नई दिल्ली – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को तीनों कृषि कानून वापस लेने का फैसला किया। इस कानून के खिलाफ किसान संगठन 26 नवबंर से दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे थे। मोदी सरकार के इस फैसले को 5 राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले उनका मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है। जानिए क्या है इसके मायने…

चुनाव से पहले मास्टर स्ट्रोक :

कहा जा रहा है कि मोदी सरकार ने यह फैसला कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों की नाराजगी दूर करने के लिए लिया है। माना जा रहा है कि यह फैसला यूपी और पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर ही किया गया है।

पंजाब में बढ़ेगा जनाधार :

कृषि कानून वापस लेने से एक ओर जहां किसान खुश हो जाएंगे वहीं दूसरी तरफ यूपी में भाजपा की स्थिति और भी मजबूत हो जाएगी। इस फैसले से पंजाब में पार्टी का जनाधार काफी बढ़ जाएगा।अगर पार्टी अमरिंदर सिंह को साधने में सफल रहती है तो यहां सरकार भी बना सकती है।

मोदी ने फिर जीता दिल :

उन्होंने जिस साफगोई से स्वीकार किया कि हम कुछ किसानों को कृषि किसानों को समझाने में विफल रहे। हमारी कोशिशों में ही कमी रही गई। इसे मोदी जी की किसानों का दिल जीतने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।बहरहाल गुरु पर्व पर की गई इस घोषणा से मोदीजी ने एक साथ 2 वर्गों को खुश कर दिया है। किसानों के साथ ही सिखों का दिल जीतने में भी सफल रहे हैं।

जीते तो मोदी ही :

किसान और विपक्ष भले ही इसे किसान आंदोलन की जीत बता रहे हैं। लेकिन मोदीजी तो यहां हारकर भी जीत गए। अब कोई भी किसान उनसे नाराज नहीं है। कुछ किसान उनकी योजनाओं से खुश है और कुछ आज की घोषणा से।

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