3 से 10 मार्च तक प्रदेश के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व जिला अस्पतालों में निःशुल्क जाँच व उपचार शिविर

कान संबंधित रोग की जांच व उपचार हेतु शासकीय अस्पतालों में दी जा रही है निःशुल्क सुविधाएं

राष्ट्रीय बधिरता रोकथाम एवं नियंत्रण कार्यक्रम अंतर्गत 03 मार्च 2022 को “विश्व कर्ण देखभाल दिवस“ के रूप में प्रदेश के सभी शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं में मनाया जा रहा है। 03 मार्च से 10 मार्च तक कर्ण देखभाल सप्ताह भी अभियान के रूप में राज्य में मनाया जा रहा है। प्रतिवर्ष की भांति विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा इस वर्ष ष्ज्व ीमंत वित सपमिए सपेजमद ूपजी बंतमष् थीम पर पूरे प्रदेश में अभियान का आयोजन किया जावेगा। जिसमें कान के रोग के बचाव एवं उपचार/देखभाल की जानकारी हेतु आमजन मानस को जागरूक करने हेतु अलग-अलग कार्यक्रम व जांच शिविर भी शासकीय संस्थाओं में निःशुल्क आयोजित किए जा रहे हैं।

अपने कान की देखभाल कैसे करें-

नहाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि कान में पानी न जाए, कान में मैल और गंदगी की परत न जमने दें एवं कान की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। कान में खुजली होने पर किसी नुकीली वस्तु, तेल या अन्य कोई तरल पदार्थ न डालें, गंदी और संक्रमण फैलाने वाली कोई भी चीज से कान की सफाई न करें। कान के दर्द को बिल्कुल नजर-अंदाज न करें। आजकल मोबाइल फोन का इस्तेमाल जितना तेजी से बढ़ा है ,उसका बुरा असर भी कानों पर पड़ता दिख रहा है। ईयर प्लग से मोबाइल में ज्यादा तेज म्यूजिक सुनने या फोन पर लंबी बात करने से बचें। फोन को गर्दन और कानों के बीच दबा कर सुनने की आदत भी परेशानी खड़ी कर सकती है। इससे बचें। यदि घर का कोई सदस्य तेज आवाज में टीवी देखता है और आपके बार-बार पुकारने पर भी नहीं सुनता तो इसे नजर अंदाज न करें। गले व शरीर की एलर्जी की वजह से भी कान के पर्दे के पीछे पानी जमा हो सकता है, इससे पीड़ित को कम सुनाई देने के साथ-साथ कान में दर्द की शिकायत भी रहती है। यही आगे जाकर कान में मवाद और संक्रमण का कारण बन जाती है ।अतरू एलर्जी होने पर तुरंत किसी ईएनटी सर्जन से ही जांच करवाएं। कान संबंधी किसी भी समस्या का उपचार तुरंत अपने नजदीकी शासकीय स्वास्थ्य केंद्र जाकर या चिकित्सक से करवाएं।

राष्ट्रीय बधिरता रोकथाम एवं नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल डॉ. आनंद राव के बताया कि कार्यक्रम अन्तर्गत वर्ष 2021-22 माह जनवरी तक प्रदेश के शासकीय चिकित्सालयों में कान से संबंधित 1 लाख 11हजार 886 रोगियों की जांच की गयी है, जिसमें से 10 हजार 110 बधिर रोग से ग्रसित पाए गए। इन रोगियों में 2 हजार 268 रोगियों की माईनर सर्जरी तथा 111 रोगियों की मेजर सर्जरी की गई। 1334 लोगों को हियरिंग ऐड तथा 1785 लोगों को स्पीच थैरपी भी दी गई है। उन्होंने बताया कि कान से संबंधी किसी भी प्रकार की समस्या को हल्के में न लेवें एवं इससे संबंधित कोई भी जाँच आप अपने निकटतम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, जिला अस्पताल या शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में जाकर करवा सकते हैं।

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