आइए चलते है…अपने सबसे प्यारे दोस्त से मिलने…जिसके पास हमारे सभी सवालों के होते है जवाब,आज की विशेष रचना “पुस्तकालय”

मैं शब्द हूं,मैं स्वर हूं,
मैं बोली में हूं,तो कभी टोली के गीतों में हूं,
कभी मैं ध्वनी में हूं,तो कभी मैं मौन हूं,
कभी मैं किताबों में हूं,तो कभी दीवारों में हूं,
कभी गंगा की आरती में हूं,तो कभी मरुस्थल में हूं,
मुझसे ना जन्म छुपा तेरा,ना मृत्यु मेरे बिना प्रमाणित तेरी,
मैं ही तो रखती हिसाब किताब तेरे,
चित्रगुप्त भी देखता हर कर्म तेरे मुझमें,
हाँ पोथी है नाम मेरा📙

कुछ बच्चे मुझे बोल पाते,तो कुछ तुतलाते,
कभी किसी के शब्दों में मैं खामोश हूं,तो कभी कोई मुझे सिर्फ सुन पाते,
कभी कोई मुझे देख ना पाता,तो कभी सिर्फ महसूस कर अपनी भावनाएं व्यक्त कर जाता।
रंगों से भरी मेरी हर एक कहानी,हर पन्नो में मैं कुछ नया सिखाती,
हर बस्ते में मैं पाई जाती,कभी टिफिन के बीच,
तो कभी पेटी में साथ जाती,
हर धर्म मे,हर वर्ग में,हर जात की भेद को काट,मैं सबको एक समान पढ़ाती हूं,
देती सभी को संस्कार,अपनी संस्कृति के पास लाती,
आते बच्चे मेरी गोंद में,शब्दशाला कहलाती,
हाँ मैं पुस्तक कहलाती हूं।

मैं सतयुग से चली आ रही हर घर में आज भी पाई जाती हूं,
मैं तब भी न्याय प्रिय थी,आज भी न्याय सिखाती हूं,
मैं तब भी लिखी जाती थी,आज भी पढ़ी जाती हूं,
सतयुग गया,त्रेता आया, वो भी गया द्वापर आया,फिर आया कलयुग पर देखो मैं आज भी वैसी ही हूं,
सबको एक समान सिखाती,सबको एक समान ज्ञान बाटती,
पर कोई निकलता हीरो यहाँ पर,तो कोई राजनीति रचाता,
कोई मंदिर में बैठ मेरे भजन गाता, तो कोई औरों को शिक्षित करता,
कोई मुझे रोज पलटता,तो कोई धूल खाने को छोड़ देता,
कभी में रद्दी में मिलती, तो कभी कोई मुझे पढ़ने लाइब्रेरी आता,
हाँ मैं वहीं शब्दकोश हूं📗

पहले लोग मुझे पढ़ते तो न्याय और नेक राह में चलते,
अपने पूर्वजों को जान पाते,फिर वैसी ही हिम्मत खुद में लाते,
आज की विडंबना देखो मुझे ही रोज जलाते,
ना करते मेरा सम्मान, ना करते गुरुजनों का मान,
पर आज भी मैं उनके हर सवालों का हूं जवाब,
हाँ मैं हूं एक किताब,📔

मुझे पढ़ पहले कभी कोई बेरोजगार ना हुआ करता था,
गरीबी की हालत में ना यू रोया करता था,
सिर्फ मेट्रिक पढ़ कर भी गुजारा चलता था,
पर आज की दौड़ तो देखो भाई, इंजीनियरिंग कर के भी सिर्फ ऑटो ही चलाता है,
युवा पीढ़ी आज फिर मौत को गले लगाता है,
क्यों है इतनी महामारी जीवन में, क्यों है लोग आज इतने बेरोजगार हर घर में….
मुझे तलाश है एक ऐसे युग की जो रचेता बने आने वाले सुंदर भविष्य की,
हाँ मैं शब्दावली हूं,📖
हाँ मैं वो हि पुस्तकालय हूं ✍️📖

MyNews36 “सखी तेरे साथ” की एक खास पेशकश “पुस्तकालय” पुस्तक आपका सबसे सुंदर मित्र और सबसे प्यारी सखी बन सकती है यदि उसे आप मित्र बनाना चाहे तो हर वर्ग, हर उम्र, हर घर, हर जगह, और हर वक़्त ये मित्र आपके साथ होगा। ये थी पुस्तक दिवस पर हमारी विशेष रचना।ऐसे ही सुंदर कविताओं और रचनाओ के साथ आपसे फिर मुलाकात होगी तब तक के लिए सुरक्षित रहे,घर पर रहे और बने रहे MyNews36 से वोमेन्स एक्सपर्ट डॉ. यशा वेगड़ के साथ ।

#worldbookday

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