पीएम मोदी को आज पहले ‘लता दीनानाथ मंगेशकर पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। पीएम मोदी मुंबई में होने वाले इस समारोह में पहुंच गये हैं। पीएम मोदी को राष्ट्र के लिए किये गये योगदान के लिए ये सम्मान दिया गया। भारत रत्न स्वर्गीय लता मंगेशकर और उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर के सम्मान और समृति में मंगेशकर परिवार लता दीनानाथ मंगेशकर पुरस्कार शुरू कर रहा है। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता उषा मंगेशकर करेंगी और उनके हाथों से ही पुरस्कार विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा। ये अवार्ड हर वर्ष 24 अप्रैल को मास्टर दीनानाथ मंगेशकर की पुण्यतिथि पर देश की ऐसी महान हस्ती को दिया जाएगा जिन्होंने देश और समाज की निस्वार्थ सेवा के लिए अपना पूरा जीवन दिया हो। इस कैटेगरी में पहला सम्मान पीएम मोदी को दिया जा रहा है।

पीएम के संबोधन की अहम बातें

  • जो अव्यक्त को व्यक्त कर दे- वो शब्द है। जो व्यक्त में ऊर्जा का, चेतना का संचार कर दे- वो नाद है। और जो चेतन में भाव और भावना भर दे, उसे सृष्टि और संवेदना की पराकाष्ठा तक पहुंचा दे- वो संगीत है।
  • मैं संगीत जैसे गहन विषय का जानकार तो नहीं हूँ, लेकिन सांस्कृतिक बोध से मैं ये महसूस करता हूँ कि संगीत एक साधना भी है, और भावना भी।
  • संगीत से आपमें वीररस भरता है। संगीत मातृत्व और ममता की अनुभूति करवा सकता है। संगीत आपको राष्ट्रभक्ति और कर्तव्यबोध के शिखर पर पहुंचा सकता है। हम सब सौभाग्यशाली हैं कि हमने संगीत की इस सामर्थ्य को, इस शक्ति को लता दीदी के रूप में साक्षात देखा है।
  • मेरे लिए लता दीदी सुर साम्राज्ञी के साथ साथ मेरी बड़ी बहन भी थीं। पीढ़ियों को प्रेम और भावना का उपहार देने वाली लता दीदी से अपनी बहन जैसा प्रेम मिला हो, इससे बड़ा सौभाग्य और क्या होगा।
  • पुरस्कार जब लता दीदी जैसी बड़ी बहन के नाम से हो, तो मेरे लिए उनके अपनत्व और प्यार का ही एक प्रतीक है। इसलिए, मना करना मेरे लिए मुमकिन ही नहीं है। मैं इस पुरस्कार को सभी देशवासियों के लिए समर्पित करता हूँ।
  • लता जी ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की मधुर प्रस्तुति की तरह थीं। आप देखिए, उन्होंने देश की 30 से ज्यादा भाषाओं में हजारों गीत गाये। हिन्दी हो मराठी, संस्कृत हो या दूसरी भारतीय भाषाएँ, लताजी का स्वर वैसा ही हर भाषा में घुला हुआ है।
  • संगीत के साथ साथ राष्ट्रभक्ति की जो चेतना लता दीदी के भीतर थी, उसका स्रोत उनके पिताजी ही थे। आज़ादी की लड़ाई के दौरान शिमला में ब्रिटिश वायसराय के कार्यक्रम में दीनानाथ जी ने वीर सावरकर का लिखा गीत गाया था।
  • संस्कृति से लेकर आस्था तक, पूरब से लेकर पश्चिम तक, उत्तर से दक्षिण तक, लता जी के सुरों के पूरे देश को एक सूत्र में पिरोने का काम किया। दुनिया में भी, वो हमारे भारत की सांस्कृतिक राजदूत थीं।

लता दीनानाथ मंगेशकर पुरस्कार की शुरुआत

मास्टर दीनानाथ मंगेशकर स्मृति प्रतिष्ठान चैरिटेबल ट्रस्ट ने कहा है कि हमने इस साल से लता मंगेशकर के सम्मान में इस अवॉर्ड की शुरुआत की है। बयान में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले वो शख्स हैं जिसे इस खास अवॉर्ड से नवाजा जाएगा। इस पुरस्कार का उदेश्य उन लोगों को सम्मानित करना है जिन्होंने ड्रामा, संगीत, आर्ट, मेडिकल और समाज में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। परिवार ने इस बात पर भी जोर दिया कि पीएम मोदी हमेशा से ही लता मंगेशकर को अपनी बड़ी बहन की तरह देखते थे।

बता दें कि लता मंगेशकर के निधन के बाद उनकी याद में ये पुरस्कार शुरू किया गया है। इसमें कुल 5 केटैगरी में अवार्ड दिये जाएंगे। अनुभवी अभिनेत्री आशा पारेख और जैकी श्रॉफ को “सिनेमा के क्षेत्र में समर्पित सेवाओं” के लिए मास्टर दीनानाथ पुरस्कार (विशेष सम्मान) प्राप्त होगा। वहीं राहुल देशपांडे को भारतीय संगीत के लिए मास्टर दीनानाथ पुरस्कार मिलेगा, जबकि सर्वश्रेष्ठ नाटक का पुरस्कार “संजय छाया” नाटक को दिया जाएगा। इनके अलावा मास्टर दीनानाथ पुरस्कार (आनंदमयी पुरस्कार) नूतन मुंबई टिफिन बॉक्स सप्लायर चैरिटी ट्रस्ट को “समाज सेवा के क्षेत्र में समर्पित सेवाओं” के लिए दिया जाएगा।

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