प्रधानमंत्री मोदी ने आवाहन किया कि विद्यार्थी स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान देने के लिए नवीन और अभिनव समाधान खोजें

नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विद्यार्थियों का आह्वान किया है कि वे स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बनाने के लिए नये और नवीनतम समाधान विकसित करें। ओड़िसा में आई आई एम संबलपुर में विद्यार्थियों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय प्रबंधन संस्थान आत्मनिर्भर भारत के लिए स्थानीय उत्पादों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बीच सेतू का काम कर सकते हैं।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश के भीतर और बाहर आई आई एम संस्थानों के प्रतिभाशाली विद्यार्थी “ब्रैंड इंडिया” के वैश्वीकरण का लक्ष्य हासिल करने में मदद कर सकते हैं।

आईआईएम संबलपुर का ध्‍येय मंत्र है नवसृजन्‍म, सुचिता, समावेशतवम यानि इनोवेशन, इंटिग्रिटी और इन्‍क्‍लूजिवनेस। आपको इस मंत्र की ताकत के साथ देश को अपनी मैनेजमेंट स्‍किल दिखानी है। आपको नए निर्माण को प्रोत्‍साहित करना ही है, सभी के समावेश पर भी जोर देना है। जो विकास की दौड़ में पीछे छूट गया है, उसे भी साथ लेना है। प्रधानमंत्री ने कहा है कि आज के स्‍टार्टअप्‍स ही कल की बहुराष्‍ट्रीय कंपनियां हैं।

बीते दशकों में एक ट्रेंड देश ने देखा। बाहर बने मल्‍टीनेशनल्‍स बड़ी संख्‍या में आए और इसी धरती पर आगे भी बढे। ये दशक और ये सदी भारत में नए-नए मल्‍टीनेशल्‍स के निर्माण का, भारत का सामर्थ्‍य दुनिया में छा जाए इसके लिए ये उत्‍तम कालखंड आया है। आज के स्‍टार्टअप ही कल के मल्‍टीनेशनल्‍स है। श्री मोदी ने कहा है कि हमें बदलते वक्‍त के अनुसार न केवल उसके साथ बल्कि उससे भी तेज गति से चलना होगा।

हमारी कोशिश है कि हम ना सिर्फ समय के साथ चलें बल्कि समय के पहले चलने की भी कोशिश करें। जैसे काम के तरीके बदल रहे हैं, वैसे ही मैनेजमेंट स्‍किल की डिमांड भी बदल रही है। अब टॉप डाउन या टॉप हैवी मैनेजमेंट की बजाए कोलोब्रेटिव, इनोवेटिव और ट्रासफोरमेर्टिव मैनेजमेंट का समय है। ये कोलोब्रेशन छात्रों के साथ जरूरी है ही वकर्स फॉर एलगोरिदम भी अब इन मैंबर्स के रूप में आपके साथ है। इसलिए आज जितना ह्युमन मैनेजमेंट जरूरी है। उतना ही टेक्‍नोलॉजीकल मैनेजमेंट भी आवश्‍यक है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने कोविड संकट के दौरान चुनौती को अवसर में बदलते हुए विभिन्‍न क्षेत्रों में उल्‍लेखनीय कार्य किए हैं।

कोविड संकट के बावजूद भारत ने पिछले सालों की तुलना में ज्‍यादा यूनीकोर्न दिए हैं। आज खेती से लेकर स्‍पेस सेक्‍टर तक जो अभूतपूर्व रिफॉर्मस किए जा रहे हैं, उनमें स्‍टार्टअप के लिए स्‍कोप लगातार बढ़ रहा है। आपको इन नई संभावनाओं के लिए खुद को तैयार करना है। आपको अपने कैरियर को भारत की आशाओं और आकांक्षाओं के साथ जोडना है। इस नए दशक में ब्रांड इंडिया को नई ग्‍लोबल पहचान दिलाने की जिम्‍मेदारी हम सब पर है, विशेष रूप से हमारे नौजवानों पर है।

मोदी ने कहा कि स्‍थानीय उत्‍पादों को अंतर्राष्‍ट्रीय पहचान दिलाने और भारत को आत्‍मनिर्भर बनाने के लिए प्रबंधन क्षेत्र से जुड़े लोगों को अग्रणी भूमिका निभानी होगी।

लोकल को ग्‍लोबल बनाने के लिए आप सभी आईआईएम के युवा साथियों को नए और इनोवेटिव समाधान तलाशने हैं। मुझे विश्‍वास है हमारे आईआईएम्स आत्‍मनिर्भरता के देश के मिशन में स्‍थानीय उत्‍पादों और अंतर्राष्‍ट्रीय कोलोब्रेशन के बीच ब्रिज का काम कर सकते हैं। साल 2014 तक हमारे यहां 13 आईआईएम थे। अब देश में 20 आईआईएम है। इतना बड़ा टेलेंट पूल आत्‍मनिर्भर भारत अभियान को बहुत विस्‍तार दे सकता है। आज दुनिया में अपॉर्च्‍यूनिटी भी नई है और मैनेजमेंट की दुनिया के सामने चैलेंजिस भी नए है। प्रधानमंत्री ने कहा कि संबलपुर का आईआईएम परिसर ओडिसा को प्रबंधन के क्षेत्र में नई पहचान दिलायेगा।

आईआईएम कैंपस के शिलान्‍यास के साथ ही ओडिशा के युवा सामर्थ्‍य को मजबूती देने वाली एक नवीन शिला भी रखी गई। आईआईएम संबलपुर का परमानेंट कैंपस ओडिशा की महान संस्‍कृति और संसाधनों की पहचान के साथ ओडिशा को मैनेजमेंट को दुनिया में नई पहचान दिलाने वाला है। श्री मोदी ने राज्‍य में पर्यटन और स्‍थानीय संस्‍कृति तथा उत्‍पादों को प्रोत्‍साहन देने के लिए विद्यार्थियों से आगे आने की अपील की।

इस एरिया के टूरिज्‍म पोटेंशनल को और बढ़ाने के लिए यहां के स्‍टूडेंटस के आइडियास और मैनेजमेंट स्‍किल बहुत काम आ सकती है। ऐसे ही संबलपुरी टेक्‍सटाइल भी देश-विदेश में मशहूर है। बांदा एकड फैब्रिक उसका यूनिक पैटर्न डिजाइन और टैक्‍सचर बहुत ही खास है। इसी तरह इस क्षेत्र में हैंडीक्राफ्ट का इतना काम होता है। सिलवर फिलीग्री, पत्‍थरों पर नक्‍कासी, लकड़ी का काम, ब्रास का काम। हमारी आदिवासी भाई-बहन भी इसमें बहुत पारंगत है। आईआईएम के छात्र-छात्राओं के लिए संबलपुर के लोकल को वोकल बनाना उनका एक अहम दायित्‍व है।

ओडिसा सरकार ने प्रस्‍तावित परिसर के लिए 200 एकड़ भूमि उपलब्‍ध कराई है ज‍बकि केन्‍द्रीय शिक्षा मंत्रालय ने परियोजना के लिए प्रशासनिक सहयोग और 400 करोड़ रुपये से अधिक का अनुदान स्‍वीकृत किया है।

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