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Mnrega Scam:मंत्रालय में दबी मनरेगा में 80 लाख के घोटाले फाईल

पहले भाजपा अब कांग्रेस के नेता लगे हैं बचाने में

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राजनांदगांव- Mnrega Scam: जिले के डोंगरगढ़ विकासखंड में वित्तीय वर्ष 2016-17 और वित्तीय वर्ष 2017-18 में में कराए गए मनरेगा के स्टापडेम निर्माण कार्य में लगभग 80 लाख रूपए के प्रमाणित घोटाले की फाईल अब फिर से खुलेगी।छत्तीसगढ़ के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री टीएस सिंहदेव को सोमवार पूरे प्रकरण की जानकारी दिए जाने के बाद कांग्रेस नेताओं से भरी प्रेस कांफ्रेस में चर्चा के दौरान

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सिंहदेव ने कहा कि-दोषी चाहे कांग्रेस के हो या भाजपा के कतई बख्से नहीं जाएंगे,उनके खिलाफ अपराध दर्ज होगा,रिकवरी भी होगी।मनरेगा से जुड़ा यह मामला ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग राजनांदगांव का है जहां विभागीय अधिकारी-कर्मचारियों ने ठेकेदारों से मिलकर मनरेगा के स्टापडेम में भ्रष्टाचार की जमकर डूबकी लगाई है।भ्रष्टाचार थोड़ा बहुत भी नहीं लाखों-करोडों में है।

पूरे मामले में आरईएस के आठ अधिकारी-कर्मचारी 25 जनवरी 2019 को सस्पेंड किए जा चुके हैं। नियमत: शासन से धोखाधड़ी, शासकीय दस्तावेजों में कूटरचना के मामले में अधिकारियों और सप्लायरों के खिलाफ अब तक एफआईआर की कार्रवाई हो जानी थी पर आरईएस के प्रभारी ईई व्हीके पसीने सहित एक एसडीओ,तीन सब इजीनियर,एक डीए और दो लेखापाल को संस्पेड कर मामले की पूरी फाईल पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय में दबी दी गई है।दरअसल इस मामले में जब भाजपा की सत्ता थी तो दोषी सप्लायरों को बचाने में भाजपा के नेता लगे रहेे अब इस मामले में कांग्रेस के कुछ नेता अपना उल्लू सीधा करने में लगे हुए हैं।पूरे प्रकरण में कांग्रेस भाजपा समर्थित 12 सप्लायर वित्तीय अनियमिता के दोषी पाए गए हैं।

मामले में अब तक फाईल को दबाए रखने से ऐसी आंशका है कि-मंत्रालय स्तर के अधिकारी-कमर्चारियों ने भी भ्रष्टाचार की गंगा में डूबकी लगा ली है? छतीसगढ़ सरकार में मंत्री बनने के बाद पहली बार राजनांदगांव आगमन पर इस मामले को लेकर विभागीय मंत्री टीएस बाबा को जानकारी देते हुए पूरे प्रकरण की फाईल सौंपी गई।

मंत्री सिंहदेव ने साफ तौर पर कार्रवाई के संकेत दिए।अब देखना यह है कि- मंत्री अपने वायदे पर खरे उतरते है या फिर कांग्रेस नेताओं के बहकावे में आकर इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल देते हैं?

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आरईएस के आठ अधिकारी-कर्मचारियों ने स्टापडेम में लगाया चूना

मनरेगा से सबंधित इस मामले की जांच अधिकारी आरईएस दुर्ग के एसई रामसागर ने की थी। 13 जून 2018 को शासन को प्रेषित जांच रिपोर्ट में उन्होने व्हीके पशीने तत्कालीन कार्यपालन अभियंता ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग राजनांदगांव,एम घोरमारे अनुविभागीय अधिकारी ग्रामीण यांत्रिकी सेवा उपसंभाग डोंगरगढ़, निखिलेश गैरारे उपअभियंता ग्रामीण यांत्रिकी सेवा उपसंभाग डोंगरगढ़, गरिमा चौहान उपअभियंता ग्रामीण यांत्रिकी सेवा उपसंभाग डोंगरगढ़, अनुपम चंद्राकर उपअभियंता ग्रामीण यांत्रिकी सेवा उपसंभाग डोंगरगढ़, विजय कुमार कौशल संभागीय लेखाधिकारी ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग राजनांदगांव, राजेद्र प्रसाद श्रीवास्तव वरिष्ठ लेखा लिपिक ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग राजनांदगांव, दीपक लाल हरिहारणों सहायक ग्रेड 03 ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग राजनांदगांव को 80 लाख रूपए के वित्तीय अनियमिता का दोषी प्रमाणित पाया था। रिपोर्ट के आधार पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास के संयुक्त सचिव एसएल नायक ने आठों अधिकारी कर्मचाारियों को 25 जून 2019 को संस्पेड कर दिया था। निलंबन के बाद दोषी सभी अधिकारी कर्मचारियों ने एफआईआर के डर से काफी हाथ पैर मारा। मामले में उच्चस्तरीय लेनदेन की भी खबर है।

ये है वो सप्लायर जो हैं फर्जी बिलों के दोषी?

डोंगरगढ़ विकासखंड के मनरेगा के तेरह स्टापडेम निर्माण कार्य में जिन सप्लायरों को दोषी पाया गया है उसमें मे. बिल्डर्स पाईंट प्रो. प्रवीण दास राजनांदगांव,केशव प्रसाद जंघेल ग्राम सलोनी,पोस्ट ढारा डोंगरगढ़, रिद्द्धी बिल्डर्स प्रो.चुन्नी यदु माथलडबरी डोंगरगांव, तेनसिंग सिन्हा ग्राम तेंदूनाला विकासखंड डोंगरगांव,एमएल वर्मा ग्राम पलांदूर डोंगरगढ़,अल्पेश कुमार पटेल डोगरगढ़, में. गुरूदेव कंस्ट्रक्शन राजनांदगांव, दीपक कुमार सिन्हा ग्राम खैरा, पोस्ट बखत रेंगाकठेरा विकासखंड डोंगरगढ़, मे. रितिक रिंकी कंस्ट्रक्शन केदारबाड़ा वार्ड 3 गली नं. 7 विकासखंड डोगरगढ़, मनोज अग्रवाल साल्हेवारा छुईखदान, अभिनव साहू सहदेव नगर राजनांदगांव एवं अन्य सप्लायर/ठेकेदार शामिल है।

इसमें कुछ सप्लायर भाजपा के हैं और कुछ कांग्रेस के।जब भाजपा की सत्ता थी तब अपने बचाव में भाजपा नेताओं की शरण में रहे अब कांग्रेस नेताओं को आका बना रखे हैं।मामले में कानूनी जानकारों का कहना है कि इस पूरे प्रकरण में यदि राज्य सरकार की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई तो हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की जा सकती है क्योंकि मनरेगा में फर्जी बिल और भुगतान का मामला है जो एक्ट के दायरे में आता है।

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