कोरोना संकट के समय सामने आया पुलिस परिवार, शुरू किया प्लाज्मा दान

रायपुर – कोरोना महामारी के दूसरे दौर के संकट से उबरने के लिए एक बार फिर से पुलिस परिवार सामने आया है। हेड कांस्टेबल परमानंद सिंह और उनके परिवार के लोगों ने एक अनोखी पहल शुरू की है। कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए प्लाज्मा की जरूरत को ध्यान में रखकर प्लाज्मा डोनेट कराने के साथ ही जरूरत का सामान भी यह परिवार उपलब्ध करा रहा है। अब तक 15 से अधिक लोगों को प्लाज्मा और 30 से अधिक मरीजों को खून की आवश्यकता होने पर पुलिस परिवार ने खुद ही सामने आकर मरीजों को उपलब्ध कराया है।

कोरोना के बढ़ते कहर को रोकने प्रशासन ने लॉकडाउन लगाया है, ऐसे में अपने घर-परिवार की परवाह किए बिना रायपुर पुलिस के जवान लाकडाउन का सख्ती से पालन कराने सड़कों पर दिन-रात ड्यूटी कर रहे हैं। ड्यूटी के अलावा पुलिस परिवार के हेड कांस्टेबल परमानंद सिंह, हाल में ही रिटायर्ड उनके बड़े भाई निरीक्षक पारसनाथ सिंह, बेटा परवीर सिंह, भतीजा राहुल सिंह (आरक्षक) आदि सदस्य कोरोना संक्रमित मरीजों को प्लाज्मा और खून डोनेट कराने के साथ ही जरूरतमंदों को आर्थिक मदद भी पहुंचा रहे हैं।

कोरोना से जंग जीतकर सेवा में जुटा परिवार

पिछले साल लाकडाफन के दौरान परमानंद की प्रेरणा से उनके बेटे परमवीर सिंह, रणवीर सिंह ने पुलिस परिवार से जुड़े युवाओं का समूह बनाकर जरूरतमंद, गरीबों को रोज घर से पका हुआ भोजन के पैकेट बनाकर बांटने के साथ ही आर्थिक मदद भी पहुंचाई थी।इस दौरान पूरा परिवार कोरोना संक्रमित भी हुआ लेकिन कोरोना को हराकर वापस लौटने के बाद उसी उर्जा और उत्साह से दोबारा सेवा कार्य जुट गया। यह परिवार इंटरनेट मीडिया और अपने अन्य दोस्तों के जरिए जरूरतमंदों तक खुद पहुंच रहा है।

मदद को रोज आ रहे कॉल… आधी रात महिला को पहुंचाया अस्पताल

आज के इस दौर में जहां लोग अपनों की मदद करने से मुंह मोड़ लेते है, ऐसे में पुलिस परिवार का दूसरों व अनजान लोगों को मदद करना समाज को अपनत्व का सीख भी दे रहा है।परमानंद सिंह ने बताया कि रोज उनके पास प्लाज्मा, खून और अस्पताल में बेड दिलाने आदि के लिए काल आते है। परिचितों, शुभचिंतकों के जरिए हरसंभव कोशिश रहती है सभी की मदद की जाए।

शुक्रवार रात को ही फाफाडीह निवासी 65 वर्षीय तारा ओझा अचानक बेहोश होकर गिर पड़ी थी। इससे उनका परिवार दहशत में आ गया। बेटा अनूप ने मां के इलाज के लिए शहर के कई अस्पतालों के चक्कर काटे लेकिन हर जगह पर वेंटिलेटर,बेड न होने से भर्ती करने मना कर दिया गया था।

इसकी जानकारी मिलने पर परमानंद ने पत्रकार व समाजसेवी साथियों की सहायता से आधी रात को एक निजी अस्पताल में गंभीर हालत में मरीज को भर्ती करवाया। डॉ. रहमान ने मरीज की देखरेख की, जिससे हालत में सुधार हुआ और नया जीवन मिला।

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