बिलासपुर MyNews36- जब कोई भी नागरिक शासकीय कर्मचारी बनता है तो अपनी पदस्थापना के निश्चित समय के बाद जैसा कि सेवा भर्ती नियम में प्रावधान होता है निर्धारित योग्यता के साथ पदोन्नति पाने का हकदार होता है फिर वह चतुर्थ श्रेणी हो या फिर फर्स्ट क्लास आईएएस,आईपीएस और अगर शासन के पास पदोन्नति के लिए पद कि उपलब्धता नहीं है तो कर्मचारी को पदोन्नति विरूद्ध उच्चतर वेतनमान देने का संवैधानिक दायित्व सरकार का होता है यह कहना है छ.ग सहायक शिक्षक के संस्थापक सदस्य संयोजक शिव सारथी का….

सारथी का कहना है कि- जब हम शिक्षकों का राज्य सरकार ने भर्ती किया तो अपने भर्ती व पदोन्नति नियम में स्पष्ट प्रावधान किया था कि 7 साल की सेवा अवधि उपरांत पदोन्नति दिया जाएगा। खासकर सहायक शिक्षक और शिक्षक पंचायत को पर चूंकि छ.ग प्रदेश में शिक्षक पंचायत संवर्ग की भारी भरकम संख्या है। खासकर प्राथमिक स्कूल के शिक्षकों का हम सहायक शिक्षकों को 7 वर्ष की सेवा अवधि उपरांत अनिवार्य पदोन्नति देना सम्भव नहीं था इसलिए राज्य शासन द्वारा 10 वर्ष की सेवा के बाद क्रमोन्नति उसके बाद समयमान के रूप में उच्चतर वेतनमान का लाभ दिया गया जिसके तहत राज्य के सहायक शिक्षकों को 3800-100-5800 पदोन्नति के स्थान पर दिनांक 02/11/2011 के आदेशानुसार मिडिल स्कूल शिक्षक का वेतनमान क्रमोन्नति 4500-125-7000 और दिनाँक 01/05/2012 के आदेशानुसार समयमान का 5000-150-20000 +2500 अध्यापन भट्ट का वेतनमान दिया गया था।

इसके बावजूद नियमित शिक्षक के समतुल्य वेतनमान के नाम पर 17/05/2013 को वेतन पुनरीक्षण करके समयमान वेतनमान को नकार कर पदानांकित पद सहायक शिक्षक का प्रारम्भिक वेतनमान दे दिया गया जो सरकार और उससे जुड़े प्रशासनिक अधिकारियों का सरासर गलत निर्णय था और अगर यह गलत निर्णय ले भी लिया गया तो संविलियन उपरांत पूर्व सेवा अवधि की गणना करते हुए प्रथम नियुक्ति तिथि से प्रथम 10 में प्रथम क्रमोन्नति/समयमान जैसे प्रवधानित है और 20 वर्ष की सेवा अवधि में द्वितीय क्रमोन्नति/समयमान वेतनमान का लाभ दिया जाना था जैसा कि अन्य शासकीय कर्मचारियों के लिए लागू है,पर शासन ने जान बूझकर हम शिक्षकों को उलझाने और हमारा आर्थिक शोषण करने के लिए एक तरफ पंचायत विभाग का समयमान वेतनमान को अघोषित रूप से बन्द के दिया तो दूसरी तरफ संविलियन का लालीपाप दे दिया और बड़ी चालाकी से हमारे सारे सेवाकाल को शून्य घोषित करते हुए 1 जुलाई 2018 से सेवा लाभ का उल्लेख कर दिया जबकि वही शिक्षाकर्मी के जन्मदाता मातृत्व राज्य मध्यप्रदेश में बकायदा पदोन्नति व क्रमोन्नति का आगामी लाभ देने के लिए पंचायत विभाग के पूरे सेवाकाल का गणना किया गया और प्रथम व द्वितीय क्रमोन्नत वेतनमान दिया गया पर हमारे प्रदेश में मात्र संविलियन कि आपचारिक्ता निभाकर हाथ सेक लिया और हम शिक्षक हर महीने के 1 तारीख को मात्र पगार पा कर मस्त हो गए।

जबकि सच्चाई यह है कि क्रमोन्नति/समयमान,उच्चतर वेतनमान एक निरंतर मिलने वाला सेवा लाभ है जिसे भी हम लोग एक मांग का मुद्दा बना बैठे है।

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