भारत में पहली बार ऑनलाइन शिक्षा के बजट को लेकर बैठक,नई शिक्षा नीति को लागू करने पर भी चर्चा

कोरोना के कारण पारंपरिक शिक्षा प्रभावित होने और ऑनलाइन शिक्षा पर जोर को लेकर पहली बार शिक्षा बजट तैयार हो रहा है।मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने ऑनलाइन क्लास, विशेष कोर्स तैयार करने और छात्रों को लैपटॉप, मोबाइल आदि देने के लिए वित्त मंत्रालय से 63,206.4 करोड़ रुपये की मांग की है।इसके अलावा नई शिक्षा नीति लागू करने के लिए 1,13,684.51 करोड़ रुपये का फंड मांगा है।

कोविड-19 के चलते अब शिक्षा प्रणाली पूरी तरह बदलने वाली है।बजट को लेकर वित्त आयोग के चेयरमैन एनके सिंह और मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक समेत मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक हुई। ऑनलाइन शिक्षा की विभिन्न योजनाओं के लिए वित्त आयोग से बजट की मांग की गई है। उच्च शिक्षा सचिव अमित खरे ने बैठक में प्रेजेंटेशन भी दी।
 

मांग पत्र 

  • ऑनलाइन कोर्स तैयार करने के लिए 2306.4 करोड़ रुपये का अनुमानित बजट
  • ऑनलाइन क्लास, छात्रों के लिए लैपटॉप, मोबाइल व टैबलेट आदि के लिए 60900 करोड़ रुपये
  • सरकारी स्कूलों में सुविधाओं के लिए 55,840 करोड़ रुपये की मांग की गई है

नेटवर्क बन सकता है बड़ी बाधा

खैर यह सब कोरोना काल के चलते ऑनलाइन स्टडी का फैसला सही है लेकिन भारत में सूचना क्रांति आने के बाद भी कई जगहों पर आज भी नेटवर्क की समस्या है,खास तौर से ग्रामीण क्षेत्रों में।ऐसे में सरकार को छात्र हिट को ध्यान में रखते हुए,इस ओर भी ध्यान देना चाहिए और इसे भी बजट में रखना चाहिए है,अब देखते है कि सरकार इस विषय पर क्या निर्णय लेती है।नेटवर्क होगा तभी सरकार का यह योजना सफल होगी अन्यथा छात्रों का भविष्य अंधकार में आ जायेगा,वही छात्र जुड़ सकेंगे जिसके पास नेटवर्क हो,बाकी नहीं,ऐसे में सरकार को या शिक्षण संस्थान को ऑनलाइन स्टडी शुरू करने के पूर्व इस विषय पर विचार करने कि शख्त आवश्यकता है।

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