रायपुर – बीमा पालिसी कैंसिल होने का झांसा देकर देशभर में करोड़ों रुपये की ठगी करने के बिहार के तीन आरोपितों को रायपुर पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपितों ने शांति विहार डंगनिया निवासी सेवानिवृत प्राचार्य को अपना शिकार बनाकर 39 लाख 13 हजार 364 रुपये की ठगी की थी। आरोपित आयुष कुमार सिंह और मंटू कुमार सिंह को दिल्ली से गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमांड पर रायपुर लाया गया है। एक आरोपित गोविंद अभी फरार है, जिसकी पतासाजी की जा रही है। आरोपितों के पास से आधार कार्ड, पैन कार्ड, लगभग 20 अलग-अलग बैंकों के एटीएम कार्ड, चेक बुक, बैंक पासबुक, सील-मुहर और दो मोबाइल जब्त किए गए हैं।

मामले का राजफाश करते हुए एडिशनल एसपी तारकेश्वर पटेल ने बताया कि ठगी के मामले में सेवानिवृत प्राचार्य उदय रावले ने 18 दिसंबर, 2021 को डीडी नगर थाने में एफआइआर दर्ज कराई थी। रावले के मोबाइल नंबर पर काल करके ठगों ने कहा था कि एलआइसी और एचडीएफसी की पालिसी कैंसिल होकर लोकपाल में आई है। इसके बाद फाइल चार्ज, सिक्यूरिटी टैक्स सहित अन्य के नाम से लगातार अलग-अलग खातों में 39 लाख 13 हजार 364 रुपये जमा कराकर धोखाधड़ी की गई। रिपोर्ट के बाद थाना और साइबर सेल की टीम जांच में जुट गई।

इस दौरान दो अलग-अलग टीम को दिल्ली और मधुबनी बिहार रवाना किया गया। आरोपित आयुष कुमार सिंह और मंटू कुमार सिंह को दिल्ली से गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमांड पर रायपुर लाया गया है। राघवेंद्र कुमार सिंह को मधुबनी (बिहार) से गिरफ्तार किया गया। आयुष कुमार सिंह ग्राम जोगियारा-दरभंगा (बिहार) व मंटू कुमार सिंह ग्राम सिसवारा पोस्ट लोमा -मुजफ्फरपुर (बिहार) के रहने वाले हैं। ठगों ने खुद की पहचान छिपाकर ठगी की वारदात को अंजाम दिया था। आरोपितों द्वारा उपयोग किए गए मोबाइल नंबर फर्जी होने के साथ ही उनके बैंक खाते के पते भी दूसरे स्थानों के थे। आरोपितों द्वारा उन मोबाइल नंबर और खातों का उपयोग सिर्फ ठगी की वारदात करने के लिए किया गया था।

राघवेंद्र मास्टरमाइंड, फाइनेंस कंपनी में कर रहा था काम

तीनों आरोपित आपस में रिश्तेदार हैं। ठगी का मास्टरमाइंड राघवेंद्र कुमार सिंह पांच साल पहले दिल्ली की एक फाइनेंस कंपनी में काम करता था, जहां से उसने दस्तावेज और नंबर निकाले। इसके बाद उसने अपने रिश्तेदार आयुष और मंटू को शामिल किया। आरोपित 10वीं और 12वीं पास हैं। राघवेंद्र ने जाल बिछाना शुरू किया और आयुष, मंटू को बिहार से दिल्ली बुला लिया। इसके बाद अलग-अलग नंबरों पर फोन कर लोगों को झांसे में लेते और ठगी की वारदात करते। आरोपितों के खाते में करोड़ों रुपये के लेन-देन का हिसाब मिला है। आरोपित बाकायदा खाते में लेन-देन का टैक्स भी भरते थे।

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