शिक्षा विभाग के कमीशनखोर गिरोह खेल,सरकार की मंशा फेल

राजनांदगांव MyNews36 प्रतिनिधि- स्कूली बच्चों को तमाम तरह की खेलों से जोडऩे के लिए भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय नई दिल्ली द्वारा ‘खेल गढिय़ा योजना’ के तहत क्रीड़ा और व्यायाय सामग्री की खरीदी हेतु प्रदान की गई पच्चीस-पच्चीस हजार की राशि में राजनांदगांव जिले में जमकर वारा न्यारा किया गया है। सामग्री खरीदी में राज्य परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा छत्तीसगढ़ के नियम कायदों की धज्जियां उड़ाए जाने का मामला उजागर होने के बाद खेलगढिय़ा की आड़ में फर्जी बिलों का खेल खेलने वाले कई सप्लायर से लेकर कई स्कूलों के प्राचार्य जांच के कटघरे में आ गए हैं। जिला शिक्षा विभाग में काफी लंबे से समय से सक्रिय कथित खेल माफिया गिरोह कमीशन की अपनी ‘रण’ में ‘विजय’ प्राप्त करने में सफल तो जरूर हो गए है,पर जिला शिक्षाअधिकारी एचआर सोम द्वारा खेलगढिय़ा योजना की जांच के लिए विकासखंड वार टीम गठित किए जाने के बाद सप्लायर और माफियाओं के हाथ-पांव फूल गए हैं। माना जा रहा है कि जांच में हीला-हवाला और यदि राजनीति नहीं हुई तो स्कूलों में बच्चों के खेल गतिविधियों के विकास के लिए आई राशि में डाका डालने का एक बड़ा मामला सामने आएगा?

उल्लेखनीय है कि खेल गढिय़ा योजना के लिए वित्तीय वर्ष 2018-19 में राजनांदगांव जिले के नौ विकासखंडों के 157 हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों के लिए 39 लाख, 25 हजार और वित्तीय वर्ष 2019-20 में कुल 1823 प्राईमरी, मिडिल, हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों के लिए दो करोड़, 47 लाख, पच्चीस हजार रूपए का आबंटन आया था। खेल गढिय़ा योजना में दोनों वित्तीय वर्ष में हाई और हायर स्कूलों को 25-25 हजार की राशि राज्य माध्यमिक शिक्षा मिशन कार्यालय रायपुर से सीधे प्राचार्यो के खाते में आटीजीएस की गई थी। खातों में राशि भेजे जाने के साथ ही योजना के तहत खेल सामग्रियों की खरीदी के लिए गाईडलाईन भी भेजी गई थी किंतु अधिकांश प्राचार्यों ने गाईड लाईन को दरकिनार खरीदी को अंजाम दे डाला। खेलगढिय़ा योजना में वर्ष 2018-19 की खरीदी के बिल व्हाउचरों को देखने से यह साफ प्रमाणित होता है कि कई स्कूलों के प्राचार्यों ने बच्चों के हक में भी हिस्सेदारी में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी है।

नोटसीट में कलेक्टर के साईन होते ही वायरल हो गया क्रय आदेश

जिला शिक्षा विभाग में कमीशन खोर गिरोह किस कदर सक्रिय है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वित्तीय वर्ष 2018-19 में खेल गढिया योजना के तहत खेल सामग्रियों के क्रय आदेश में तात्कालिन कलेक्टर जय प्रकाश मौर्य के साईन होते ही उक्त आदेश की कापी राजनांदगांव जिले के खेल सामग्रियों के सप्लायरों और स्कूलों के प्राचार्यो तक पहुंच गई। मजेदार बात यह है कि योजना की नोटशीट 13 मार्च 2019 को चली और आरएमएसए के डिस्पेच के पूर्व ही यानी क्रय आदेश में तारिख डलने के पूर्व ही उक्त पत्र वायरल हो गया। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिला शिक्षा अधिकारी एच आर सोम ने खेल गढिय़ा योजना के उद्देश्यों को काफी गंभीरता से लेते हुए इसकी जांच के लिए विकासंखड वार टीम का गठन किया है। टीम में तीन से चार पीटीआई को शामिल किया गया है। टीम को जांच करने के लिए बिंदुवार प्रोफार्मा भी तैयार किए जाने की खबर है। उक्त टीम शीघ्र ही अपनी जांच रिपोर्ट जिला शिक्षा विभाग को सौंपेगी।

बैडमिंटन, फुटबाल, कैरमबोर्ड सहित अन्य सामानों के अनाप-शनाप बिल

खेल गढिय़ा योजना में राजनांदगांव के जिन सप्लायरों के बिल सामने आए हैं उसमें बड़े पैमानेे पर भिन्नता है। एक सप्लायर ने जिस कैरम बोर्ड को ढाई हजार में दिया है उसी कैरम बोर्ड को दूसरे सप्लायर ने चार हजार से पैंतालिस सौ में सप्लाई किया गया है। इसी प्रकार जिस बैडमिंटन को एक सप्लायर ने दो-सौ में सप्लाई किया है उसी बैडमिंटन को दूसरे सप्लायर ने साढे चार सौ में प्रदाय किया है। गंभीर बात यह है कि प्रमुख रूप से राजा, मनीष, भूमिका, जेके, जैसे और अन्य सप्लायर के यहां एक ही सामानों के अलग अलग स्कूलों से अलग-अलग रेट लिए गए हैं। इससे यह प्रतीत होता है कि सप्लायरों ने भी फर्जी बिल जारी करने में कोई कसर बाकि नहीं छोड़ी है। माना जा रहा है कि इन सप्लायरों के बिलों की जांच हुई तो फर्जी बिल जारी करने के मामले में वे ब्लैक लिस्टेड होने के साथ-साथ आपराधिक षडयंत्र के भी कटघरे में आएंगे। बताया जाता है कि सप्लायरों ने स्कूलों को कोटेशन की फार्मेलिटी पूरी करने के लिए स्वयं कई फर्जी फर्मो के कोटेशनों की खानापूर्ति की है।

MyNews36 प्रतिनिधि पूरन साहू की रिपोर्ट

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