पिंट्रेस्ट ने माइक्रोसॉफ्ट के 3.70 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव को ठुकराया

इमेज-शेयरिंग और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म कंपनी पिंट्रेस्ट किसी के हाथों में जाना नहीं चाहती है। इसका ताजा प्रमाण हाल ही में मिला है जब पिंट्रेस्ट ने माइक्रोसॉफ्ट के उस प्रस्ताव को ठुकराया दिया है जिसमें माइक्रोसॉफ्ट ने पिंटरेस्ट को खरीदने की कोशिश की थी। माइक्रोसॉफ्ट की ओर से होने वाली यह सबसे बड़ी डील थी लेकिन पिंट्रेस्ट की एक ना ने इस पर पानी फेर दिया।

पिंट्रेस्ट को खरीदने के लिए माइक्रोसॉफ्ट ने 5,100 करोड़ डॉलर यानी करीब 3.70 लाख करोड़ रुपये का ऑफर दिया था लेकिन पिंट्रेस्ट ने साफ मना कर दिया। इससे यह भी साबित हो गया कि पिंट्रेस्ट एक स्वतंत्र कंपनी के रूप में काम करना चाहती है।

पिंट्रेस्ट पर क्यों थी माइक्रोसॉफ्ट की नजर


दरअसल माइक्रोसॉफ्ट अपने क्लाउड कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन कंम्यूनिकेशन का एक पोर्टफोलियो बनाना चाह रही और इसके लिए उसकी नजर पिंट्रेस्ट पर थी लेकिन अब कंपनी ने मना कर दिया है। इससे पहले माइक्रोसॉफ्ट ने टिकटॉक को भी खरीदने की कोशिश की थी, लेकिन बात बन नहीं पाई।

वैसे तो कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है इस डील को लेकर पिंट्रेस्ट और माइक्रोसॉफ्ट के बीच बातचीत बंद हो गई है लेकिन अभी यह साफ नहीं है कि माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ भविष्य में इस डील को लेकर प्रयास करेंगे या नहीं।

गौरतलब है कि ऑस्ट्रेलिा में गूगल और फेसबुक के खिलाफ चल रही मुहिम में अब अमेरिका की बड़ी टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट भी शामिल हो गई है। माइक्रोसॉफ्ट के अध्यक्ष ब्रैड स्मिथ ने सुझाव दिया है कि अमेरिका और दूसरे देशों को भी ऑस्ट्रेलिया जैसे मीडिया नियम अपनाने चाहिए, ताकि टेक कंपनियों को कंटेंट के मूल प्रकाशकों को भुगतान करने के लिए मजबूर किया जा सके। 

स्मिथ ने एक वेबसाइट से इंटरव्यू में कहा- मैं इसे स्वीकार करता हूं कि यह एक अच्छे उद्देश्य के साथ अच्छे कारोबार को समन्वित करने का मौका है। ऑस्ट्रेलिया सरकार यह नियम लागू करने जा रही है कि अखबार और खबर वेबसाइटों को फेसबुक और गूगल पर पोस्ट करने के कारण विज्ञापन से जो आमदनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को होती है, उसका एक हिस्सा उन्हें मूल कंटेन्ट निर्माता कंपनी को देना होगा।

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