है, तो हम धीरे-धीरे हीन भावना से ग्रस्त हो जाते हैं।

जब हमें आय दिन समाज की रूढ़िवादि सोच, रोजमर्रा के कार्य स्थल और लोगों से ताने सुनने पड़ते हैं, तो हम धीरे-धीरे मानसिक समस्याओं के शिकार हो सकते हैं। इसका प्रभाव हमारी जिंदगी पर धीरे-धीरे पड़ने लगता है। हम तनावग्रस्त होने के साथ-साथ अपने आत्म सम्मान और आत्म विश्वास पर भी संदेह करने लगते हैं।

जब किसी व्यक्ति का यौन, लिंग और जाति की वरीयता के आधार पर समाज के कुछ लोग टीका-टिप्पणी करने लगते हैं, तो उस व्यकति को माइग्रो एगरेशन हो सकता है।इसमें व्यक्ति का स्पष्ट रूप से अपमान नहीं होता,बल्कि कुछ पूर्वाग्रह और छिपी हुई टिप्पणियों से उस व्यक्ति के साछ दुर्वव्यहार किया जाता है। इससे वह व्यक्ति काफी असहज महसूस करता है। जिसकी वहज से व्यक्ति माइक्रो एगरेशन का शिकार हो सकता है।

माइक्रो एगरेशन किस तरह से मानसिक स्वास्थ्य पर डालता है असर?

आत्मविश्वास पर भय – इस समस्या से ग्रसित व्यक्तियों का आत्मविश्वास घटने लगता है। क्योंकि उनके अंदर क्रोध, भय और निराशा जन्म लेने लगती है। क्योंकि उनके यह स्वीकार नहीं होता है कि उनके अपने, सहकर्मी उनका अपमान करे।इससे उनके अंदर धीरे-धीरे आत्मविश्वास कम होता है।इस वजह से वे लोगों से अलगाव बना लेते हैं। कुछ लोग इस स्थिति में शराब का काफी ज्यादा सेवन करने लगते हैं।

काम पर नहीं हो पाता है फोकस – इस तरह के लोगों पर सहकर्मी, परिवार के लोग काफी ज्यादा दबाव डालने लगते हैं। इसके कारण माइक्रो एग्रेसिव से शिकार व्यक्ति अपने काम पर पूरी तरह के फोकस नहीं कर पाता है। इसके कारण उन्हें अपने काम के लिए भी लोगों से अपमानजनक टिप्पणियां सहनी पड़ती हैं।

स्ट्रेस को करता है ट्रिगर – माइक्रो एगरेशन से ग्रसित व्यक्ति को अपने आप पर संदेह महसूस होने लगता है। जिसकी वजह से उनका स्ट्रेस बढ़ता है। लगातार अपमानजनक टिप्पियों के कारण व्यक्ति में नकारात्मक भावना उत्पन्न होने लगती है। इसके कारण उनके अंदर चिंता भी धीरे-धीरे बढ़ने लगती है।

अगर आपके आसपास भी कोई इस तरह का व्यक्ति है, जिसे बात-बात पर लोग इंसल्ट कर देते हैं। तो आपका फर्ज है कि ऐसे व्यक्ति का सपोर्ट करें और उनके काम को सराहें। इससे वे मानसिक रूप से बीमार नहीं होंगे। क्योंकि इस तरह के व्यक्ति को साथ और विश्वास की जरूरत होती है।

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