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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बहुमत से भी अधिक सीट हासिल कर एक बार फिर सत्ता अपने नाम कर ली है।अब कल यानी 30 मई को वह दोबारा प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे।भाजपा से आम जनता को काफी उम्मीदें हैं।लेकिन उनके शपथ लेने से पहले भारत को झटका लगा है।भारत को ये झटका किसी और ने नहीं, ल्कि अमेरिका से मिला है।दरअसल अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने भारत को प्रमुख व्यापार भागीदारों की मुद्रा निगरानी सूची से हटा दिया है।

सूची से बाहर हुए भारत और स्विट्जरलैंड

पिछले साल अक्टूबर में ही मुद्रा निगरानी सूची में चीन,जर्मनी,जापान,दक्षिण कोरिया,भारत और स्विट्जरलैंड शामिल हुए थे।बता दें कि-अमेरिका उन देशों को निगरानी सूची में रखता है,जिनकी विदेशी विनिमय दर पर उसे शक होता है।संयुक्त राज्य अमेरिका के ट्रेजरी विभाग ने देश के विदेशी मुद्रा में वृद्धि का हवाला देते हुए मुद्रा आर्थिक नीतियों की निगरानी सूची में भारत को जोड़ा था।लेकिन अब यूएस कांग्रेस को दी गई रिपोर्ट के अनुसार,भारत और स्विट्जरलैंड इस सूची से बाहर हो गए हैं।

सूची में जगह बनाने में चीन रहा कामयाब

वहीं चीन अब भी इसमें अपनी जगह बनाने पर कामयाब रहा है।साल 2018 में चीन का यूएस के साथ अतिरिक्त माल व्यापार 419 बिलियल डॉलर था।ट्रेजरी ने चीन से लगातार कमजोर मुद्रा से बचने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया है।चीन के अलावा, जापान, दक्षिण कोरिया, जर्मनी, आयरलैंड, इटली, मलेशिया, वेतनाम और सिंगापुर मुद्रा निगरानी सूची में शामिल हैं।

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