जगदलपुर MyNews36 प्रतिनिधि- कोतवाली पुलिस को एक बड़ी कामयाबी मिली है।खबर है कि- पुलिस ने अवैध नशीली दवाईयों का कारोबार करने वाले तीन आरोपियों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।कुम्हारपारा चौक स्थित यात्री प्रतीक्षालय के नजदीक संचालित एक चाय दुकान में कुछ युवक संदिग्ध सामान बेचने की फिराक में खड़े थे।तलाशी के दौरान ही पुलिस ने युवकों के कपड़ों और जेब में छुपाकर रखे कुल 720 नग अवैध नशीली दवाईयां बरामद की।जिसकी कीमत 4 हजार 4 सौ 55 रुपये आंकी गई है। नशीली दवाइयां बरामद होते ही पुलिस ने आरोपी किशोर दास (34) निवासी कुम्हारपारा, नदीन झा (27) निवासी गंगा नगर वार्ड और दिवाकर दीवान (23) निवासी सुभाष पेट्रोल पंप के सामने, हाटकचोरा को तत्काल गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने एनडीपीसी की धारा 21 के तहत अपराध पंजीबद्ध करते हुए आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।

दरअसल जिस इलाके से पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया इन इलाकों में नशीली दवाओं का कारोबार बड़े पैमाने पर चलता है। इन जगहों पर गरीब तबके के लोग नशे की लत व कमाई की लालच में अवैध कारोबार करते हैं, लेकिन इनके पीछे बड़े सौदागरों का हाथ रहता है, जो इन्हें मोहरा बनाकर काम कर रहे हैं। पुलिसकर्मियों पर जब कार्रवाई का दबाव पड़ता है तो दिखावे की कार्रवाई की जाती है और इसी तरह से छोटी-मोटी कार्रवाई कर खानापूर्ति की जाती है। पुलिस चाहे तो नशीली दवाओं के बड़े सौदागरों तक आसानी से पहुंच सकती है, लेकिन पुलिस खुद बड़ी कार्रवाई करने से बचने का प्रयास करती है।भारतीय जनता पार्टी पूर्व पार्षद कौशिक शुक्ला ने MyNews36 को बताया कि-

Photo: भारतीय जनता पार्टी पूर्व पार्षद -कौशिक शुक्ला

राजनीतिक दबाव में काम करती है पुलिस

भले ही पुलिस इस तरह के अवैध कारोबार पर रोक लगाने के लिए दावे करती है और कार्रवाई का ढिंढोरा पिटती है, लेकिन जब बड़ी कार्रवाई की बात आती है, तो पुलिस हाथ खींच लेती है। इसकी वजह राजनीति पहुंच को माना जाता है। हालॉकि अधिकारी राजनीतिक दबाव जैसे सवालों को आसानी से टाल देते हैं, लेकिन यह सच है कि नशीली दवाओं से जुड़े कारोबार में राजनीतिक पहुंच रखने वाले भी शामिल रहते हैं। यही वजह है कि दबाव पड़ने पर पुलिस छोटी मोटी कार्रवाई कर खानापूर्ति कर लेती है।

वसूली का बना जरिया

नशीली दवाओं के अवैध कारोबार का प्रमुख कारण वसूली का जरिया है। दरअसल, जिन इलाकों में इस तरह का कारोबार चल रहा है, वहां जाकर पुलिसकर्मी हफ्ता व महीना वसूली करते हैं। यहां तक विशेष टीम के लिए भी यह धंधा कमाई का जरिया बन गया है। इसलिए पुलिस अभियान चलाकर लगातार कार्रवाई नहीं करती। पुलिस ऐसा करती, तो जगह-जगह खुलेआम नशीली दवाओं की बिक्री नहीं होती। उनके मन में पुलिस के प्रति खौफ होता।

बस्तर से होती है सप्लाई

पुलिस अफसर बताते हैं कि नशीली दवाइयों का कारोबार जगदलपुर से संचालित होता है। यहां फोन से नशीली दवाइयों की सप्लाई होती है। इतना सब कुछ जानते हुए भी अफसर इस कारोबार से जुड़े सफेदपोश चेहरों को सामने लाने की हिम्मत नहीं जुटा पाती। शहर तक नशीली दवाइयां पहुंचने के पहले ही पुलिस सतर्क हो जाती और बड़े व्यापारियों को निशाना बनाती तो यह कारोबार पनपता ही नहीं।

नशीली दवाओं के कारोबारियों का दावा है कि इसमें शहर के कुछ दवा व्यावसायियों की मिलीभगत है। इनमें ऐसे दवा व्यावसायी शामिल हैं, जिनका कारोबार नहीं चलता। लिहाजा, अवैध कमाई करने के लिए व्यापारी इसे जरिया बना लिया है। नियम-कानून के मुताबिक डॉक्टर के बिना पर्ची के नशीली दवाओं की बिक्री पर प्रतिबंध है, लेकिन शहर में अधिकांश दुकानों में नशीली दवाइयों के लिए परची देखने का प्रावधान ही नहीं है। यह आमजनों को दिखाने के लिए है। व्यापारियों को यह भलीभांति मालूम रहता है कि कौन व्यक्ति नशीली दवा का इस्तेमाल करने का आदि है। लिहाजा, उन्हें देखकर ही दवाइयां उपलब्ध करा दी जाती है।

आसानी से तह तक पहुंच सकती है पुलिस, लेकिन….

जिला व पुलिस प्रशासन का अमला चाहे तो नशीली दवाओं के कारोबारियों पर आसानी से रोक लगा सकती है। इसके लिए गरीब व निम्न वर्ग के लोगों पर दिखावे की कार्रवाई की जरुरत नहीं है। जिला व पुलिस प्रशासन संयुक्त रूप से अभियान चलाकर कार्रवाई करेगी और जब्त दवाइयों की कंपनी, रजिस्ट्रेशन नंबरों के साथ ही सारी जानकारी एकत्रकर उच्चस्तरीय कार्रवाई की जाए, तो नीचे से लेकर ऊपर तक के सभी कारोबारियों का चेहरा बेनकाब हो सकता है, लेकिन जिला व पुलिस प्रशासन भी इस कारोबार को बंद कराने के लिए कार्रवाई नहीं करते। कार्रवाई सिर्फ आमजनों को दिखाने के लिए की जाती है।

औषधि प्रशासन विभाग की मौन स्वीकृति

झूठ बोलना नशा करने वालों की फितरत बन जाती है,परिजनों व डाक्टर को वे कभी नहीं बताते की किस प्रकार का नशा करते हैं। नतीजतन उनकी बीमारियों और नशा छुड़ाने के इलाज को सही दिशा नहीं मिल पाती है। चिकित्सा विज्ञान की आधुनिक तकनीक से पेशाब के टेस्ट ही नशेड़ी पकड़े जाएंगे और dp ब्लड टेस्ट से ड्रग्स का पता लगाया जा सकता है।

डॉ. मनीष मेश्राम,डिमरापाल- जगदलपुर

नकली व नशीली दवाइयां सहित इस तरह से अनैतिक व्यापार पर रोक लगाने के लिए जिला व औषधि प्रशासन विभाग के अफसरों को कार्रवाई का अधिकार है, लेकिन अधिकारियों को शहर में नशीली दवाईयों की बिक्री से कोई मतलब ही नहीं है। यही वजह है कि विभागीय अफसर इस तरह की कार्रवाई करने से ही गुरेज करते हैं।

पुलिस इस अवैध कारोबार से जुड़े सभी लोगों पर कार्रवाई करना चाहती है, लेकिन छोटे व निम्न वर्ग के व्यापारी अपनी रोजी-रोटी के चक्कर में बड़े व्यापारियों का नाम लेने से बचते हैं। दरअसल इस तरह की कार्रवाई जिला व औषधि प्रशासन विभाग को करनी चाहिए।

MyNews36 प्रतिनिधि एस. डी. ठाकुर की रिपोर्ट

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