बिलासपुर / Jhiram Ghati Incident – झीरम घाटी जांच आयोग की मंगलवार को बिलासपुर में पहली सुनवाई हुई। इस दौरान आयोग के समक्ष कांग्रेस नेता जितेंद्र मुदलियार और निखिल द्विवेदी की ओर से वकील सुदीप श्रीवास्तव व देवेंद्र प्रताप सिंह, राज्य शासन की ओर से वकील सुदीप अग्रवाल ने शपथपत्र व वकालतनामा पेश किया है। 15 मिनट में ही सुनवाई पूरी हो गई। अब सात मई को रायपुर में सुनवाई होगी।राज्य शासन ने करीब पांच महीने पहले सेवानिवृत्त जस्टिस सतीश अग्निहोत्री और जस्टिस जी मिन्हाजुद्दीन की दो सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग का गठन किया था। बाद में पूर्व जस्टिस विमला सिंह कपूर को भी इसमें शामिल किया गया है। आयोग को छह महीने में जांच पूरी कर रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपने की बात कही गई थी। लेकिन आयोग के गठन के साथ ही सुनवाई की प्रक्रिया में ही पांच महीने बीत गए।मंगलवार को हुई प्रारंभिक सुनवाई में याचिकाकर्ताओं के वकीलों के द्वारा आयोग को बताया गया की बहुत से लोगों को आज की सुनवाई की जानकारी नहीं है। इस पर आयोग ने कहा कि जिन्हें जानकारी नहीं भी हुई है वे आवेदन लगाकर शपथ पत्र पेश कर सकते हैं उनपर विचार किया जाएगा। नए आयोग की सुनवाई में पूर्व में जारी जांच के बिंदुओं के साथ ही नए बिंदुओं को शामिल किया गया है।

इनमें क्या हमले के बाद पीड़ितों को समुचित चिकित्सा उपलब्ध कराई गई। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या समुचित कदम उठाए गए अन्य महत्वपूर्ण बिंदु जो परिस्थितियों के मुताबिक आयोग निर्धारित करे यह सब बिंदु होंगे। पहले दिन सुनवाई 15 मिनट में ही खत्म हो गई। अगली सुनवाई के लिए आयोग ने सात मई की तिथि तय की है।

जस्टिस मिश्रा कर रहे थे आयोग की अध्यक्षता

भाजपा सरकार के समय में हाई कोर्ट के जस्टिस प्रशांत मिश्रा की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग का गठन किया गया था। तब से आयोग इस मामले की सुनवाई कर रही थी। जस्टिस प्रशांत मिश्रा के चीफ जस्टिस बनने के पहले ही आयोग का कार्यकाल 30 सितंबर 21 को खत्म हो गया था।

इसी बीच उनकी पदोन्न्ति चीफ जस्टिस के पद पर हो गई। राज्य शासन ने नए आयोग गठन के लिए जारी अधिसूचना में स्पष्ट किया है कि जस्टिस प्रशांत मिश्रा आयोग का कार्यकाल खत्म हो गया है और जस्टिस प्रशांत मिश्रा चीफ जस्टिस बनकर आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट चले गए हैं। ऐसे में सरकार ने आयोग में दो नए सदस्यों को शामिल करने का निर्णय लिया है।

सरकार ने जांच अधूरी होने की बात कही

झीरम घाटी हमले की जांच कर रहे न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा न्यायिक जांच आयोग ने छह अक्टूबर को राज्यपाल अनुसुइया उइके को जांच रिपोर्ट सौंपी थी। झीरम हत्याकांड जांच आयोग के सचिव और हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार संतोष कुमार तिवारी यह रिपोर्ट लेकर राजभवन पहुंचे थे। यह रिपोर्ट 10 खंडों और चार हजार 184 पेज में तैयार की गई थी। इसके बाद राज्य सरकार ने आयोग की जांच पूरी नहीं होने की बात कही थी।

2013 में हुआ था हमला

कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर 25 मई 2013 को झीरम घाटी में हुए एक नक्सली हमले में 29 लोग मारे गए थे। इसमें कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, दिग्गज नेता महेंद्र कर्मा, उदय मुदलियार के साथ ही पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विद्याचरण शुक्ल जैसे नाम भी शामिल थे। देश में किसी राजनीतिक दल पर हुआ यह सबसे बड़ा हमला था।

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