MyNews36 “अनेकों रंग जिंदगी के ” : पुनर्विवाह है आज का रंग

माँ को देखा बचपन से सफेद साड़ी में…
मुझे पहनाती रंग-बिरंगे वस्त्र,पर खुद को ढकती सफेदी से….
पूछती हूँ मैं जब भी उनसे,तो कहती लाड़ो….अभी तू छोटी है।
पड़ोस के अंकल घर पर बनाते खाना….
दिखता कोई और नहीं जो रखें उनका ख़्याल….
पूछती मैं…जब भी उनसे,तो कहते लाड़ो अभी तू छोटी है।
अनगिनत सवाल,अनगिनत उलझी बातें,उम्र के साथ चलती रही।
उम्र बीती….युवा अवस्था आई….शादी की बजने वाली थी शहनाई।
एक दिन अकेले बैठ कर आया ये ख़्याल…..
जब बिदा हो जाउंगी तब कौन रखेगा माँ का ख़्याल…
उसी वक़्त मन में ठाना करूँगी माँ की शादी पहले,फिर चडूंगी डोली में…
पूरा जीवन बिता दिया मुझे पालने पोसने में…
अकेली रह गई दुनिया के झमेले में…
आज मुझे ये समझ आया,कितना ज़रूरी होता है एक हमसफर जीवन में…
जब कोई नहीं देता साथ तुम्हारा,
उस वक़्त होती है हमसफर की जरूरत…
जो बैठे साथ तुम्हारे और करे ढ़ेरों बातें…
हमारे बचपन के लिए जिसने अपनी जवानी वारी….
क्यों ना अब हम उनके जीने की वज़ह लौटा दे।

जिंदगी जीने के लिए जिंदा होना जरूरी होता है।जिंदा रहने के लिए खुश रहना,और खुशी तो किसी भी उम्र में मिल सकती है।उम्र के अंतिम पड़ाव में यदि हमें सबसे ज्यादा किसी की जरूरत होती है तो वो है,हमारे हमसफ़र की।यदि आपको मौका मिले तो दुनिया की नहीं अपने पालकों के बारे में सोचना।

यदि आप अपने माता-पिता के लिए दिल से कुछ करना चाहते है तो उनको उनके जीवन की खुशी लौटा देना,ताकि वो जीवन के अंतिम पड़ाव पर खुश रह सके और जी सके अपने लिए ।

पुनर्विवाह गलत नहीं होता खास तौर पर उस उम्र में जहां आप मानसिक रूप से परिपक्व हो चुके हो।किसी भी अच्छे कार्य ,अच्छी सोच के लिए उम्र बाधित नहीं होती।हर एक मनुष्य को अपने जीवन को अपने अनुसार और अपनी खुशी से जीने का पूरा अधिकार है ।

आप सभी के समक्ष महिलाओं की ऐसी ही वेदनाओं के साथ फिर मिलेंगी MyNews36 के द्वारा वोमेन्स एक्सपर्ट डॉ.यशा वेगड़ के साथ। समाज की नज़रों से नहीं…ख़ुद को देखें…ख़ुद की नज़रों से।धन्यवाद 🙏

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