Mahabharata
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Mahabharata: बड़े-बुजुर्गों से सुनते आए हैं कि महाभारत (Mahabharata) को घर में नहीं रखना चाहिए और ना ही इसका घर में पाठ करना चाहिए क्योंकि इससे घर में लड़ाई-झगड़े होते हैं। क्या यह धारणा सही है या नहीं? आओ जानते हैं इस संबंध में खास बात।

  1. चार वेदों के बाद महाभारत को पांचवां वेद माना गया है। अर्थात इसे वेद के समान दर्जा प्राप्त है। जब वेद रखे जा सकते हैं तो इसे भी रखा जा सकता है क्योंकि वेद में भी महाभारत के युद्ध के समान ही दशराज्ञ और इंद्र-वृत्तासुर का वर्णन मिलता है। दशराज्ञ या दसराजा के युद्ध में भी आपसी कुल की ही लड़ाई का वर्णन मिलता है।
  2. कई घरों में दुर्गा सप्तशती, रामायण, पुराण या अन्य ग्रंथ मिलते हैं। सभी में ही युद्ध का वर्णन मिलता है तो यह समझना की युद्ध का वर्णन होने के कारण हम इसे घर में नहीं रखें तो यह उचित नहीं।
  3. कोई यह मानता है कि इसे घर में रखने से रिश्तों में घटास आती है तो रामायण में भी रिश्तों को लेकर बहुत कुछ है। आप यह सोच सकते हैं कि इससे आपका दाम्पत्य जीवन खराब हो सकता है और आपको भी वन में रहना पड़ सकता है। घर में ऐसे कई उपन्यास भी होंगे जिसमें रिश्तों को लेकर बहुत कुछ लिखा होगा। दुनिया के हर धर्मंग्रंथ में रिश्तों और युद्ध को लेकर बहुत कुछ लिखा हुआ है।
  4. प्राचीनकाल में हर घर में महाभारत ग्रंथ होता था लेकिन मध्यकाल में यह धारणा कैसे फैली या फैलाई गई की महाभारत को घर में नहीं रखना चाहिए यह कोई नहीं जानता। यह एक अफवाह है जो अब सच के रूप में स्थापित हो चुकी है। गुलामी के काल में हिन्दुओं को उनके धर्मग्रंथों, भाषा और संस्कृति से काटने के लिए कई तरह के दुष्प्रचार हुए हैं जिसमें से एक ये भी है कि महाभारत को घर में नहीं रखना चाहिए और रामायण तो झूठ है।
  5. महाभारत में वेद, पुराण, उपनिषद, भारतीय इतिहास और हिन्दुओं के संपूर्ण ग्रंथों का सार और निचोड़ मिलता है अत: इस ग्रंथ का घर में होना तो अत्यंत ही जरूरी है क्योंकि सिर्फ इसे पढ़ने और समझने से संपूर्ण ग्रंथों और इतिहास को पढ़ और समझ लिया जाता है।
  6. महाभारत न्याय, अन्याय, रिश्तों और जीवन से जुड़ी हर समस्याओं का वर्णन मिलता है। यह ग्रंथ व्यक्ति को बुद्धिमान और समझदार बनाकर समाज एवं राजनीति में भी निपूण बनाता है। अत: प्रत्येक व्यक्ति इस ग्रंथ का अध्ययन करने इसमें लिखे सूत्रों को समझना चाहिए जो जीवन में बहुत ही काम आते हैं।
  7. जो बालक बचपन में ही महाभारत का अध्ययन कर लेता है वह बड़ा होकर बहुत ही मेधावी निकलता है क्योंकि जो ज्ञान हम जीवन भर में अनुभव से हासिल करते हैं वह ज्ञान महाभारत में लिखा है जो कि पहले ही हासिल हो जाने के जीवन में कब क्या हो सकता है इसका ज्ञान पूर्व में ही हो जाता है। ऐसे में व्यक्ति को यह ज्ञान जीवन पथ पर सफलता पूर्वक आगे बढ़ने में मदद करता है। रामायण इस बात पर जोर देती है कि जीवन में क्या करना चाहिए और महाभारत इस बात पर जोर देती है कि जीवन में क्या नहीं करना चाहिए इसलिए घरों में दोनों की ग्रंथों का होना और उन्हें अपने बच्चों को पढ़ाना बहुत ही जरूरी है।
  8. महाभारत में श्रीकृष्ण के गीता ज्ञान के अलावा और भी कई तरह के ज्ञान शामिल हैं। जैसे- पराशर गीता, धृतराष्ट्र-संजय संवाद, विदुर नीति, भीष्म नीति, यक्ष प्रश्न आदि।
  9. हिन्दुओं के किसी भी ग्रंथ में यह नहीं लिखा है कि महाभारत को घर में नहीं रखना चाहिए। यदि ऐसा होता तो क्या वेद व्यासजी इसे स्पष्ट नहीं करते। यह पुस्तक जहां जहां रखी हैं वहां तो ऐसा कुछ नहीं हुआ।
  10. दरअसल यह एकमात्र ऐसा ग्रंथ है जो संपूर्ण हिन्दू धर्म और उसके इतिहास का प्रतिनिधित्व करता है और धर्म, नीति, ज्ञान, तर्क, राजनीति, मोक्ष, विद्या और संपूर्ण कलाओं का ज्ञान देकर धर्म स्थापना के सूत्र बताते हैं। कोई विधर्मी ही चाह सकता हैं कि यह ग्रंथ हिन्दू नहीं पढ़ें और न घरों में रखें ताकि वह इस ग्रंथ से कटता जाए।

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