कोंडागाँव/केशकाल। साहित्यिक मंच के तत्वावधान में नशा की बढ़ती प्रवृत्ति एवं उसके दुष्परिणाम पर ऑनलाइन परिचर्चा ( वेबनार) का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न शहर के प्राध्यापक चिकित्सक तथा साहित्यकार अपने विचार के साथ शामिल हुए। केशकाल से संवेदनशील कवयित्री, शिक्षिका एवं सामाजिक संगठन (AIBS) में जिलाध्यक्ष की भूमिका निभाने वाली रश्मि विपिन अग्निहोत्री भी अपने व्याख्यान “सबक” एक प्रयास नशा मुक्ति की ओर” के साथ शामिल हुई ।

मेरी स्वलिखित कहानी “सबक” हमारे समाज की ही कहानी है। मैंने आज सबसे ज्वलंत समस्या शराब को केंद्रित कर एक संदेश समाज तक प्रेषित करने की कोशिश की हैकि किस तरह हमारे जीवन पर,समाज पर और सम्पूर्ण राष्ट्र पर इसका दुष्परिणाम पड़ता है । आशा करती हूं कि यह कहानी अधिक से अधिक लोग पढ़ेंगे और जरूर समाज को इससे फायदा होगा, महिलाओं में आत्मविश्वास और साहस की वृद्धि होगी ।

रश्मि जी ने कहा ज्वलंत विषयों पर या समसामयिक विषयों पर कलम चलाना मेरा कर्तव्य है , मैं समाज में सबसे पहले जो सबसे बड़ी बुराई है, जिसका प्रभाव पूरे समाज और राष्ट्र पर पड़ता है ऐसी बुराई शराब पर मैंने अपनी कलम चलाई है। नशा निरोधक दिवस पर मेरी यह कहानी “सबक एक प्रयास नशा मुक्ति की ओर” समाज के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी मैं चाहती हूँ कि लोग पढे़ हैं और इसके भाव को समझें गहराई तक जाएं कि किस तरह से शराब जो है वह घरेलू हिंसा को उत्पन्न करती है। इसी के कारण दुनियाभर के व्याभिचार
समाज में होते हैं। चोरी, डकैती, लूटमार, बलात्कार जैसे घिनौने अपराधों को जन्म देने का कारण है शराब, शराब मनुष्य को हैवान बना देती है, दुराचारी बना देती है। समाज के लिए शराब बहुत बड़ा कलंक है। जिससे हमारी सामाजिक व्यवस्था और शांति को जिससे सबसे बड़ा खतरा है ,वह शराब है। वैसे तो नशा कोई भी हो हानिकारक होता है स्वास्थ्य के लिए और समाज के लिए। सरकार को पूर्ण रूप से शराब बंदी करना चाहिए। जिससे देश का भविष्य, और समाज की स्थिति में सुधार हो सके। शराब से सरकार को मोटी रकम राजस्व के रूप में मिलती है लेकिन सरकार यह नहीं सोचती कि समाजवादी व्यवस्था और शांति को वह कितना नुकसान पहुंँचा रही है। सभी मिलकर इसका विरोध करें, शराब से एक व्यक्ति ही नहीं, पूरे परिवार, समाज और राष्ट्र को खतरा होता है। संपूर्ण राष्ट्र इससे प्रभावित होता है। देश का भविष्य खतरे में डालती है सरकार, शराब शारीरिक, मानसिक, नैतिक और आर्थिक रूप से मनुष्य को बर्बाद कर देती है एवं शराब के नशे में मनुष्य दुराचारी बन जाता है।

  • समाज में छात्र-छात्राओं का नशीली चीजों के सेवन की ओर आकर्षित होना चिंतनीय विषय है- डॉक्टर एस के श्रीवास्तव
  • पूरे विश्व में प्रतिवर्ष नशीली आदतों और सेवन से लाखों -हजारों लोग मृत्यु को प्राप्त हो रहे हैं : डॉक्टर जय नारायण पांडेय
  • नशीली चीजों का बहिष्कार एवं दुष्परिणामों पर जागरूकता की आवश्यकता है: श्री ललित मिश्र

मानव कल्याण एवं सामाजिक विकास संगठन द्वारा संचालित  साहित्यिक मंच  के तत्वावधान में १४ जून २०२० को ऑनलाइन गूगल मीट के माध्यम से  सामाजिक दूरियों के साथ ऑनलाइन परिचर्चा नशा की बढ़ती प्रवृत्ति एवं दुष्परिणाम विषय पर परिचर्चा आयोजित किया गया जिसमें छत्तीसगढ के कई महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों के प्राध्यापक, साहित्यकार, रचनाकार एवं बौद्धिक चिंतक ऑनलाइन व्याख्यान के रूप में अपनी सहभागिता प्रदान किए

यह आयोजन डॉ एस के श्रीवास्तव विभागाध्यक्ष भौतिक शास्त्र विभाग,  डॉक्टर जय नारायण पांडेय अर्थशास्त्र विभाग  राजीव गांधी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय अंबिकापुर एवं श्री ललित मिश्र, संगठन संरक्षक एवं सर्व ब्राह्मण समाज के मुख्य आतिथ्य के साथ छत्तीसगढ़ के जाने-माने फिल्म अभिनेता आदरणीय सुनील दत्त मिश्र जी की अध्यक्षता में संपन्न हुई। इस आयोजन में डॉक्टर सविता मिश्रा विभागाध्यक्ष हिंदी विभाग, शासकीय कन्या महाविद्यालय रायपुर, श्री दिग्विजय सिंह तोमर जी वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार, प्राे. डॉक्टर प्यारेलाल आदिले, श्री चंद्र भूषण मिश्र प्रदेश अध्यक्ष उपभोक्ता अधिकार संगठन, श्री संतोष दास जी संरक्षक साहित्यिक मंच, डॉक्टर तरूण दीवान जी शासकीय विज्ञान महाविद्यालय बिलासपुर डाँ. प्रीति पांडेय, मनोचिकित्सक वाराणसी के विशिष्ट आतिथ्य में संपन्न हुआ।

आयोजन का सफल संचालन संगठन के संस्थापक अध्यक्ष उमेश कुमार पांडेय जी के द्वारा किया गया इस आयोजन की मुख्य संयोजक आदरणीया श्रीमती आशा उमेश पांडे जी प्रदेश अध्यक्ष साहित्य एवं संस्कृति उत्थान मंच थी। कार्यक्रम का प्रारंभ साहित्यिक मंच की सरगुजा जिला अध्यक्ष आदरणीय श्रीमती अर्चना पाठक जी के द्वारा मां सरस्वती की पूजा अर्चना एवं श्रीमती आशा उमेश पान्डेय के द्वारा अतिथियों के सम्मान में स्वागत भाषण के फल स्वरुप किया गया। 

संबोधन के क्रम में सर्वप्रथम डाँ. एस. के. श्रीवास्तव जी के द्वारा यह कहाँ गया कि छत्तीसगढ़ में ही नहीं बल्कि संपूर्ण भारत में सभी वर्गों के लोगों के बीच नशा की बढ़ती प्रवृत्ति के कारण सामाजिक, नैतिक आैर चारित्रिक मूल्यों का गिरना चिन्ता का विषय है। डॉक्टर जय नारायण पान्डेय जी के द्वारा अपने व्याख्यान में यह कहाँ गया कि नशे का सेवन प्राचीन काल से ही होता आ रहा है और इसके दो पहलू हैं कुछ तो सकारात्मक है और कुछ नकारात्मक है यदि वर्तमान परिपेक्ष में देखा जाए तो किस प्रकार लोग नशे का उपयोग करने के आदि हो चुके हैं वह निश्चय ही हम सभी को सोचने पर विवश कर देता है विभिन्न प्रकार की नशीली चीजों के सेवन से प्रतिवर्ष हजारों लाखों लोग मृत्यु को प्राप्त हो रहे हैं।

इस आयोजन में मुख्य वक्ता डाँ. प्रीति पान्डेय मनोचिकित्सक वाराणसी के द्वारा यह बताया गया कि मनुष्य एक विवेकशील प्राणी है और सभी नशीली वस्तुओं व सामग्री में यह लिखा गया होता है की यह हानिकारक है फिर भी हम इसका सेवन करते हैं यह एक चिंता का विषय है। नशा केवल नशीली वस्तुओं का ही नहीं होता बल्कि नशा किसी विशेष वस्तु को पाने का भी हो सकता है,  हम कई रूपों में नशे की व्याख्या कर सकते हैं यह हानिकारक ही जिससे हम परिवार से ,पढ़ाई से दूर कर दें और हमारे व्यवहार में परिवर्तन ला दे जो कि समाज हित न हाे ।

श्री ललित मिश्रा जी के द्वारा अपने व्याख्यान में इस प्रकार के आयोजन की सराहना की गई साथ ही यह भी कहा गया कि नशा की प्रवृत्ति निश्चय ही वर्तमान यमय में बढ़ती जा रही है और जब व्यक्ति इसे नहीं प्राप्त कर पाता या फिर जब ज्यादा प्राप्त कर लेता है दोनों ही स्थितियाँ इस समाज के लिए हानिकारक होती हैं और इन्हीं स्थितियों में ज्यादा से ज्यादा घटनाएं अमर्यादित व अनैतिक होती जा रही है।

डॉक्टर प्यारेलाल आदिले जी के द्वारा अपने व्याख्यान में यह कहाँ गया कि हमें ऐसी व्यवस्थाएं रखनी चाहिए जो की जन कल्याणकारी हो और इस प्रकार व्यवसायिक उपयोग के माध्यम से लाभ कमाना कभी भी समाज के हित में नहीं हो सकता हम सभी को सदैव ही ऐसे कार्यों और गतिविधियों का संचालन करना चाहिए जिससे समाज का कल्याण हो । नशा का सेवन व उसकी अत्यधिक मात्रा का लेना कभी भी कल्याणकारी नहीं हो सकता

श्री चंद्र भूषण मिश्र जी के द्वारा अपने व्याख्यान में यह कहा गया कि नशा समाज को खोखला करती जा रही है और लोग बहुत सरलता पूर्वक आकर्षित करती हैं क्योंकि इसे प्राप्त करने में जो सहजता और सरलता वर्तमान सम़य में दिया जान , कदापि ही उचित नहीं है।

इस आयोजन के अध्यक्ष श्री सुनील दत्त मिश्र जी के द्वारा यह कहा गया कि नशे की प्रवृति का उसके दुष्प्रभाव के संबंध में आयोजित यह कार्यक्रम बहुत ही सराहनीय रहा है और विभिन्न वर्गों के लोगों के द्वारा अलग-अलग विषय वस्तु के आधार पर नशा की बढ़ती प्रवृत्ति को उसके दुष्परिणामों को प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है जाे निश्चित रूप से वर्तमान समय में इस बढ़ती प्रवृत्ति व उसके दुष्प्रभाव को रोकने का प्रयास किया जाना होगा और इस हेतु हम सभी को मिल जुलकर प्रयास जागरूकता के आधार पर दुष्परिणामों की जानकारी देना हाेगा ।

इसी अनुक्रम में आमंत्रित सभी आलेखों को प्रस्तुत किया गया। प्रस्तुत सभी आलेखों का संकलन पत्रिका के माध्यम नशे की प्रवृत्ति नामक पत्रिका में संकलित करने का प्रयास है जिसे आगामी सत्र में शासन प्रशासन के दिशा निर्देश के अनुरूप विभिन्न स्कूलों सामाजिक संस्थाओं में जागरूकता के उद्देश्य प्रेषित किया जाएगा। इस आयोजन की जानकारी सरगुजा सांसद एवं कैबिनेट मंत्री आदरणीय श्रीमती रेणुका सिंह जी एवं अंबिकापुर के विधायक एवं स्वास्थ्य मंत्री महाराजा साहब आदरणीय टी. एस.सिह देव जी को उचित माध्यमाें से प्रेषित किया गया है। उपरोक्त अनुसार आयोजन में प्राध्यापकों , सामाजिक सेवकाें  एवं साहित्यकारों के द्वारा नशा की बढ़ती प्रवृत्ति के संबंध मे आलेखाें कीे  व्याख्यान के माध्यम से प्रस्तुत किए गए जिनमें ज्ञानी दास मानिकपुरी, रश्मि लता मिश्रा जी, डाँ। प्यारेलाल आदिले, रश्मि विपिन अग्निहोत्री, सुश्री नलिनी बाजपेयी, संतोष दास सरल ,सावित्र मिश्रा, मन्शा शुक्ला, अर्चना पाठक, संतोष श्रीवास्तव, सुशीला साहू “विद्या”, अनिता झा, मिनी पान्डेय, महेन्द्र देवांगन “माटी” पंडरिया छत्तीसगढ़, रौशनी दीक्षित जी, मयंक मणि दुबे, पूनम दुबे वीणा, कृष्णशरण पटेल “कृष्णा”, अनिता मंदिलवार जी(व्याख्याता), धनेश्वरी सोनी गुल बिलासपुर, कुंज बिहारी सिंह के साथ श्री मुकुंद लाल साहू जी के द्वार प्रस्तुति दी गई।

अंत में कार्यक्रम कि आयोजिका श्रीमती आशा उमेश पांडेय जी ने आमंत्रित सभी अतिथियों व संगठन के पदाधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए यह कहा कि, सभी आलेख समाज को जागृत करने व प्रेरणादायी होने के साथ-साथ हम सभी को इस बुराई से दूर रहने का संदेश देते हैं।हमें हर संभव इस हेतु प्रयास करते रहना चाहिए ।

MyNews36 प्रतिनिधि राजीव गुप्ता की रिपोर्ट

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