कोरोना को लेकर मुख्यमंत्रियों के साथ 8 अप्रैल को पीएम मोदी की बैठक,जानिए क्या लिए जाएंगे बड़े फैसले?

रायपुर – कोविड-19 के बढ़ते संक्रमण के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्रियों के साथ संवाद करेंगे और इस दौरान महामारी की ताजा स्थिति के साथ ही देश भर में जारी टीकाकरण अभियान की समीक्षा करेंगे।सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्रियों के साथ प्रधानमंत्री का यह संवाद बृहस्पतिवार शाम साढ़े छह बजे निर्धारित है।

पिछली बार मोदी ने 17 मार्च को मुख्यमंत्रियों के साथ संवाद किया था। इस दौरान प्रधानमंत्री ने कहा था कि अगर इस बढ़ती हुई महामारी को यहीं नहीं रोका जाएगा तो देशव्यापी संक्रमण की स्थिति बन सकती है। उल्लेखनीय है कि भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के दैनिक मामले मात्र 25 दिन में 20,000 से बढ़कर एक लाख की संख्या पार कर चुके हैं, जबकि पिछले साल 17 सितंबर को दैनिक मामलों के उस समय की अपनी चरम संख्या 97,894 पहुंचने में 76 दिन का समय लगा था। यह दर्शाता है कि यह संक्रमण अत्यंत तेजी से फैल रहा है।

स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से सोमवार को जानकारी दी गई है कि देश में अब तक आठ करोड़ से ज्यादा लोगों को टीका लगाया जा चुका है। इस खतरनाक वायरस पर काबू पाने के लिए सभी राज्य में हर स्तर पर एहतियाती कदम उठा रहे हैं क्योंकि देश में कोरोना के बढ़ते मामलों ने केंद्र सरकार और राज्य सरकारों की चिंता बढ़ा दी है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सोमवार के ताजा आंकड़ों के अनुसार भारत में एक दिन में कोरोना वायरस संक्रमण के अब तक के सर्वाधिक 1,03,558 नए मामले सामने आए और इसी के साथ देशभर में अब तक संक्रमित हुए लोगों की कुल संख्या बढ़कर 1,25,89,067 हो गई। महाराष्ट्र में सर्वाधिक नए मामले दर्ज किए गए। महाराष्ट्र में 57,074 मामले सामने आए, जो सोमवार को देश भर में सामने आए नए मामलों का 55.11 प्रतिशत है। इसके बाद छत्तीसगढ़ में 5,250 और कर्नाटक में 4,553 नए मामले सामने आए।

ताजा मामलों में तेजी से हो रही वृद्धि के मद्देनजर प्रधानमंत्री रविवार को एक उच्चस्तरीय बैठक की थी और उसमें कहा था कहा कि कोविड-19 के ताजा संक्रमण के दौर से निपटने के लिए राज्यों को कड़े और व्यापक कदम उठाने होंगे।संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए उन्होंने पांच स्तरीय रणनीति टेस्टिंग (परीक्षण), ट्रेसिंग (पता लगाना), ट्रीटमेंट (उपचार), कोविड व्यवहार और टीकाकरण को गंभीरता और प्रतिबद्धता से लागू करने का सुझाव दिया। उन्होंने महामारी के सतत प्रबंधन और इस सिलसिले में सामाजिक जागरूकता बढ़ाने के साथ ही जन भागीदारी और जन आंदोलन जारी रखने की जरूरत पर भी बल दिया।

इस समीक्षा बैठक में एक प्रस्तुति भी दी गई, जिसके मुताबिक देश में कुल संक्रमित मामलों में 91 प्रतिशत से अधिक की हिस्सेदारी 10 राज्यों की है और इन्हीं राज्यों में कोविड-19 से सर्वाधिक मौतें भी हुई हैं। बैठक में महाराष्ट्र, पंजाब और छत्तीसगढ़ के हालात पर चिंता जताई गई और इसके मद्देनजर प्रधानमंत्री ने इन राज्यों में जन स्वास्थ्य विशेषज्ञों तथा चिकित्सकों की केन्द्रीय टीम भेजने का निर्देश दिया।इस बैठक में कैबिनेट सचिव, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

प्रधानमंत्री ने इस समीक्षा बैठक के दौरान आने वाले दिनों में अस्पतालों में बिस्तरों की उपलब्धता, जांच की उचित व्यवस्था और समय रहते मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कराना सुनिश्चित करने को कहा।उन्होंने कोरोना वायरस से होने वाली मृत्यु दर में हर हालत में कमी लाने और इसके लिए आवश्यक स्वास्थ्य ढांचा बढ़ाने पर भी जोर दिया।प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक कोविड मामलों में हुई वृद्धि बचाव संबंधी उपायों के पालन ना करने, खासकर मास्क ना पहनने और दो गज की दूरी के नियम में कोताही के कारण हुई है।कोरोना संबंधी दिशा-निर्देशों के जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन की कमी को भी इसकी एक वजह बताया गया।

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